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सांसदों ने छोड़ा 'आप': भाजपा पर हमलावर विपक्ष, कांग्रेस बोली- वॉशिंग मशीन फिर चालू; राउत ने बकासुर से की तुलना

Sat, 25 Apr 2026 06:24 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली / मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली / मुंबई Published by: Pavan Updated Sat, 25 Apr 2026 06:24 PM IST
सार

आप से सात सांसदों के भाजपा में जाने के एलान के बाद से राजनीतिक माहौल गरम है। एक तरफ भाजपा पर आरोप लग रहे हैं कि वह जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर नेताओं को अपने पक्ष में ला रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि अन्य दलों के नेता खुद उनकी नीतियों और नेतृत्व से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

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AAP Rajya Sabha Member leaves Party, Now Opposition Sllaming BJP; Congres and Shivsena UBT Criticize
केजरीवाल की पार्टी- AAP में दरार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों के अचानक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद देश की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया है। दरअसल, शुक्रवार को आप को बड़ा झटका लगा जब उसके सात राज्यसभा सांसद; राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल, ने पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का एलान किया। इन नेताओं का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है।
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'भाजपा की वॉशिंग मशीन फिर चालू हो गई'
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि 'भाजपा की वॉशिंग मशीन फिर चालू हो गई है, जिसमें 'मोदी वॉशिंग पाउडर' डाला जाता है।' उनका कहना है कि जिन नेताओं पर पहले जांच एजेंसियों के मामले चलते हैं, वे भाजपा में शामिल होते ही साफ-सुथरे हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग खुद को ईमानदारी और सिद्धांतों का प्रतीक बताते थे, वे अब पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं।
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'भाजपा की भूख कभी खत्म नहीं होती'
इस मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा की तुलना महाभारत के राक्षस 'बकासुर' से करते हुए कहा कि उसकी भूख कभी खत्म नहीं होती।' संजय राउत ने आरोप लगाया कि दूसरे दलों के नेताओं को डर और दबाव में भाजपा में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अब 'डंपिंग ग्राउंड' बनती जा रही है, जहां दूसरे दलों के नेता इकट्ठा हो रहे हैं।

भाजपा में गए राज्यसभा सांसद पंचायत चुनाव भी नहीं जीत सकते- उमर
उधर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों पर तंज कसते हुए कहा कि ये सांसद अपने दम पर एक भी पंचायत चुनाव नहीं जीत सकते। सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर इन लोगों ने पार्टी छोड़ दी है तो ठीक है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे आम आदमी पार्टी को तुरंत कोई बड़ा नुकसान होगा। थोड़ा नुकसान होने की उम्मीद जरूर है। उन्होंने कहा कि सात राज्यसभा सांसद भाजपा में चले गए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी अकेले अपने दम पर एक भी सीट जीतने के काबिल नहीं है। मुझे नहीं लगता कि इनके भाजपा में आने से जमीनी स्तर पर भाजपा को 10 वोट का भी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इन सांसदों में कोई भी ऐसा नहीं है कि जो पंचायत चुनाव भी अपने दम पर निकालने की क्षमता रखता है।

केजरीवाल के रवैये से AAP का भविष्य संकट में- संदीप दीक्षित
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने आम आदमी पार्टी के भविष्य पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर अरविंद केजरीवाल की हरकतें इसी तरह जारी रहीं तो पार्टी लंबे समय तक  नहीं टिकेगी। संदीप दीक्षित ने राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सदस्यों के आप छोड़कर भाजपा में शामिल होने पर कहा कि कोई बहुत आश्चर्य की बात नहीं है। राघव चड्ढा तो कुछ दिनों से ही उल्टी भाषा बोल रहे थे और शायद महत्वाकांक्षी भी हो गए थे। पंजाब में केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच मनमुटाव की खबरें आई थीं। शुरू में पंजाब में आप की जीत के बाद बैंक कलेक्शन का जिम्मा राघव चड्ढा को सौंपा गया था, लेकिन बाद में केजरीवाल ने खुद यह काम संभाल लिया, जिससे दोनों के बीच तनाव बढ़ा।

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भाजपा नेताओं ने किया विपक्षियों पर पलटवार
इस घटनाक्रम पर भाजपा नेताओं ने आम आदमी पार्टी पर तीखे हमले किए हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी आजादी के बाद सबसे कम समय में भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे अधिक लिप्त रहने वाली पार्टी बन गई है। भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि 2013-14 के आसपास बनी आम आदमी पार्टी के कई संस्थापक सदस्य और कार्यकर्ता समय-समय पर पार्टी छोड़ते रहे हैं। उन्होंने पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी कार्यशैली से असंतोष बढ़ा है।

भाजपा नेता आरपी सिंह ने भी इसी तरह के आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी में लोग असंतुष्ट हैं और यह अभी से नहीं है। चाहे योगेंद्र यादव हों, शाजिया इल्मी हों, प्रशांत भूषण हों या कुमार विश्वास हों, कई सारे लोग आम आदमी पार्टी छोड़ चुके हैं। स्पष्ट है कि उनकी (अरविंद केजरीवाल) पार्टी में लोग उनके कार्यों से नाराज हैं। भाजपा पंजाब के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा, 'अरविंद केजरीवाल को अपने नेतृत्व के तरीके पर विचार करना होगा। आम आदमी पार्टी, जो कभी एक वैकल्पिक शक्ति बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ी थी, अब अपने उस मूल लक्ष्य से भटक गई है। यह उसी बदलाव का नतीजा है।'


सीएम भगवंत मान ने मांगा राष्ट्रपति से मिलने का समय
वहीं, आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। भगवंत मान अपनी पार्टी के सात सांसदों के पार्टी छोड़ने पर नाराज हैं। सूत्रों ने बताया कि वे राष्ट्रपति के सामने पंजाब के राज्यसभा सदस्यों को रिकॉल करने संबंधी अपना पक्ष रखना चाहते हैं। सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के पार्टी विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं। इस दौरान वे भाजपा में शामिल हुए पंजाब के राज्यसभा सदस्यों को रिकॉल करने संबंधी पक्ष रखेंगे।

मान का राष्ट्रपति से मिलना राजनीतिक नौटंकी- चीमा
पंजाब की राजनीति में राज्यसभा दलबदल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने शनिवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर जुबानी हमला किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सीएम मान के मिलने के फैसले को उन्होंने राजनीतिक नाटक करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, 'राज्यसभा में दलबदल के मामले पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का राष्ट्रपति से मिलने के लिए जल्दबाजी करना, राजनीतिक नौटंकी के अलावा और कुछ नहीं है। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत, सांसदों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार संसद के दायरे में आता है, न कि राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करता है। दूसरी बात यह कि दो-तिहाई से अधिक सदस्यों के दलबदल के मामले में दलबदल विरोधी कानून बिल्कुल स्पष्ट है।'

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विधायकों के आप में शामिल होने का किया जिक्र
उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि पंजाब में आपने एसएडी के तीन में से एक विधायक के आपकी पार्टी में शामिल होने को भी मंजूरी दी थी, और तो और उसे एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का चेयरमैन भी बना दिया था, ऐसे उपाय खोजने से पहले, जो संवैधानिक रूप से मौजूद ही नहीं हैं। आम आदमी पार्टी को एक बुनियादी सवाल का जवाब देना चाहिए कि पंजाब के असली आम आदमी प्रतिनिधियों के बजाय, बेहद अमीर बाहरी लोगों को राज्यसभा के लिए नामित करने का मापदंड क्या था? चीमा ने आगे कहा कि लोगों को यह स्पष्टता भी मिलनी चाहिए कि अगर जवाबदेही ही मूल सिद्धांत है, तो क्या नागरिकों को उन विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार है जिन्होंने उन्हें निराश किया है? या फिर आपकी जवाबदेही भी चुनिंदा है? दिल्ली में केवल प्रतीकात्मक याचिकाओं का सहारा लेने के बजाय आप पार्टी को पंजाब की जनता का सामना करना चाहिए। अगर वे सचमुच लोकतांत्रिक नैतिकता में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें पंजाब के 'लोक भवन' जाना चाहिए और पंजाब के राज्यपाल से नए जनादेश का अनुरोध करना चाहिए। केवल इसी कदम से, न कि केवल संवैधानिक दिखावे से, जनता का विश्वास बहाल हो पाएगा।

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