{"_id":"68eba2eae964074f5707c824","slug":"afghanistan-s-foreign-minister-amir-khan-muttaqi-equested-opening-of-the-wagah-border-2025-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"India-Afganistan: अफगानिस्तान ने भारत से की वाघा बॉर्डर खोलने की अपील, चाबहार बंदरगाह को लेकर कही ये बात","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
India-Afganistan: अफगानिस्तान ने भारत से की वाघा बॉर्डर खोलने की अपील, चाबहार बंदरगाह को लेकर कही ये बात
Sun, 12 Oct 2025 06:15 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 12 Oct 2025 06:15 PM IST
विज्ञापन
मावलवी अमीर खान मुत्ताकी, अफगानिस्तानी विदेश मंत्री
- फोटो : ANI वीडियो ग्रैब
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने कहा कि उन्होंने भारत को अफगानिस्तान के खनिज, स्वास्थ्य और खेल क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया है, ताकि द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। इसके साथी अफगानिस्तान ने भारत से वाघा बॉर्डर खोलने की भीअपील की है। ताकि व्यापार में तेजी आ सके।
विज्ञापन
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुत्ताकी ने कहा कि चर्चा में चाबहार बंदरगाह के सर्वोत्तम उपयोग और क्षेत्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों से निपटने के उपायों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान ने वाघा सीमा को खोलने का भी अनुरोध किया है और उन्होंने इसे भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे नजदीकी और सबसे तेज व्यापार मार्ग बताया है।
विज्ञापन
मुत्ताकी ने इस दौरान भारत की ओर से काबुल स्थित तकनीकी मिशन को दूतावास के रूप में शुरू करने के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि इसके अगले चरण में अब जल्द ही अफगान राजनयिक दिल्ली पहुंचेंगे। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनके इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। गौरतलब है, दूतावास बंद होने के बाद तालिबान ने मुंबई में वाणिज्य दूतावास के संचालन के साथ ही हैदराबाद वाणिज्य दूतावास को संचालित करने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति की थी।
विज्ञापन
पाकिस्तान को मुत्ताकी की दो टूक
तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बहाने अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को मुत्ताकी ने पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया। जवाबी कार्रवाई को पाकिस्तानी शरारत का जवाब बताते हुए उन्होंने कहा कि हम शून्य तनाव का समर्थन करते हैं। हालांकि अगर बातचीत से काम नहीं चलता तो हमें दूसरा रास्ता अपनाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई के बाद कई लोग पाकिस्तान से भाग गए थे। इन्हें हमारे शासन में आने से पहले अमेरिकी सेना ने शरण दी थी। हालांकि पाकिस्तान अब इस मामले में दुष्प्रचार कर रहा है, जबकि हकीकत यह है कि अफगानिस्तान में टीटीपी की कोई मौजूदगी नहीं है।
मुत्ताकी ने कहा कि पाकिस्तान को समझना होगा कि हम अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे। उसे पता है कि बीते चार दशक में हमारे यहां सोवियत आए, अमेरिकी आए, नाटो आए, मगर हम फिर आजाद हैं, अपने पैरों पर खड़े हैं। पाकिस्तान को अपने अंदर झांकने की जरूरत है। उसे यह समझने की जरूरत है कि दोनों देशों की पहाड़ी कबायली इलाकों से गुजरने वाली 2500 किमी सीमा पर चंगेज खां, ब्रिटिश, अमेरिका, सोवियत संघ कोई नियंत्रण नहीं कर पाया।