भारत-नेपाल सीमा पर पाकिस्तान के बाद अब ड्रैगन की ताक-झांक, शिक्षा केंद्रों से कर रहे हैं दुष्प्रचार
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एसएसबी ने उक्त गतिविधियों को रोकने के लिए मानवीय इंटेलिजेंस की मदद लेना शुरू किया है। सीमा पर गश्त के दौरान कोई लापरवाही न हो, इसके लिए जीपीएस और कैमरों की मदद ली जा रही है।
एसएसबी के अफसरों का कहना है कि पाक से जुड़े कई आतंकी समूहों की लंबे समय से नेपाली सीमा के जरिए भारत में आतंकी गतिविधियां चल रही हैं। पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई ने भारत-नेपाल सीमा पर ऐसे कई स्थान, जो पिछले कुछ वर्षों तक किसी देश के कब्जे में नहीं थे, उन्हें आतंकियों के ट्रेनिंग सेंटर के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। उसी दौरान चीन की खुफिया एजेंसियों की ताक-झांक भी सामने आई थी। कई जगहों पर ऐसे मामले देखने को मिले, जहां चीन की खुफिया एजेंसी, आईएसआई के साथ मिलकर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है।
सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों में भारतीय सेना एवं अर्धसैनिक बलों के प्रति गलत सूचनाओं का प्रचार किया जा रहा है। कई साल पहले भारत-नेपाल बॉर्डर पर सीमा को दर्शाने वाले डेढ़ सौ से ज्यादा खंबे गायब हो गए थे। उत्तर-पूर्व के माओवादी संगठनों से जुड़े कई सदस्य छत्तीसगढ़ से पकड़े गए थे, उन्होंने पूछताछ के दौरान नेपाल सीमा पर ऐसी गतिविधियां शुरू होने की बात स्वीकार की थी। अब ड्रैगन की उपस्थिति भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के एक बड़ी चुनौती बन रही है। भूटान सीमा पर पहले से ही चीन की गतिविधियां देखने को मिली हैं।
एसएसबी के मुताबिक चीन से जुडे कई संगठनों ने सीमा पर शिक्षण केंद्र खोल रखे हैं। वह इन्हीं केंद्रों की आड़ में भारत की गतिविधियों को ट्रैक करता है। उसने स्थानीय लोगों को कई तरह की मदद देकर अपने सूत्र बना रखे हैं। इसके अलावा शिक्षण केंद्रों में दूरबीन और हाईटेक कैमरे भी लगाए गए हैं। इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि चीन के इन केंद्रों के जरिए पाकिस्तानी आईएसआई अपने कई तरह के मंसूबों को अंजाम देती है। एसएसबी ने इसके लिए अपनी इंटेलिजेंस विंग को खासी मजबूती प्रदान की है।
बॉर्डर से भारत में घुसने का प्रयास
पिछले साल की बजाए इस बार ये मामले दोगुना हो गए हैं। 2018 में 28 लोग नेपाल सीमा के जरिए भारत में घुसने का प्रयास करते पकड़े गए थे। इनमें आतंकी, नकली नोटों का धंधा करने वाले एवं दूसरे संदिग्ध लोग शामिल हैं। इस साल 59 लोगों को पकड़ा गया है। इनमें ज्यादातर पाकिस्तानी और बांग्लादेशी हैं। चीन के चार नागरिक और अमेरिका के तीन नागरिक भी नेपाल बॉर्डर से भारत में घुसने का प्रयास करने वाले लोगों की सूची में शामिल हैं।
सशस्त्र सीमा बल के महानिदेशक कुमार राजेश चंद्रा ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। चूंकि भारत-नेपाल के बीच दोस्ती बॉर्डर है, इसलिए वहां हर जगह पर फेंसिंग नहीं की गई है। इस वजह से थर्ड पार्टी देशों के अवांछित तत्वों की घुसपैठ या दूसरी संदिग्ध गतिविधियों की संभावना बनी रहती है। इसके लिए कुछ जगहों पर लेजर फेंसिंग लगाई जा रही है। हालांकि अभी ये पायलट प्रोजेक्ट है, लेकिन इसके नतीजे ठीक मिले, तो सीमा के दूसरे हिस्सों पर भी इसे लगाया जा सकता है।
ऐसे लोग नेपाल और भूटान का वीजा लेकर भारत में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं। वे जानते हैं कि नेपाल के जरिए भारत में प्रवेश संभव है। चूंकि अब फ्रेंडली बॉर्डर है, तो वाहनों में बैठे हर व्यक्ति की जांच पड़ताल नहीं की जाती। इसी चक्कर में कई बार थर्ड पार्टी कंट्री के नागरिक भारत में घुसने का दुस्साहस करते हैं। भारत नेपाल सीमा पर एसएसबी ही इंटेलिजेंस जुटाने की लीड एजेंसी है, इसलिए ऐसी घटनाओं पर हम कहीं ज्यादा तेजी से नजर रख पा रहे हैं।
वर्तमान में भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाओं पर 53 एसएसबी बटालियन तैनात हैं। भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाओं की सुरक्षा के अपने कर्तव्यों को पूरा करने, सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच सुरक्षा की भावना को बढ़ावा देने और सीमावर्ती क्षेत्रो में अपराधों को रोकने के लिए सीमा पर 719 बीओपी (बॉर्डर आउट पोस्ट) स्थापित व परिचालित की गई हैं।