2019 के महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में पार्टियों ने कहां कितना खर्च किया... जानिए सब कुछ
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- 2019 के महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान का डाटा
- कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने अब तक नहीं दिया है खर्च का ब्योरा
- जानकारी न देने वालों पर एडीआर ने की कार्रवाई करने की सिफारिश
- सपा, जदयू और आम आदमी पार्टी ने देरी से उपलब्ध कराया विवरण
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विस्तार
साल 2019 में हरियाणा और महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा एकत्र की गई और खर्च की गई राशि का ब्योरा सामने आया है। यह विश्लेषण एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार दोनों राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में 11 राजनीतिक दलों ने कुल 367.80 करोड़ रुपये जमा किए। वहीं, इन दलों ने कुल खर्च 135.72 करोड़ रुपये किए। इन खर्चों में प्रचार, यात्रा व्यय, उम्मीदवारों पर व्यय, दलों की ओर से प्रत्याशियों की आपराधिक पृष्ठभूमि प्रकाशित करने पर व्यय और अन्य व्यय शामिल हैं। इस रिपोर्ट में छह राष्ट्रीय और नौ क्षेत्रीय दलों का डाटा शामिल है।
एडीआर की इस रिपोर्ट के अनुसार सभी राजनीतिक दलों ने कुल मिलाकर अपने-अपने केंद्रीय मुख्यालयों के माध्यम से 266.706 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की और 31.318 करोड़ रुपये खर्च किए। दलों की राज्य इकाइयों ने महाराष्ट्र में 82.652 करोड़ और हरियाणा में 21.75 करोड़ रुपये खर्च किए। बता दें कि राजनीतिक दल चुनाव घोषणा तिथि और चुनाव समाप्ति तिथि के बीच प्राप्त धन की सूचना इस ब्यौरे में देते हैं। यह अवधि चुनाव आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के आधार पर तीन सप्ताह से तीन महीने के बीच हो सकती है। यह डाटा चुनाव घोषित तिथि 21 सितंबर 2019 से चुनाव संपन्न होने की तिथि 27 अक्तूबर 2019 के बीच का है।
चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने कहां कितने रुपये खर्च किए
महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से खर्च की गई राशि की बात करें तो सबसे ज्यादा खर्च प्रचार में किया गया है जो कुल खर्च का 44.43 फीसदी है। वहीं, अन्य खर्चों पर 16.03 फीसदी राशि का व्यय सामने आया है। राजनीतिक दलों ने अपनी चुनाव व्यय रिपोर्ट में प्रचार पर 73.90 करोड़ रुपये, यात्रा पर 35.61 करोड़, उम्मीदवारों पर 29.803 करोड़, अन्य खर्चों में 26.666 करोड़ और प्रत्याशियों की आपराधिक पृष्ठभूमि प्रकाशित करने में 0.341 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की है। बता दें कि दलों द्वारा प्रचार खर्च में मीडिया, विज्ञापन, प्रचार सामग्री और जनसभाओं में हुआ व्यय शामिल किया जाता है।
राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार पर खर्च की सबसे ज्यादा राशि
प्रचार पर हुए कुल खर्च में राजनीतिक दलों ने मीडिया विज्ञापन पर सबसे ज्यादा 58.66 करोड़ रुपये का खर्च दिखाया है। इसके बाद प्रचार सामग्री पर 10.405 करोड़ रुपये और सार्वजनिक बैठकों या सभाओं पर 4.835 करोड़ रुपये का खर्च बताया गया है। दलों ने प्रचार के माध्यम से सबसे अधिक खर्च महाराष्ट्र राज्य इकाइयों से 60.804 करोड़ रुपये का किया है। यह चुनाव प्रचार खर्च का 82.28 फीसदी है। वहीं, हरियाणा राज्य इकाइयों से 8.086 करोड़ रुपये खर्च किया गया है जो चुनाव प्रचार खर्च का 10.94 फीसदी है। इसके साथ ही दलों ने केंद्रीय मुख्यालय से 5.01 करोड़ रुपये की राशि का व्यय किया है। यह चुनाव खर्च का 6.78 फीसदी है।
यात्रा खर्च: स्टार प्रचारकों की यात्राओं पर 99.76 फीसदी व्यय
यात्रा खर्च में स्टार प्रचारक और पार्टी नेताओं की यात्रा पर हुए व्यय को शामिल किया जाता है। दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने अपनी यात्राओं पर किए गए कुल व्यय में से 99.76 फीसदी राशि यानी 35.525 करोड़ रुपये केवल अपने स्टार प्रचारकों पर खर्च किए हैं। वहीं, पार्टी के अन्य नेताओं पर केवल 0.24 फीसदी यानी 8.50 लाख रुपये खर्च किए गए। महाराष्ट्र राज्य इकाइयों के माध्यम से राजनीतिक दलों ने यात्राओं पर 20.915 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं, हरियाणा राज्य इकाइयों के माध्यम से दलों ने यात्रा पर 10.815 करोड़ रुपये व्यय किए। केंद्रीय मुख्यालयों से 3.88 करोड़ का खर्च यात्रा पर किया गया।
कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने अब तक नहीं दिया विवरण
महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस, एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) और शिवसेना के चुनावी खर्च का विवरण चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। वहीं, महाराष्ट्र चुनाव के लिए आईयूएमएल व जदएस का व्यय विवरण और हरियाणा चुनाव के लिए आईएनएलडी का व्यय विवरण भी वेबसाइट पर मौजूद नहीं है। इसे लेकर एडीआर ने अपने अवलोकन में कहा है कि कांग्रेस एनसीपी, आईयूएमएल, जेडीएस, शिवसेना और आरएलडी के चुनावी खर्च का ब्योरा आज की तारीख (300 दिन बाद) भी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर नहीं है। यह सुप्रीम कोर्ट की ओर से चार अप्रैल 1996 को दिए गए फैसले का उल्लंघन है।
सपा समेत तीन दलों ने देर से उपलब्ध कराया खर्च का ब्योरा
इस विवरण को लेकर एडीआर ने अपने अवलोकन में कहा है कि महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों के लिए जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड), समाजवादी पार्टी (सपा), आम आदमी पार्टी ने अपने चुनावी खर्च का ब्योरा चुनाव आयोग को देर से उपलब्ध कराया है। इसमें जेडीयू ने इसमें 41 दिन की देरी की है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने यह विवरण उपलब्ध कराने में 136 दिन और आम आदमी पार्टी ने 254 दिन की देरी की है। इस संबंध में अपनी सिफारिशों में एडीआर ने कहा है कि सभी राजनीतिक दलों को अपने चुनावी व्यय का विवरण चुनाव आयोग के पास निर्धारित समय सीमा के भीतर और दिए गए प्रारूप में प्रस्तुत करना चाहिए।
एआईएफबी को न आय न व्यय, जदयू का चुनावी खर्च भी शून्य
इन दोनों राज्यों में जहां राजनीतिक दलों ने करोड़ों रुपये की राशि जमा की और करोड़ों रुपये खर्च भी किए, एक दल ऐसा रहा जिसने केंद्र और राज्य इकाई, दोनों ही स्तर पर कोई राशि प्राप्त नहीं की। यह दल है एआईएफबी यानी ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक। एआईएफबी ने चुनाव लड़ने के बाद भी केंद्र और राज्य इकाई स्तर से कोई राशि प्राप्त नहीं की। वहीं एआईएफबी और जेडीयू, जो ऐसे दल रहे जिन्होंने चुनाव लड़ने के बाद केंद्र व राज्य इकाई स्तर पर कोई खर्च नहीं किया। बता दें कि एआईएफबी एक वामपंथी राष्ट्रवादी राजनीतिक दल है। यह 1939 में सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर एक गुट के रूप में उभरा था।
एडीआर ने कीं ये सिफारिशें
- एडीआर ने इस रिपोर्ट को लेकर अपनी सिफारिशों में कहा है कि पहले भी ऐसे सुझाव दिए गए हैं कि राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव के लिए किए जाने वाले व्यय पर एक सीमा तय करने की जरूरत है। एडीआर ने कहा कि इस संबंध में कदम उठाए जाने चाहिए और समयबद्ध तरीके से तौर-तरीकों पर काम होना चाहिए।
- कुछ दलों की ओर से व्यय का विवरण उपलब्ध न कराए जाने पर एडीआर ने कहा कि सभी दलों को अपने खर्च का ब्योरा निर्धारित समय सीमा के भीतर और दिए गए प्रारूप में चुनाव आयोग के पास प्रस्तुत करना चाहिए। अगर दल समय पर, निर्धारित प्रारूप में ब्योरा नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
- एडीआर ने कहा कि चुनाव अभियानों के दौरान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों को चंदे के स्वरूप में भी राशि मिलती है। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसे में चुनाव अभियान के दौरान राजनीतिक दलों को जो लोग दान देते हैं, उनकी जानकारी और योगदान का ब्योरा भी पार्टियों की ओर से सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
- अपनी सिफारिशों में एडीआर ने चुनावी प्रक्रिया में काले धन का इस्तेमाल कम करने के लिए भी सुझाव दिया है। एसोसिएशन ने कहा है कि चुनाव आयोग की ओर से जारी किए गए पारदर्शिता दिशा-निर्देशों के मुताबिक जहां कर संभव हो, चुनावी खर्च चेक/डीडी/बैंक ट्रांसफर के माध्यम से लेनदेन तक सीमित किया जाना चाहिए।
- इसके साथ ही एडीआर ने राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले चुनावी खर्च पर निगरानी रखने की सिफारिश भी की है। इसने कहा है कि जिस तरह उम्मीदवारों के खर्च की निगरानी के लिए चुनाव आयोग के चुनाव समीक्षक होते हैं, उसी तरह से राजनीतिक दलों के खर्च की निगरानी के लिए भी समीक्षक होना चाहिए।