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उपलब्धि: नीतिगत सुधारों से बदली सूरत, स्टार्टअप-निवेशकों के लिए पहली पसंद बना भारत; उद्योग जगत का भरोसा मजबूत
Fri, 06 Mar 2026 05:30 AM IST
Pavan
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Fri, 06 Mar 2026 05:30 AM IST
सार
नीतिगत सुधारों से भारत की छवि बदल गई है। इसीलिए भारत स्टार्टअप और निवेशकों के लिए पहली पसंद बना चुका है। इसके साथ ही देश दक्षता और अवसर के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। जबकि उत्पादन, रोजगार और निवेश को लेकर उद्योग जगत का भरोसा भारत के प्रति और मजबूत हुआ है।
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नीतिगत सुधारों से बदली भारत की छवि
- फोटो : FreePik
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विस्तार
भारत पिछले एक दशक में न सिर्फ निवेश, बल्कि व्यवसाय करने के लिए भी दुनिया के सबसे आकर्षक स्थानों में शामिल हो गया है। सरकार की ओर से शुरू किए गए विनियामक सुधारों के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम और व्यापार अनुकूल नीतियों के कारण देश अब दक्षता और अवसर के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। इस बदलते व्यावसायिक परिवेश का सबसे बड़ा प्रमाण है कि सिर्फ पांच वर्षों में देश में सक्रिय पंजीकृत कंपनियों की संख्या में 27 फीसदी की भारी वृद्धि देखी गई है। यह संख्या 2020-21 में 1.55 लाख थी, जो 3 फरवरी, 2026 तक बढ़कर 1.98 लाख हो गई है।
यह भी पढ़ें - Trade: अमेरिकी उपविदेश सचिव बोले- भारत-US व्यापार समझौता लगभग तैयार, ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में करेंगे मदद
सुधारों और व्यापार अनुकूल नीतियों के दम पर आरबीआई का व्यावसायिक विश्वास सूचकांक वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 की दूसरी तिमाही तक लगातार 100 के तटस्थ मानक से ऊपर बना हुआ है। यह सकारात्मक रुझान भविष्य के उत्पादन, रोजगार और निवेश को लेकर उद्योग जगत के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। कंपनियां वर्तमान में मांग, खपत और विकास की संभावनाओं को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही हैं।
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दिवालिया कानून ने संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान में निभाई अहम भूमिका: दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) ने संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सितंबर, 2025 तक कुल 3,865 मामलों का समाधान किया गया, जिससे ऋणदाताओं ने 3.99 लाख करोड़ की वसूली की है। ये सुधार भारत को प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
स्टार्टअप-एमएसएमई को मिला संबल
भारत आज विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप परिवेश में से एक है। फरवरी, 2026 तक देश में 2.16 लाख से अधिक डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप सक्रिय हैं। सरकार ने स्टार्टअप के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सरल बनाया और अनुपालन के बोझ को कम किया है। वहीं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण गारंटी योजनाओं ने संजीवनी का काम किया है।
ऋण गारंटी सीमा बढ़कर 20 करोड़ रुपये
सरकारी बैंकों के 2025 में शुरू किए गए डिजिटल ऋण आकलन मॉडल (सीएएम) के जरिये एमएसएमई को कर्ज मिलना आसान हुआ है। अप्रैल से नवंबर, 2025 के बीच मॉडल के तहत 3.2 लाख करोड़ के कर्ज आवेदन आए, जिनमें से 41.5 हजार करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत हो चुकी है।
यह भी पढ़ें - पश्चिम एशिया संकट: बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रही हवाई यात्रा, भारतीय एयरलाइंस ने रद्द की 281 विदेशी उड़ानें
बीमा और कर व्यवस्था में हुए महत्वपूर्ण बदलाव
सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा संशोधन कानून) अधिनियम 2025 के जरिये इस क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी गई है। विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए शुद्ध स्वामित्व निधि जरूरत को 5,000 करोड़ से घटाकर 1,000 करोड़ किया गया है। इसके अलावा, कर प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। लघु अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए जन विश्वास विधेयक 2025 लाया गया है।
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दिवालिया कानून ने संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान में निभाई अहम भूमिका: दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) ने संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सितंबर, 2025 तक कुल 3,865 मामलों का समाधान किया गया, जिससे ऋणदाताओं ने 3.99 लाख करोड़ की वसूली की है। ये सुधार भारत को प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
स्टार्टअप-एमएसएमई को मिला संबल
भारत आज विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप परिवेश में से एक है। फरवरी, 2026 तक देश में 2.16 लाख से अधिक डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप सक्रिय हैं। सरकार ने स्टार्टअप के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सरल बनाया और अनुपालन के बोझ को कम किया है। वहीं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण गारंटी योजनाओं ने संजीवनी का काम किया है।
ऋण गारंटी सीमा बढ़कर 20 करोड़ रुपये
सरकारी बैंकों के 2025 में शुरू किए गए डिजिटल ऋण आकलन मॉडल (सीएएम) के जरिये एमएसएमई को कर्ज मिलना आसान हुआ है। अप्रैल से नवंबर, 2025 के बीच मॉडल के तहत 3.2 लाख करोड़ के कर्ज आवेदन आए, जिनमें से 41.5 हजार करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत हो चुकी है।
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सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा संशोधन कानून) अधिनियम 2025 के जरिये इस क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी गई है। विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए शुद्ध स्वामित्व निधि जरूरत को 5,000 करोड़ से घटाकर 1,000 करोड़ किया गया है। इसके अलावा, कर प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। लघु अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए जन विश्वास विधेयक 2025 लाया गया है।