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चुनाव आयोग के बाद अखिलेश, मुलायम के पास है कोर्ट जाने का भी विकल्प

Sun, 15 Jan 2017 09:03 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 15 Jan 2017 09:03 AM IST
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after Commission Akhilesh, Mulayam is with the option to go court
मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
‘साइकिल’ की सवारी अखिलेश करेंगे या मुलायम सिंह यादव या दोनों के हाथ नहीं लगेगी साइकिल। चुनाव आयोग अगले चंद दिनों में इसका निपटारा कर देगा, लेकिन साइकिल की जंग आगे भी जारी रह सकती है। कानूनी विशेषज्ञों की माने तो दोनों ही पक्षों के पास अदालत जाने का विकल्प खुला है और वे इसका इस्तेमाल भी करेंगे।
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कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग का फैसला जो भी हो उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आरएस सोढ़ी के मुताबिक, चुनाव आयोग के फैसले के बाद असंतुष्ट पक्ष के पास हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का विकल्प मौजूद है। चूंकि चुनाव नजदीक है इसलिए असंतुष्ट पक्ष को कितनी राहत मिल पाती है, ये देखने वाली बात होगी। 
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पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल व वरिष्ठ वकील विकास सिंह के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के दोनों खेमों के पास चुनाव आयोग से आगे का भी रास्ता खुला हुआ है। आयोग के फैसले को कोई भी पक्ष अदालत में चुनौती दे सकता है।
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पूरी संभावना है कि चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ को फ्रीज कर दिया जाएगा

after Commission Akhilesh, Mulayam is with the option to go court

वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा का मानना है कि इसकी पूरी संभावना है कि चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ को फ्रीज कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूर्व रिकार्ड पर गौर करें तो ऐसा देखा गया है कि अगर किसी पार्टी के दो गुटों में चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद हो तो चुनाव आयोग चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर देता है। वरिष्ठ वकील संजय हेगडे़ का कहना है संविधान के अनुच्छेद-136 के तहत किसी भी ट्रिब्यूनल या आयोग के फैसले को सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

मालूम हो कि 1969 में कांग्रेस दो धरों में बंट गया था। एक इंदिरा गांधी का खेमा था और दूसरा के. कामराज का। दोनों ही खेमा चुनाव चिह्न ‘बैलों का जोड़ा’ को अपने पास रखना चाहता था। विवाद चुनाव आयोग तक पहुंचा।

आयोग ने इस चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया। वहीं 1999 में जनता दल में भी फाड़ हो गया था। एक गुट शरद यादव का था तो दूसरा एचडी देवगौड़ा का। दोनों ही गुट चुनाव चिन्ह ‘चक्र’ का दावा कर रहे थे। इस बार भी चुनाव आयोग ने चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया था।

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