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सीएए-विरोधी प्रदर्शन: बॉम्बे हाई कोर्ट के बाहर वकीलों ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी
Mon, 20 Jan 2020 09:58 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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Published by: Trainee Trainee
Updated Mon, 20 Jan 2020 09:58 PM IST
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बम्बई उच्च न्यायालय
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में वकीलों के एक समूह ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के द्वार के बाहर भारत के संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। वरिष्ठ वकील नवरोज सीरवई, गायत्री सिंह और मिहिर देसाई सहित 50 से अधिक वकीलों ने एक साथ प्रस्तावना पढ़ी और बाद में कहा कि कोई भी इस देश और इसके नागरिकों को धर्म के आधार पर बांट नहीं सकता।
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वकीलों ने कहा कि सीएए में इस्लाम को छोड़कर छह धार्मिक समुदायों के शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है, जो संवैधानिक रूप से गलत है।
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सीरवई ने कहा कि हमने भारत के संविधान और इसके संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक स्वरूप में हमारे विश्वास की पुन: पुष्टि और लोगों के खिलाफ देश भर में की गई कार्रवाई के खिलाफ विरोध करने के मकसद से संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा है। अधिवक्ता मुबीन सोलकर ने कहा कि प्रस्तावना को पढ़ने के पीछे का उद्देश्य भारत के करोड़ों लोगों में विश्वास पैदा करना है, जो हमारा संविधान कहता है कि देश धर्मनिरपेक्ष और एक लोकतांत्रिक गणराज्य है।
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