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भूटान के खुलकर सामने आने के बाद डोकलाम में भारत की बढ़ी मजबूती

Thu, 10 Aug 2017 09:00 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Thu, 10 Aug 2017 09:00 PM IST
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After Bhutan claim on the Doklam dispute area India stand will be strengthened 
डोकलाम क्षेत्र

डोकलाम में चीन के साथ गतिरोध वाले क्षेत्र को भूटान ने अपना बताया है। भूटान ने यह दावा चीन को पत्र लिखकर किया है। भूटान ने हाल में चीन द्वारा इस क्षेत्र को अपना बताए जाने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वह 29 जून को बीजिंग को लिखे पत्र पर कायम है। डोकलाम का यह क्षेत्र भूटान का है। इस तरह से खुलकर भूटान के आ जाने के बाद डोकलाम में भारत के दावे को नया बल मिल गया है।

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उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि नई दिल्ली ने इसे केन्द्र में रखकर कूटनीतिक पहल को तेज कर दिया है। भारत का साफ कहना है कि अब चीन भी विवाद का निपटारा होने तक अपनी सेना को पीछे (16 जून से पहले) ले जाने की पहल करे। ऐसा माना जा रहा है कि भारत ने चीन के साथ इस विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर होने वाले प्रयास को भी तेज कर दिया है।
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जानिए, डोकलाम में चीन के मुकाबले कितनी मजबूत स्थिति में भारत
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नई दिल्ली के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि यदि सबकुछ ठीक रहा तो दो सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चीन यात्रा पर जाने से पहले इस गतिरोध का समाधान निकल आएगा। प्रधानमंत्री चीन के श्यामोन शहर में आयोजित ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका ) देशों के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं। यह सम्मेलन 31 अगस्त से 4 सितंबर तक चीन में होगा।

हर चुनौती से निबटने की तैयारी में है भारत

After Bhutan claim on the Doklam dispute area India stand will be strengthened 
india china flag

रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार डोकलाम को लेकर चीन से लगातार मिल रही युद्ध की धमकियों को देखते हुए भारत ने हर चुनौती से निबटने की तैयारी की है। बताते हैं कि सेना 33 वीं  कोर से तोपखाना डिवीजन को सिक्किम और डोकलाम के पीछे के क्षेत्र में तैनात करना शुरू किया है।

सीमा से करीब 15 किमी दूर पर सेना की एक ब्रिगेड संभव सहायता उपलब्ध करने के लिए तैनात है। कुछ स्थानों पर बारूदी सुंरग भी बिछी है। इसके अलावा चीन द्वारा स्थानीय स्तर की झड़प जैसी स्थिति पैदा करने की संभावना को देखते हुए आस-पास के गांवों को खाली कराने की पहल की जा रही है। ऐसा सीमा के उस पार चीन की तैयारियों तथा डोकलाम से अपनी सेना को पीछे न हटाने की कोशिश को देखते हुए किया जा रहा है।

रक्षात्मक तैयारी जरूरी
रक्षा मंत्री अरुण जेटली पहले ही संसद को आश्वस्त कर चुके हैं कि सुरक्षा बल हर चुनौती से निबटने के लिए तैयार हैं। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर जनरल(रिटा.) अशोक मेहता के अनुसार एहतियात के तौर पर सैन्य तैयारी जरूरी है। मेहता के अनुसार भारत की स्थिति काफी मजबूत है।

हालांकि मेजर जनरल का कहना है कि भारत चीन के बीच डोकलाम को लेकर किसी युद्ध की संभावना नहीं है। बहुत हुआ तो चीन स्थानीय स्तर की सैन्य झड़प जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। लेकिन यह संदेश भी देना जरूरी है कि हम चीन की धमकियों से नहीं डरते। किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। इसलिए रक्षात्मक तैयारी जरूरी है।

भारत को कमजोर न समझे चीन
मेजर जनरल के अनुसार भारत को कमजोर समझना चीन की भूल होगी। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ का कहना है कि कल के लिए यदि डोकलाम को लेकर चीन की फौज आक्रामक होती है तो भारत चुनौती का भरपूर जवाब देने में सक्षम है। मेहता के मुताबिक रणनीतिक तैयारी के तहत भारत ने लगातार रक्षात्मक और नॉन कॉम्बैट मोड में डोकलाम में सैनिकों को रखा है। ऐसे में यदि चीन हमला करता है तो उसे रक्षात्मक भारत की सैन्य क्षमता का पांच-छह गुना अधिक तैयारी के साथ आगे बढऩा होगा। क्योंकि भारत न केवल रक्षात्मक मोड में है बल्कि भारतीय सैन्य चौकियां और सीमा ऊंचाई पर है। भारत के सैन्य तैनाती क्षेत्र से चुम्बी वैली, डोकलाम साफ दिखता है। इसलिए इधर से सुरक्षा करना काफी आसान है। दूसरे भारतीय सेना को कई युद्ध के अनुभव हैं, जबकि चीन इस मामले में बहुत पीछे हैं।

नहीं होगा युद्ध
मेजर जनरल मेहता का कहना है कि भारत के साथ टकराव की दशा में नफा और नुकसान को चीन भी समझता है। हवाई और लड़ाकू विमानों से हमले की दशा में भी चीन को हमसे कई गुणा अधिक संसाधन की जरूरत पड़ेगी। इसलिए डोकलाम को लेकर चीन के साथ स्थानीय स्तर पर सैन्य झड़प भले हो जाए, लेकिन युद्ध की संभावना काफी क्षीण है।

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