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कर्नाटक: 20 साल की उम्र में चुराई थीं भैंस, छह दशक बाद मिला फरार आरोपी; अदालत में होगी पेशी

Wed, 13 Sep 2023 10:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीदर (कर्नाटक)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीदर (कर्नाटक) Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 13 Sep 2023 10:27 PM IST
सार

Karnataka: पुलिस के मुताबिक, चोरी की घटना 1965 में हुई थी, तब आरोपी गणपति विट्ठल वागोरे बीस साल का था। उसने अपने सहयोगी कृष्ण चंदर के साथ मिलकर बीदर के मेहाकर गांव से भैंस और बछड़ा चुराया था।

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Absconding man who stole 2 buffaloes, a calf nearly six decades ago in Karnataka finally traced
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कर्नाटक के बीदर जिले के एक गांव से दो भैंसों और एक बछड़े की चोरी के करीब छह दशक पुराने मामले में महाराष्ट्र के एक व्यक्ति (78 वर्षीय) को कानून का सामना करना पड़ रहा है। 

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पुलिस के मुताबिक, चोरी की घटना 1965 में हुई थी, तब आरोपी गणपति विट्ठल वागोरे बीस साल का था। उसने अपने सहयोगी कृष्ण चंदर के साथ मिलकर बीदर के मेहाकर गांव से भैंस और बछड़ा चुराया था। हालांकि, उनके सह-आरोपी की 2006 में मौत हो गई थी, जिसके बाद मामले में उनके खिलाफ मुकदमा बंद कर दिया गया था।

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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 8 अप्रैल, 1965 की सुबह एक किसान मुरलीधर कुलकर्णी ने बीदर जिले के मेहाकर गांव में अपने घर के पास एक भूमि पर चरने के लिए अपनी दो भैंसों और एक बछड़े को छोड़ दिया था। थोड़ी देर बाद उसे पता चला कि कुछ अज्ञात लोगों ने मवेशियों को चुरा लिया है जिसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया। हालांकि, दो दिन बाद महाराष्ट्र पुलिस ने लातूर जिले के तकलागांव गांव से संदिग्ध परिस्थितियों में वागोरे और उसके सहयोगी के पास से चोरी की गई भैंसें और बछड़ा अन्य जानवरों के साथ बरामद किया गया था।

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महाराष्ट्र पुलिस अधिकारियों ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और भैंस व बछड़े को शिकायतकर्ता को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि अपराध कर्नाटक में हुआ था, इसलिए महाराष्ट्र पुलिस ने मामले को बीदर जिले के एक पुलिस थाने में स्थानांतरित कर दिया था। इसके बाद कर्नाटक पुलिस ने वागोर और चंदर दोनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

आखिरकार, वे जमानत पर बाहर आग गए लेकिन मुकदमे के लिए पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया और बाद में उनके खिलाफ खुला वारंट जारी किया गया। उन्होंने कहा, बीदर जिले की पुलिस ने दोनों फरार लोगों का वर्षों तक पता लगाने की कोशिश की और बाद में उन्हें पता चला कि एक आरोपी चंदर की 2006 में मृत्यु हो गई है, जिसके बाद उन्होंने अदालत में उसका मृत्यु प्रमाण पत्र पेश किया और उसके खिलाफ मुकदमा बंद कर दिया गया। हालांकि, वे मामले में अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाने में विफल रहे।

लंबे समय से लंबित मामलों को ट्रैक करने के लिए पुलिस ने सभी पुराने मामलों का पता लगाया और उन पर काम करना शुरू कर दिया। पुलिस अधीक्षक (बीदर) चेन्नाबासवन्ना लंगोटी ने अपने जिले में लंबे समय से लंबित मामलों को सुलझाने के लिए एक विशेष टीम का भी गठन किया था। 
 

एक वृद्ध महिला से मिली सूचना के आधार पर और तकनीकी निगरानी की मदद से विशेष टीम इस साल आठ सितंबर को महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के एक गांव में आरोपी वागोरे का पता लगाने में सफल रही और उसे अगले दिन यहां बीदर की एक अदालत में पेश किया गया। उन्होंने बताया कि अदालत ने उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन उन्हें सुनवाई के लिए एक बार फिर पेश होना होगा। पुलिस ने बताया कि मामले में शिकायतकर्ता भी अब जीवित नहीं है।
 

बीदर के एसपी चेन्नाबासवन्ना लंगोटी ने बुधवार को कहा, हम अपने जिले में लंबे समय से लंबित सभी मामलों का पता लगा रहे थे और हमें 1965 में दो भैंसों और एक बछड़े की चोरी का मामला मिला। हमारी टीम आरोपी का पता लगाने में कामयाब रही और उसे यहां अदालत में पेश किया। उनकी उम्र को देखते हुए अदालत ने उन्हें मामले में जमानत भी दे दी है। यह शायद जिले में अब तक का सबसे लंबा मामला है और कानून अपना काम करेगा।

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