{"_id":"5943c9274f1c1b4e278b4c2f","slug":"abu-salem-can-not-be-death-penalty-mumbai-blast","type":"story","status":"publish","title_hn":"1993 मुंबई ब्लास्ट में अबु सलेम समेत 6 दोषी, फांसी की सजा देने में है एक बड़ा पेंच","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
1993 मुंबई ब्लास्ट में अबु सलेम समेत 6 दोषी, फांसी की सजा देने में है एक बड़ा पेंच
amaruajala.com. अरविंद कुमार
Updated Fri, 16 Jun 2017 06:41 PM IST
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abu salem
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1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट पर सुनवाई करने वाली विशेष टाडा अदालत ने शुक्रवार को अबु सलेम समेत 7 के खिलाफ फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अबु सलेम और 5 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में सातवें आरोपी अब्दुल कय्यूम को पर्सनल बॉन्ड पर बरी कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि 2005 में पुर्तगाल ने अबु सलेम को प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को सौंपा था। अबु सलेम पर घातक हथियार और गोला बारूद की सप्लाई करने का आरोप था जिसमें भारी मात्रा में आरडीएक्स भी शामिल था।
एबीपी न्यूज की एक खबर के मुताबिक प्रत्यर्पण में पुर्तगाल सरकार ने भारत के सामने पहले से ही ये शर्त रखी थी कि अगर उसे प्रत्यर्पण से अलग मामले में मौत की सजा देगी तो ये संधि खतरे में पड़ सकती है। पुर्तगाल ने सलेम को तत्कालीन एनडीए सरकार को कुछ शर्तो के साथ सौंपा था। तत्कालीन डिप्टी पीएम एल के आडवाणी और विदेश मंत्री उमर अबदुल्ला ने पुर्तगाल से सलेम को मौत की सजा ना देना का वादा किया था।
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इंटरपोल इंडिया के पूर्व सहायक निदेशक, एनएस खादायत ने कहा 'अबु सलेम को पुर्तगाल से कुछ शर्तों के आधार पर भारत लाने के बाद फांसी नहीं दी जा सकती।'
अबु सलेम पर हत्या और जबरन वसूली करने के अलावा कई गंभीर मामले भी दर्ज हैं। इसके बाद साल 2002 में अबु सलेम को पुर्तगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया और तीन साल बाद 2005 में भारत को सौंप दिया। जिसके बाद उस पर मुकदमा चला और उसे दोषी ठहराया गया तथा 2015 में आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई।
2007 में टाडा अदालत ने मुबंई सीरियल ब्लास्ट (1993) मामले में 100 लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें 23 को बरी कर दिया गया है। बता दें कि सात अभियुक्तों अबु सलेम, मुस्तफा, करीमुल्ला खान, फिरोज अब्दूल राशिद खान, रियाज सिद्दकी, ताहिर मर्चेंट और अब्दूल कय्यूम पर मुख्य मामले से अलग केस चलाया गया जबकि इन सबकी गिरफ्तारी उसी मामले पर चल रही कार्रवाई के दौरान हुई थी।
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उल्लेखनीय है कि 2005 में पुर्तगाल ने अबु सलेम को प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को सौंपा था। अबु सलेम पर घातक हथियार और गोला बारूद की सप्लाई करने का आरोप था जिसमें भारी मात्रा में आरडीएक्स भी शामिल था।
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एबीपी न्यूज की एक खबर के मुताबिक प्रत्यर्पण में पुर्तगाल सरकार ने भारत के सामने पहले से ही ये शर्त रखी थी कि अगर उसे प्रत्यर्पण से अलग मामले में मौत की सजा देगी तो ये संधि खतरे में पड़ सकती है। पुर्तगाल ने सलेम को तत्कालीन एनडीए सरकार को कुछ शर्तो के साथ सौंपा था। तत्कालीन डिप्टी पीएम एल के आडवाणी और विदेश मंत्री उमर अबदुल्ला ने पुर्तगाल से सलेम को मौत की सजा ना देना का वादा किया था।
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इंटरपोल इंडिया के पूर्व सहायक निदेशक, एनएस खादायत ने कहा 'अबु सलेम को पुर्तगाल से कुछ शर्तों के आधार पर भारत लाने के बाद फांसी नहीं दी जा सकती।'
अबु सलेम पर हत्या और जबरन वसूली करने के अलावा कई गंभीर मामले भी दर्ज हैं। इसके बाद साल 2002 में अबु सलेम को पुर्तगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया और तीन साल बाद 2005 में भारत को सौंप दिया। जिसके बाद उस पर मुकदमा चला और उसे दोषी ठहराया गया तथा 2015 में आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई।
2007 में टाडा अदालत ने मुबंई सीरियल ब्लास्ट (1993) मामले में 100 लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें 23 को बरी कर दिया गया है। बता दें कि सात अभियुक्तों अबु सलेम, मुस्तफा, करीमुल्ला खान, फिरोज अब्दूल राशिद खान, रियाज सिद्दकी, ताहिर मर्चेंट और अब्दूल कय्यूम पर मुख्य मामले से अलग केस चलाया गया जबकि इन सबकी गिरफ्तारी उसी मामले पर चल रही कार्रवाई के दौरान हुई थी।