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नोटबंदी के बाद देश का पहला कैशलेस गांव बनेगा ठाणे का धसई

Sun, 27 Nov 2016 05:40 AM IST
सुरेन्द्र मिश्र
सुरेन्द्र मिश्र Updated Sun, 27 Nov 2016 05:40 AM IST
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 After DeMonetisationThane dhashai will become the first cashless village of the Country
नई गाइडलाइन के बाद भीड़ हुई कम - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के बाद हो रही दिक्कतों को लेकर राजनीतिक पार्टियां हायतौबा मचा रही हैं, लेकिन कालेधन के खिलाफ शुरू मुहिम का हिस्सा बनने और नोटबंदी के विकल्प के प्रति कुछ करने का साहस कोई नहीं दिखा रहा है। 
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मुंबई स्थित स्वतंत्रवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक इस मुहिम के लिए आगे आया है जिससे मुंबई से सटे ठाणे जिले की मुरबाड़ तहसील का धसई गांव देश का पहला ऐसा गांव बनने जा रहा है जहां नगदी की जरूरत न के बराबर होगी और प्लास्टिक मनी कार्ड से सभी लेनदेन हो सकेंगे।
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ठाणे जिले का धसई गांव एक बड़े ग्रामीण बाजार के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहां की आबादी 10 हजार है। इस गांव में डेढ़ सौ से अधिक व्यापारी प्रतिदिन एक करोड़ रुपये का व्यवसाय करते हैं। धसई सहकारी सोसायटी से कई व्यापारी जुड़े हुए हैं जिनका दुग्ध, अनाज और किराना का व्यवसाय है। धसई बाजार में न सिर्फ गांव के लोग बल्कि आसपास के गांव आनंदवाड़ी, पलू, सोनावले, रामपुर, कलंबाड़, मिल्हे, देवरी खेवारे और जायगाव के नागरिक और व्यापारी भी यहां खरीदी-विक्री के लिए आते हैं।
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धसई बाजार आसपास के करीब 70 गांवों का केंद्र है। नोटबंदी के बाद यहां डेविड कार्ड के जरिए लेनदेन के लिए 34 स्वाइप कार्ड मशीनें मंगाई गई हैं। इसके अलावा  कई और भी आवेदन किए गए हैं जिसकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। स्वतंत्रवीर सावरकर स्मारक के कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत सावरकर बताते हैं कि धसई गांव के प्रत्येक नागरिकों का जन धन के तहत बैंक एकाउंट है। इसलिए यहां के नागरिक महाराष्ट्र का मशहूर व्यंजन वड़ापाव से लेकर सब्जी, अनाज, दवा आदि के लिए आसानी से डेविड कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

इतना ही नहीं, नागरिक अपने डेविड कार्ड से सैलून और मोटर गैरेज सहित खेती के लिए टैक्टर के किराए का भी भुगतान कर सकते हैं। इसलिए कार्ड स्वाइप मशीन उपलब्ध होने के बाद क्षेत्र की लगभग 50 हजार की आबादी को बैंक जाकर पैसे निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

रणजीत सावरकर का कहना है कि इस गांव में सिर्फ एक ही राष्ट्रीयकृत बैंक है। इसलिए बैंक में बहुत ज्यादा भीड़ होती है। भीड़ से बचने के लिए लोगों को 15 किलोमीटर दूर सरल गांव के बैंक में जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नगदी की समस्या के समाधान के लिए स्वतंत्रवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के पदाधिकारियों ने गांव वालों और व्यापारियों से मिलकर कैशलेस सिस्टम शुरू करने की बात की तो सभी सहर्ष तैयार हो गए। 


उसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा के शीर्ष अधिकारियों से बात की गई। बैंक के महाप्रबंधक नवतेज सिंह, डीजीएम श्रीधर राव और विपणन प्रबंधक कौस्तुभ शुक्ल व्यापारियों को नि:शुल्क कार्ड स्वाइप मशीन देने को तैयार हो गए। इससे अब धसई गांव में जल्द ही कैशलेस कामकाज शुरू होगा।
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