ADGP सुसाइड केस: SIT खंगालेगी '2012' की विजिलेंस जांच रिपोर्ट! क्या है उन 'सात' आरोपों की कहानी?
हरियाणा सरकार के विजिलेंस विभाग के मुताबिक, 2012 में उन पर सात आरोप लगे थे। इनमें कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस की 'एसआईटी' के संज्ञान में वे सभी आरोप हैं।
विस्तार
हरियाणा के पूर्व आईपीएस वाई पूरन कुमार ने सात अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने निवास पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने अपने पीछे एक लंबा चौड़ा सुसाइड नोट भी छोड़ा था। उसमें हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी शत्रुजीत कपूर और पूर्व एसपी रोहतक नरेंद्र बिजारणिया सहित कई आईएएस व आईपीएस अधिकारियों पर जातीय उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। बाद में इसी केस से जुड़े रोहतक पुलिस के एएसआई संदीप लाठर ने भी सुसाइड कर लिया था। चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी इस केस की जांच कर रही है। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि इस हाई प्रोफाइल मामले की तह तक पहुंचने के लिए 'एसआईटी' हर एंगल से केस की जांच कर रही है। पूर्व आईपीएस की पत्नी अमनीत पी. कुमार हरियाणा में ही वरिष्ठ 'आईएएस' अधिकारी हैं। हरियाणा सरकार के विजिलेंस विभाग के मुताबिक, 2012 में उन पर सात आरोप लगे थे। इनमें कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस की 'एसआईटी' के संज्ञान में वे सभी आरोप हैं।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, अमनीत पी. कुमार 'आईएएस', तत्कालीन प्रशासक हुडा फरीदाबाद व अन्य के खिलाफ मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, विजिलेंस विभाग के आदेश क्रमांक 10/35/2021-1 विजिलेंस (1) दिनांक 24 अगस्त 2012 के अनुसार, एंटी क्रप्शन ब्यूरो 'एसीबी' में शिकायत दर्ज की गई थी। जांच के दौरान कई आरोपों की पड़ताल की जानी थी।
-आरोप 1:
मुख्य प्रशासक हुडा विभाग, पंचकूला के आदेश दिनांक 8 मई 2012, द्वारा विवादित प्लाटों को हुडा के दूसरे सेक्टरों में अलॉट करने की अनुमति दी गई। कार्यालय संपदा अधिकारी, हुडा द्वारा प्लाट ड्रॉ से संबंधित फाइल, प्रशासक के कार्यालय में भेजी गई। प्रशासक हुडा ने दिनांक 14 मई 2012 को सुबह साढ़े नौ बजे 13 प्लाटों की बजाए, 10 प्लाटों का ड्रा कर दिया गया। इस अलॉटमेंट में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद उपरोक्त 10 प्लाटों का ड्रा सरकार द्वारा रद्द कर दिया गया।
-आरोप 2:
दो अन्य प्लाट नंबर 527, 471 सेक्टर 21 सी फरीदाबाद के संबंध में कार्यालय संपदा अधिकारी, हुडा ने फाइल, कार्यालय प्रशासक को स्थिति स्पष्ट करने के लिए भेजी कि ये प्लाट नियतन पत्र के हिसाब से ठीक है या नहीं। मोहित अग्रवाल, सिविल जज, सीनियर डिविजन फरीदाबाद के द्वारा उक्त दोनों प्लाटों पर स्थगन आदेश किए हुए थे। विजिलेंस के पास मौजूदा दस्तावेजों में अमनीत पी. कुमार प्रशासक हुडा ने अदालत के आदेशों को अनदेखा कर अपनी शक्तियों से बाहर जाकर, उक्त दोनों प्लाट, अलॉट कर दिए। बता दें कि नियतन पत्र कमेटी में कोई भी प्रतिनिधि संपदा अधिकारी और उपायुक्त का प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था। प्लाट सेक्टर 21 डी फरीदाबाद की बजाए, सेक्टर 21 सी में कुछ प्राइवेट लोगों के कहने से अलॉट कर दिए गए थे। इस प्रकरण में भी भ्रष्टाचार के आरोप प्रशासक, तत्कालीन हुडा प्रशासक के खिलाफ लगाए गए थे।
-आरोप 3:
प्लाट नंबर 33 सेक्टर 7 फरीदाबाद, विवादित होने के कारण रिज्यूम कर लिया गया। अजीत बाला जोशी, आईएएस प्रशासक, हुडा के आदेश दिनांक 20.10.2011 के अनुसार, अपील भी रद्द कर दी गई। आरोप है कि अमनीत पी. कुमार, प्रशासक ने उक्त प्लाट को रेस्टोर कर दिया, जबकि केवल वित्तायुक्त को ही ऐसे फैसले लेने की शक्तियां हैं। ऐसे में क्या प्रशासक हुडा द्वारा गैर कानूनी कार्य किया गया था।
-आरोप 4:
आर्मी कोटे में प्लाट अलॉटमेंट की शक्ति वित्तायुक्त को है न कि हुडा प्रशासक को, लेकिन अमनीत कुमार, प्रशासक हुडा ने इस पॉलिसी को अनदेखा कर दिया। आरोप है कि उन्होंने अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करते हुए नायब सूबेदार को 200 वर्ग फुट की बजाए 500 वर्ग फुट का प्लाट अलॉट कर दिया। इससे विभाग को वित्तीय नुकसान पहुंचा है।
-आरोप 5:
प्लाट नंबर 132 सेक्टर 16 फरीदाबाद को विजेंद्र कुमार, पूर्व प्रशासक हुडा द्वारा रद्द किया जा चुका था। उसी प्लाट को अलॉटी के साथ मिलीभगत कर दिनांक 7 मई 2012 को अमनीत पी कुमार ने अलॉट कर दिया। प्रतिवादिया ने उक्त प्लाट के संबंध में सभी फैसले अपने स्तर पर ले लिए, जबकि सभी शक्तियां वित्तायुक्त हरियाणा सरकार को थी।
-आरोप 6:
एक अन्य मामला ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर 58 फरीदाबाद में अलॉटमेंट से संबंधित था। इस प्लाट के लिए अमनीत पी कुमार, प्रशासक संपदा अधिकारी द्वारा कुछ कानूनी मामलों पर असहमति होने के बावजूद भी 46 आवेदनों की सिफारिश की। भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद भी उक्त 46 आवेदनों को अमनीत पी कुमार द्वारा रद्द कर दिया गया। हुडा, जिमखाना में अमनीत पी कुमार द्वारा अपनी शक्ति का दुरुपयोग सामने आया।
-आरोप 7:
बीआर श्योराण, उप जिला न्यायवादी, जो प्रशासक हुडा कार्यालय में नियुक्त थे, आरोप है कि अमनीत पी कुमार ने जानबूझकर उन्हें अनदेखा किया। हुडा प्रशासक ने अपने निजी मकसद के लिए रवि अत्री, जो ठेके के आधार पर संपदा अधिकारी के कार्यालय में नियुक्त थे, को अपने कार्यालय में नियुक्त कर लिया। अपील के सभी मुकदमों में रवि अत्री को उपस्थित होने के आदेश जारी किए गए। अमनीत पी कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान जितनी भी अपीलों के फैसले किए हैं, आरोप है कि उनमें रवि के माध्यम से कथित तौर पर करोड़ों रुपये एकत्रित किए गए। इससे हुडा विभाग को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों की जांच तत्कालीन उप पुलिस महानिरीक्षक एम रवि किरण 'आईपीएस' राज्य चौकसी ब्यूरो, पंचकूला हरियाणा द्वारा पूरी कर रिपोर्ट, ब्यूरो के पत्र क्रमांक 9432 दिनांक 19 जून 2013 के अनुसार, मुख्य सचिव हरियाणा सरकार चौकसी विभाग को भेजी गई थी।
जांच में पाया गया है कि सुरेंद्र सिंह डीएसपी, कमलेश कुमारी सहायक व महेंद्र सिंह डिस्पैचर द्वारा प्लाटधारकों को पत्रों के माध्यम से समय पर सूचित न करके लापरवाही की। इनके विरुद्ध हरियाणा सिविल सेवाएं 1987 दंड एवं अपील के नियम 8 के तहत विभागीय कार्रवाई का सुझाव दिया गया। इसके अतिरिक्त संपदा अधिकारी, हुडा फरीदाबाद बीर सिंह कालीरमण, एचसीएस द्वारा ड्रा के संबंध में जो पत्र मुख्य प्रशासक, हुडा फरीदाबाद को लिखा गया, उस पत्र में यह उल्लेख नहीं किया गया कि संपदा अधिकारी कार्यालय द्वारा, प्लाटधारकों को दिनांक 14 मई 2012 को मिनी ड्रा होने के बारे में सूचित नहीं किया गया। इसके चलते बीर सिंह कालीरमण, एचसीएस, संपदा अधिकारी का आचरण, सरकार के ध्यान में लाए जाने का सुझाव रिपोर्ट में दिया गया था।
जांच रिपोर्ट, आरोप 2:
विवादित प्लाट अलॉट करने में अमनीत पी कुमार द्वारा न्यायालय के स्टे आदेश की किसी भी प्रकार से अवहेलना करनी नहीं पाई गई। हुडा विभाग को कोई वित्तीय हानि होनी नहीं पाई गई। न ही किसी प्लाट धारक से कोई रिश्वत लेने बारे में तथ्य/साक्ष्य सामने आया है। जांच के दौरान बीर सिंह कालीरमन, तत्कालीन संपदा अधिकारी, फरीदाबाद ने मुख्य प्रशासक को पूर्ण तथ्य से अवगत नहीं कराया गया। यही वजह रही कि उनका आचरण, सरकार के ध्यान में लाए जाने का सुझाव रिपोर्ट में दिया गया था।
जांच रिपोर्ट, आरोप 3:
जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्लाट नंबर 33 सेक्टर 7, फरीदाबाद विवादित होने पर रिज्यूम किया जाना पाया गया है। अजीत बाला जोशी, प्रशासक हुडा द्वारा अपने आदेश दिनांक 20 अक्तूबर 2021 के अनुसार अपील रद्द कर दी गई थी, लेकिन अमनीत पी कुमार द्वारा उपरोक्त प्लाट को नियम के विरुद्ध रिस्टोर किया गया। इस संबंध में सरकार के पत्र क्रमांक 20/10/2012—2 एस (1) हरियाणा सरकार, मुख्य सचिव, डिपार्टमेंट ऑफ परसोनल दिनांक 2 अप्रैल 2013 द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार, आईएएस अमनीत पी कुमार को इस प्रकार के मामलों में अधिक सचेत रहने का पहले ही सुझाव दिया जाना पाया गया है।
जांच रिपोर्ट, आरोप 4:
इसमें पाया गया है कि सुभाष चंद ने आर्मी कोटे में 1 कनाल के प्लाट लेने के लिए आवेदन किया था। उसके द्वारा किए गए आवेदन में अपना राज्य उत्तर प्रदेश अंकित किया गया था। हुडा की पॉलिसी के अनुसार, अन्य राज्य का कोई भी उम्मीदवार आर्मी कोटे से प्लाट लेने का पात्र नहीं बनता था। किशन चंद सहायक द्वारा उसके आवेदन का निरीक्षण सही प्रकार से नहीं किया गया। नतीजा, सुभाष चंद प्लाट लेने में सफल रहा। बाद में हुडा विभाग में जमा कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, वह इस प्लाट को लेने के लिए अयोग्य पाया गया। सुभाष चंद को आर्मी कोटे से कोई प्लाट अलॉट होना नहीं पाया गया, लेकिन सुभाष चंद द्वारा हुडा विभाग में आर्मी कोटे से प्लाट के लिए किए गए आवेदन का निरीक्षण किशन चंद सहायक द्वारा अच्छी प्रकार से न करके अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतना सामने आया। इसके लिए उसके खिलाफ हरियाणा सिविल सेवाएं, दंड एवं अपील नियम 7 के तहत विभागीय कार्यवाही का सुझाव दिया गया था।
जांच रिपोर्ट, आरोप 5:
रिपोर्ट के अनुसार, बूथ नंबर 132/16 फरीदाबाद अरुण चौधरी को अलॉट होना पाया गया है। अलॉटी द्वारा समय पर देय राशि जमा न करवाने पर उसका बूथ दिनांक 3 अगस्त 2008 को रिज्यूम किया जाना पाया गया। अलॉटी द्वारा बार बार अपील करने पर अमनीत पी कुमार ने उस अपील को खारिज कर दिया। यह बात जांच में सामने आई है। अलॉटी को एविक्शन नोटिस 18 (1) दिनांक 9 मार्च 2012 जारी किया गया।
इस संबंध में अलॉटी द्वारा दोबारा से अपनी अपील, हुडा प्रशासक को दी गई। इस पर प्रशासक हुडा द्वारा अपील को स्वीकार करते हुए अपने आदेश दिनांक 7 मई 2012 द्वारा बूथ को बहाल कर दिया गया। अलॉटी को पूर्ण राशि 18 प्रतिशत के हिसाब से 2 लाख पेनल्टी सहित जमा कराने तथा संपदा अधिकारी को अलॉटी के फैसले के एक माह के अंदर बकाया राशि जमा कराने के लिए डिमांड नोटिस भेजने व अलॉटी को डिमांड नोटिस प्राप्त होने के दो माह तक बकाया राशि जमा कराने का भी फैसला लिया गया।
अमनीत पी कुमार व बीआर श्योराण, उप जिला न्यायवादी हुडा, फरीदाबाद ने इस फैसले के बारे में हुडा एक्ट, 1977 की धारा 20 के अंतर्गत निदेशक, नगर एवं आयोजना विभाग को पावर डेलिगेट होने का जिक्र किया है। एक ही स्तर का अधिकारी अलग अलग परिस्थितियों में धारा 18 (1) व धारा 20 हुडा एक्ट, 1977 के अधिकार का प्रयोग कर सकता है या नहीं, इनको प्रोटैक्शन एक्ट, 1985 के तहत कोई अधिकार मिल सकता है या नहीं, क्योंकि उपरोक्त अनुसार अलग अलग फैसले (एक ही स्तर के अधिकारियों द्वारा लिए गए हैं), इस बारे में सरकार को अपने स्तर पर फैसला लिए जाने का सुझाव दिया गया है।
जांच रिपोर्ट, आरोप 6:
जांच रिपोर्ट बताती है कि ट्रांसपोर्ट नगर के प्लाट अलॉटमेंट के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक, 23 जनवरी 2012 को बुलाई गई। रिकॉर्ड के अनुसार, कमेटी द्वारा 46 सदस्यों के प्लाट आबंटन की शर्तें पूरी न करने पर प्लाट स्वीकृत नहीं किए जाने पाए गए हैं। कमेटी की रिपोर्ट को मुख्यालय पर आगामी कार्रवाई के लिए भेज दिया गया। इसके अतिरिक्त कार्यालय फाइल में एक अलग पत्र, जो मुख्य प्रशासक, हुडा पंचकूला को लिखा गया है, लगाया जाना पाया गया। इस पत्र में डिस्पैच नंबर नहीं लगाया गया, जबकि पत्र में विषय ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर 58 फरीदाबाद में प्लाट देने से संबंधित है। इस पत्र पर अमनीत पी कुमार, तत्कालीन प्रशासक हुडा, फरीदाबाद के हस्ताक्षर हैं। इस पत्र के साथ न तो कमेटी की रिपोर्ट है, न ही अनुलग्नक (ए में 46 प्लॉट आवेदकों को प्लाट देने के लिए अनुमोदन व बी में चार आवेदकों को प्लाट न देने बारे) लगे हुए पाए गए हैं। इस संबंध में ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर 58, फरीदाबाद में कुल 46 प्लस 4 यानी 50 प्लाट न तो आबंटित किए गए, न ही आबंटित करने के बारे में कार्यालय की मूल फाइल पर कोई नोटिंग लिखी जानी नहीं पाई गई है।
उपरोक्त ट्रांसपोर्टरों द्वारा सीडब्लूपी नंबर 16802 ऑफ 2010 उच्च न्यायालय में दायर की गई। दिनांक 9 नवंबर 2012 को हुडा मुख्यालय पंचकूला से ईमेल द्वारा पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ के आदेश दिनांक 2 नवंबर 2012, प्रशासक हुडा, फरीदाबाद को याचिकाकर्ता के केस को सैटल करने का आदेश हुआ था। इसकी अनुपालना में प्रशासक हुडा कार्यालय में नियुक्त कमेटी द्वारा पत्र दिनांक 30 नवंबर 2012 के अनुसार, 46 आबंटियों को प्लाट नियतन करने व 4 आबंटियों को प्लाट न देने की सिफारिश की गई। इस पर पंचकूला मुख्यालय ने 4 जनवरी 2013 को 46 आबंटियों को प्लाट देने की स्वीकृति दे दी। इसके अतिरिक्त उच्च न्यायालय ने भी अपने निर्णय दिनांक 15 जनवरी 2013 के फैसले में 46 ट्रांसपोर्टरों को प्लाट आबंटित करने व अन्य 4 आबंटियों की प्रार्थना पर सहानुभूति पूर्वक गौर करने के आदेश जारी किए। मुख्यालय व हाईकोर्ट के आदेशों के पालन में इन 46 ट्रांसपोर्टरों को दिनांक 24 मई 2013 को ड्रा के द्वारा प्लाट आबंटित करने का समय निश्चित किया जाना पाया गया है।
जांच हुई तो अमनीत पी कुमार द्वारा बताया गया कि उसे यह जानकारी नहीं है कि बिना तारीख व बिना डिस्पैच पत्र पर किसी शरारती द्वारा रुटीन में उससे हस्ताक्षर करा लिए हैं। इस पत्र के साथ गठित कमेटी की कोई रिपोर्ट अटैच नहीं है और न ही कमेटी की रिपोर्ट, कार्यालय फाइल में उपलब्ध है। उपरोक्त के अतिरिक्त बिना डिस्पैच पत्र के जांच के दौरान ऐसा कोई तथ्य/साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे यह कहा जा सके कि प्रतिवादिया द्वारा 46 प्लाट धारकों को पहले प्लाट अलॉट किए गए हों। इस संबंध में सरकार द्वारा अपने स्तर पर फैसला लिए जाने का सुझाव दिया जाता है।
जांच रिपोर्ट, आरोप 7:
अमनीत पी कुमार के द्वारा रवि अत्री के माध्यम से किसी भी प्रकार की रिश्वत लेने बाबत कोई साक्ष्य/तथ्य सामने नहीं आया है।