{"_id":"5f0ce1718ebc3e639a6a8cdb","slug":"after-all-why-did-the-congress-have-to-leave-only-those-close-to-rahul","type":"story","status":"publish","title_hn":"आखिर राहुल के करीबियों को ही क्यों छोड़नी पड़ी कांग्रेस, करीब आधा दर्जन चेहरों ने पार्टी को कहा अलविदा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
आखिर राहुल के करीबियों को ही क्यों छोड़नी पड़ी कांग्रेस, करीब आधा दर्जन चेहरों ने पार्टी को कहा अलविदा
Tue, 14 Jul 2020 04:04 AM IST
अवधेश कुमार
अनूप वाजपेयी, अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अनूप वाजपेयी, अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Tue, 14 Jul 2020 04:04 AM IST
विज्ञापन
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान में सचिन पायलट की बगावत ने एक बार फिर कांग्रेस के भीतर इस सवाल को जिंदा कर दिया है कि आखिर राहुल गांधी के करीबियों को ही पार्टी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। करीब आधा दर्जन ऐसे नाम हैं जिन्हें राहुल कुछ सालों में आगे लेकर आए, लेकिन उन्हें पार्टी को अलविदा कहना पड़ा। मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में भले ही युवा मंत्रियों की अच्छी संख्या थी, लेकिन संगठन को लेकर जब भी संतुलन बनाने की कोशिश हुई, युवा नेताओं को सीनियर्स के चलते पीछे किया गया। यही कारण है कि राहुल गांधी ने जिन प्रदेशों में युवा प्रभारी और अध्यक्ष बनाए वे अपना कार्यालय पूरा नहीं कर सके।
कई सचिवों के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद राहुल गांधी उन्हें महासचिव नहीं बना सके। लिहाजा पार्टी में तमाम नेताओं प्रभारी बनाकर संतुष्ट किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया से राहुल के रिश्ते सिर्फ पार्टी की वजह से नहीं थे। राहुल के साथ पढ़ें सिंधिया दो कद्दावर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के चलते पार्टी छोड़कर गए। हरियाणा में राहुल समर्थक अशोक तंवर को अध्यक्ष बनाया गया लेकिन हुड्डा एंड फैमिली ने ना तो उन्हें अध्यक्ष स्वीकारा और न संगठन खड़ा करने दिया। लिहाजा तंवर भी पार्टी से अलग हो गए। पूर्व आईपीएस डॉ. अजोय कुमार को झारखंड अध्यक्ष बनाया गया उन्होंने मेहनत की लेकिन जूनियर सीनियर में उलझे अजोय आम आदमी पार्टी में चले गए। बिहार में अशोक कुमार चौधरी भी निशाने पर रहे।
पूर्वोत्तर में राज परिवार से जुड़े युवा नेता किरीट पीडी वर्मन जिन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति में ऐसा कुछ कह दिया जो वरिष्ठों अच्छा नहीं लगा और एक सप्ताह में छुट्टी हो गई। गुजरात में अल्पेश ठाकोर भी राहुल की वजह से पार्टी से जुड़े थे और फिर चले गए। पार्टी में राहुल को खुलकर नेता बताने वाले महाराष्ट्र में संजय निरूपम, मिलिंद देवड़ा और पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू भी पार्टी में अपना वजूद तलाश रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कई सचिवों के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद राहुल गांधी उन्हें महासचिव नहीं बना सके। लिहाजा पार्टी में तमाम नेताओं प्रभारी बनाकर संतुष्ट किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया से राहुल के रिश्ते सिर्फ पार्टी की वजह से नहीं थे। राहुल के साथ पढ़ें सिंधिया दो कद्दावर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के चलते पार्टी छोड़कर गए। हरियाणा में राहुल समर्थक अशोक तंवर को अध्यक्ष बनाया गया लेकिन हुड्डा एंड फैमिली ने ना तो उन्हें अध्यक्ष स्वीकारा और न संगठन खड़ा करने दिया। लिहाजा तंवर भी पार्टी से अलग हो गए। पूर्व आईपीएस डॉ. अजोय कुमार को झारखंड अध्यक्ष बनाया गया उन्होंने मेहनत की लेकिन जूनियर सीनियर में उलझे अजोय आम आदमी पार्टी में चले गए। बिहार में अशोक कुमार चौधरी भी निशाने पर रहे।
विज्ञापन
पूर्वोत्तर में राज परिवार से जुड़े युवा नेता किरीट पीडी वर्मन जिन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति में ऐसा कुछ कह दिया जो वरिष्ठों अच्छा नहीं लगा और एक सप्ताह में छुट्टी हो गई। गुजरात में अल्पेश ठाकोर भी राहुल की वजह से पार्टी से जुड़े थे और फिर चले गए। पार्टी में राहुल को खुलकर नेता बताने वाले महाराष्ट्र में संजय निरूपम, मिलिंद देवड़ा और पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू भी पार्टी में अपना वजूद तलाश रहे हैं।
विज्ञापन