पठानकोट हमला: भारत ने समझौते का हवाला देकर खारिज किया पाकिस्तान का दावा
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भारत ने पाकिस्तान के इस दावे को नकार दिया है कि उसके संयुक्त जांच दल (जेआईटी) को पठानकोट आतंकी हमले की जांच के सिलसिले में सेना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों से मिलने की इजाजत नहीं दी गई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के अनुसार पाक टीम ने भारत में पूर्व में तय शर्तों के अनुसार ही काम किया है। जेआईटी के दौरे के पहले ही दोनों देशों के बीच विदेश मंत्रालय के माध्यम से समझौता हो गया था। इसके अनुसार टीम को पठानकोट हमले से निपटने वाले किसी सुरक्षाकर्मी से मिलने की अनुमति नहीं थी।
जेआईटी की वापसी के साथ ही पाकिस्तान के सुर बदल गए हैं। पड़ोसी देश की तरफ से बुधवार को कहा गया कि भारत ने उसकी जांच टीम के सामने सुरक्षा बलों से जुड़े गवाहों को प्रस्तुत नहीं किया। बृहस्पतिवार को भारत ने इसका जवाब दिया।
विकास स्वरूप ने कहा कि जेआईटी पारस्परिक आधार और वर्तमान कानूनी प्रावधानों के अनुरूप भारत आई थी। वहीं गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक जेआईटी के आने से काफी पहले इस बात पर सहमति बन गई थी कि पाक टीम पठानकोट ऑपरेशन में शामिल किसी सुरक्षाकर्मी से नहीं मिलेगी। इस बारे में हुए समझौते यानी टर्म्स ऑफ रेफरेंस के अनुसार जेआईटी ने महत्वपूर्ण गवाहों और पीड़ितों के बयान दर्ज किए।
क्या कहता है टर्म्स ऑफ रेफरेंस
संयुक्त जांच दल भारत में पठानकोट हमले से संबंधित सबूतों को जुटाएगा और उनका परीक्षण करेगा। टीम फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र करेगी ताकि उन्हें पाकिस्तान में संबंधित लोगों के नमूने से मिलाया जा सके।
जांच के क्रम में टीम पठानकोट हमले से जुड़े स्थानों पर जाएगी। भारत पहुंचते ही टीम अपने भारतीय समकक्षों के साथ अब तक हुई जांच की जानकारी साझा करेगी। महत्वपूर्ण गवाहों और पीड़ितों से मिलकर उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। वहीं एनआईए पाक टीम को केस के बारे में ब्रीफ करेगी।
मीडिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया नहीं देगी सरकार
पाकिस्तानी मीडिया में जेआईटी के एक सदस्य के हवाले से खबर आई थी कि पठानकोट आतंकी हमले की साजिश भारत द्वारा ही रची गई थी। मीडिया रिपोर्ट में जेआईटी सदस्य का नाम नहीं दिया गया है।
हालांकि विकास स्वरूप ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार किसी मीडिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया नहीं देगी। भारत ने पाकिस्तान के समक्ष मांग रखी थी कि उसे जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर से पूछताछ की अनुमति दी जाए। इस सवाल पर कि क्या भारत अब भी अपनी मांग पर कायम है, स्वरूप ने कहा कि वह वर्तमान जांच से जुड़े किसी एक शख्स या संगठन पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
''जेआईटी ने भारत में टर्म्स ऑफ रेंफरेंस के अनुसार काम किया। दोनों देशों की सरकारों के मध्य अपने संबंधित विदेश विभाग के माध्यम से इस बारे में पहले ही समझौता हो गया था। यह यात्रा पारस्परिक आधार और वर्तमान कानूनी प्रावधानों के अनुरूप थी।'' -विकास स्वरूप, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय
पाक उच्चायुक्त ने कहा, 'भारत के साथ फिलहाल बातचीत नहीं होगी'
पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता प्रक्रिया निलंबित है। वहीं पठानकोट हमले की जांच के क्रम में एनआईए टीम के पाकिस्तान जाने से जुड़े सवाल पर बासित ने कहा कि इसकी अनुमति देने की कोई बाध्यता नहीं है।
उन्होंने पाक जेआईटी के भारत आने को दोनों देशों के बीच सहयोग की प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि जेआईटी का पठानकोट दौरा पारस्परिकता(रेसीप्रोसिटी) के बारे में नहीं था।
साऊथ एशिया फॉरेन करेस्पांडेंट क्लब में मीडिया से मुखातिब होते हुए बासित ने एक बार फिर कश्मीर का राग अलापा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया की बहाली के लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान जरूरी है।
उन्होंने कहा यह भारत को ही तय करना है कि वह कब शांति वार्ता के लिए तैयार है। बासित ने कहा कि हम (पास्तिन)देखते हैं कि इसे कैसे शुरु कर सकते हैं लेकिन जहां तक मुझे पता है अभी प्रक्रिया निलंबित है और दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक (समय)तय नहीं है।
पाकिस्तानी उच्चायुक्त के इस बयान को भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाने के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान की टीम के लौटने के बाद भारत को अब एनआईए की टीम को भेजने के लिए पड़ोसी देश से जवाब का इंतजार है।
भारत लगातार कह रहा है कि पाकिस्तान की ज्वाइंट इंवेस्टिगेशन टीम को इसी समझ के साथ पठानकोट का दौरा करने की इजाजत दी गई थी कि भारतीय जांचकर्ताओं को भी पाकिस्तान जाने की इजाजत मिलेगी।
अब्दुल बासित ने आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर पर प्रतितबंध लगाने के लिए भारत द्वारा की पहल पर चीन के रुख को सही ठहराया और पूर्व नौसैनिक अधिकारी कुलभूषण यादव की गिरफ्तारी को उच्चायुक्त ने पाकिस्तान को अस्थिर करने के प्रयासों से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि जो पाकिस्तान के लोग सोच रहे थे, यह उसे सही साबित करता है। हालांकि बासित ने कहा कि यादव को काऊंसलर की मदद कराने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन यह नहीं कह सकते कि यादव को कब यह मिल पाएगी।
पाकिस्तान के उच्चायुक्त अपने देश के फौज की नीति दोहरा रहे हैं। यह स्टैंड की हर मुद्दे पर बात हो और शांति प्रक्रिया के कश्मीर का मुद्दे पर बात हो, जबकि बुधवार को विदेश सचिव एस जयशंकर ने भारत का रूख स्पष्ट कर दिया था।
उन्होंने सीमा पार से आतंकवाद बड़ा रोड़ा बताया था। कुल मिलाकर इससे यही निष्कर्ष निकल रहा है कि पाकिस्तान की सेना का रवैया बदलने का जो विश्वास बन रहा था, वह गलत साबित हो रहा है।