WB: 'आकांक्षी जिले' से ये पांच जगह बाहर, कांग्रेस ने PM मोदी को पत्र लिख लोगों की परेशानी की ओर दिलाया ध्यान
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस कार्यक्रम से पश्चिम बंगाल के जिलों को हटाए जाने से न केवल देश में आकांक्षी जिलों की संख्या 117 से घटकर 112 रह गई है, बल्कि लोगों में भी निराशा पैदा हो गई है।
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पश्चिम बंगाल के पांच जिलों को 'आकांक्षी जिले' के दायरे में नहीं रखने पर कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने दुख जताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया है कि इन जिलों को वापस आकांक्षी जिलों के दायर में लाने के लिए उचित निर्देश जारी करें।
बेहतर जीवन जीने में मदद करनी चाहिए
अधीर रंजन का कहना है कि इन पांच जिलों में रहने वाले लोगों को भी कार्यक्रम के तहत लाभ उठाकर बेहतर जीवन जीने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने पत्र में लिखा, 'मैं गहरी पीड़ा और निराशा के साथ पश्चिम बंगाल के पांच जिलों- दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम और नादिया को आकांक्षी जिला कार्यक्रम से हटाने के कदम को सामने लाने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। इस कार्यक्रम से पश्चिम बंगाल के जिलों को हटाए जाने से न केवल देश में आकांक्षी जिलों की संख्या 117 से घटकर 112 रह गई है, बल्कि लोगों में निराशा पैदा हो गई है, क्योंकि वे अब उन लाभों से वंचित हैं जिनकी वे किसी अन्य की तरह आकांक्षा रखते हैं।'
West Bengal Congress president Adhir Ranjan Chowdhury writes to Prime Minister Narendra Modi, urging him to "issue appropriate instructions for bringing back the dropped Districts of West Bengal under the fold of “Aspirational Districts” and help the people residing in these… pic.twitter.com/C2VHBhMH4b
— ANI (@ANI) January 7, 2024
बुनियादी सुविधाएं दें
उन्होंने आगे लिखा कि कार्यक्रम के जन आंदोलन दृष्टिकोण ने बेहतर जीवन और आजीविका के लिए जमीनी स्तर पर लोगों के बीच आशा की भावना पैदा की थी। इन जिलों के लोगों को इस कार्यक्रम के लाभों से वंचित करना, जिसमें स्वास्थ्य और शिक्षा तथा सड़क संपर्क, पेयजल और विद्युतीकरण की बुनियादी अवसंरचना का निर्माण शामिल है, किसी भी तरह से अनुचित है।
मुर्शिदाबाद की हालत पर दिलाया ध्यान
उन्होंने कहा कि मुर्शिदाबाद जिला स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कौशल विकास और अवसंरचना से संबंधित मापदंडों के मामले में लगातार कमजोर बना हुआ है। जिले में राज्य का छह फीसदी क्षेत्र शामिल है और इसमें पश्चिम बंगाल की कुल आबादी का लगभग आठ फीसदी शामिल है। जिले की इतनी बड़ी आबादी, जो मुख्य रूप से अल्पसंख्यक समुदाय से हैं और सामाजिक-आथक रूप से पिछड़े हैं, को आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत विकास के लाभ से वंचित करना सही नहीं है और इसलिए इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।