{"_id":"6400bdc890fe21e8250e4d47","slug":"actor-director-satish-kaushik-in-poster-launch-of-fifth-edition-of-chitra-bharati-film-festival-in-new-delhi-2023-03-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Chitra Bharati Film Festival: एक्टर-डायरेक्टर सतीश कौशिक बोले, ऐसी फिल्में बनाऊंगा जो भारत की बात करे","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Chitra Bharati Film Festival: एक्टर-डायरेक्टर सतीश कौशिक बोले, ऐसी फिल्में बनाऊंगा जो भारत की बात करे
Thu, 02 Mar 2023 08:55 PM IST
सौरभ पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: सौरभ पांडेय
Updated Thu, 02 Mar 2023 08:55 PM IST
सार
Chitra Bharati Film Festival: हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध एक्टर-डायरेक्टर सतीश कौशिक ने कहा कि हमारी पुरानी फिल्में हमारे समाज को प्रतिबिंबित करती थीं, लेकिन आज फिल्मों पर व्यवसाय भारी पड़ गया है।
विज्ञापन
चित्र भारती फिल्म फेस्टिवल के पोस्टर लांच के अवसर पर डायरेक्टर-एक्टर सतीश कौशिक और मनोज तिवारी।
- फोटो : चित्र भारती फिल्म फेस्टिवल
विस्तार
Actor-Director Satish Kaushik in Chitra Bharati Film Festival: हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध एक्टर-डायरेक्टर सतीश कौशिक ने कहा कि हमारी पुरानी फिल्में हमारे समाज को प्रतिबिंबित करती थीं, लेकिन आज फिल्मों पर व्यवसाय भारी पड़ गया है। यही कारण है कि आज की फिल्मों में पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव ज्यादा बढ़ता जा रहा है। पश्चिम की अच्छी बातें अपनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन हमें फिल्मों को अपने समाज की मूल समस्याओं से जोड़ना होगा, जिससे आम दर्शक उससे जुड़ाव महसूस करे।
विज्ञापन
मनोरंजन के लिए होनी चाहिए फिल्में
उन्होंने कहा कि फिल्मों का मूल विषय मनोरंजन होना चाहिए, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि मनोरंजन के नाम पर लोगों के सामने फूहड़ चीजें परोसी जाएं। उन्होंने कहा कि दर्शक इन फूहड़ चीजों से ऊब चुका है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें यही चीजें परोसी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल ऐसी फिल्में बनाएंगे जो भारत की बात करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
हिंदी फिल्मों से अपनी मिट्टी की खुशबू गायब
चित्र भारती फिल्म फेस्टिवल के पांचवें संस्करण (23-25 फरवरी 2024) के पोस्टर लांच के अवसर पर दिल्ली पहुंचे सतीश कौशिक ने कहा कि दर्शक फिल्मों में अपने गांव, बाग-बगीचों और खेत-खलिहानों की बात देखना चाहता है, लेकिन उसे ये चीजें नहीं दी जा रही हैं। यही कारण है कि अब दर्शको का एक बड़ा वर्ग इनसे दूर हो गया है। उन्होंने कहा कि तमिल-तेलगु की फिल्में अपनी संस्कृति और सभ्यता की बात करती दिखाई पड़ती हैं, यही कारण है कि उनके दर्शक उन्हें अपने सिर पर बिठा रहे हैं, जबकि हिंदी फिल्मों से अपनी मिट्टी की खुशबू गायब हो गई है।