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मोदी-शाह के मास्टर स्ट्रोक के आगे झुके अलगाववादी और राजनीतिक दल, बिना शर्त बातचीत को तैयार!

Wed, 21 Aug 2019 07:37 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 21 Aug 2019 07:37 PM IST
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After revoke Article 370 Hurriyat, NC and PDP are ready to talks with Centre!
अमित शाह और सत्यपाल मलिक (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
नए कश्मीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का मास्टर स्ट्रोक हिट रहा है। इसी का नतीजा है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। मौजूदा हालात में जो नई बात सामने आई है वह सरकार को राहत देने वाली है। राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकारों के पास ऐसी सूचनाएं आ रही हैं कि घाटी में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, अलगाववादी संगठनों के प्रतिनिधि और दूसरे सामाजिक संगठन बातचीत करने के लिए तैयार हो रहे हैं। संभव है कि अगले सप्ताह ऐसे ही कुछ संगठन राज्यपाल के साथ बातचीत के लिए आगे आएं। गृह मंत्रालय को जो जानकारी मिली है, उसमें कहा गया कि ये संगठन बिना किसी शर्त के मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हैं। 
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नौ दिन रहे डोभाल

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में जो बंदिशें लगी थी, उन्हें हटाने एवं लोगों को मुख्य धारा में वापस लाने के लिए पीएम मोदी और अमित शाह ने जो मास्टर प्लान तैयार किया था, वह पूरी तरह कामयाब रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, पीएमओ के अधिकारी और राज्यपाल सत्यपाल मलिक की टीम ने संयुक्त तौर पर जिस फुर्ती से काम किया, उसका नतीजा है कि अब वहां का जीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है। दोभाल ने घाटी में ही नौ दिन तक रहकर वहां का माहौल सुधारने में सबसे अधिक सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने मौलवियों, सरपंचों और दूसरे संगठनों के प्रतिनिधियों से खुलकर बातचीत की।

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अधिकारी सुनेंगे लोगों की शिकायतें

अब इंटेलीजेंस एजेंसियों और स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों से मिल रही रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला किया गया है कि राज्यपाल के चार सलाहकार जम्मू और कश्मीर में नियमित तौर पर लोगों की शिकायतें सुनेंगे। जम्मू में के.विजय कुमार गुरुवार, के.के. शर्मा मंगलवार, के. स्कंदन शुक्रवार और फारूख खान सोमवार को कैनाल रोड स्थित बैंक्वट हाल में सुबह 10 से 12 बजे तक मौजूद रहेंगे। इसी तरह श्रीनगर में के.विजय कुमार मंगलवार, के.के. शर्मा शुक्रवार, के. स्कंदन सोमवार और फारुख खान गुरवार को लोगों की समस्याएं सुनेंगे।

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अलगाववादी बातचीत के इच्छुक

राज्यपाल के सलाहकारों की रिपोर्ट और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में भले ही प्रमुख राजनीतिक दल इस समय सक्रिय नहीं हैं, लेकिन इन पार्टियों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में साफतौर पर हलचल देखी जा रही है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के स्थानीय नेता अब सरकार से बातचीत करने का मन बना रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन दलों के कई प्रतिनिधि अनौपचारिक तौर पर राज्यपाल के सलाहकारों की टीम से मिल चुके हैं। वहीं अलगाववादी खेमे के कई नेता भी अब जिद छोड़कर सरकार के साथ चलने का मन बना रहे हैं। वे जानते हैं कि उनकी जिद ज्यादा लंबी चल सकती। 

नए एंटी टेरर बिल का खौफ

केंद्र सरकार पहले ही अनुच्छेद 370 को खत्म कर चुकी है, ऐसे में इन संगठनों की मर्जी है कि ये दल कब तक खुद को नए कश्मीर का हिस्सा बना पाते हैं। इन लोगों के पास अब दूसरा विकल्प भी नहीं बचा है। वहीं सरकार के पास ऐसे बहुत से नेताओं और अलगाववादियों व दूसरे संगठनों से जुड़े लोगों की सूची है, जो जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। नए एंटी टेरर बिल के पास होने के बाद इन लोगों को पता है कि गैर कानूनी गतिविधियों के आरोप में इन्हें सरकार कभी भी आतंकवादी घोषित कर सकती है। यह डर भी इन पर मुख्य धारा में लौटने का दबाव बना रहा है।

समर्थकों ने किया किनारा!

आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सीनियर फेलो खालिद शाह कहते हैं, इस बात की पूरी संभावना है कि लोगों में राजनीतिक दलों और अलगावादियों के प्रति अब भारी गुस्सा है। जैसे ही कश्मीर की स्थिति सामान्य होगी, स्थानीय कार्यकर्ता इन संगठनों से किनारा कर सकते हैं। लाेग सिर्फ उचित समय और माहौल ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं। घाटी के बहुत से लोग यह महसूस करने लगे हैं कि पहले वाली व्यवस्था अब नहीं आएगी। उन्हें अपना रास्ता अलग से चुनना ही पड़ेगा। दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपने नेताओं को हिरासत से बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं। मोदी-शाह के मास्टर स्ट्रोक ने अब हुर्रियत की सियासत को भी रास्ते पर ला दिया है। इसके युवा सदस्य अब विकास और सामाजिक न्याय जैसी बातों का समर्थन करते दिख रहे हैं।

 

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