Budget 2018: महिलाओं को बजट से क्या मिला और क्या थी उनकी उम्मीदें?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आम बजट में ग्रामीण महिलाओं का खास ख्याल रखा गया है। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को मार्च 2019 तक 75 हजार करोड़ ऋण दिया जाएगा।
उज्जवला योजना के तहत निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन योजना का लाभ अब 5 करोड़ से बढ़ाकर 8 करोड़ गरीब महिलाओं को दिया जाएगा।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने महिलाओं को सीधे और अप्रत्यक्ष, दोनों ही तरह से लाभ दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं बड़ी तादाद में पशुपालन से जुड़ी हुई हैं। बजट में मछली व पशुपालन पर खास जोर दिया गया है। इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये का फंड बनाया जाएगा।
स्वयं सहायता समूहों के जरिये महिलाओं की जिंदगी में बड़े बदलाव आ रहे हैं। वे स्वरोजगार से जुड़ रही है। सेल्फ हेल्प ग्रुप की ऋण सीमा बढ़ाकर सरकार ने महिलाओं को साधने की कोशिश की है। राष्ट्रीय आजीविक मिशन का बजट भी बढ़ाया गया है। इसका लाभार्थियों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
महिलाओं की गरिमा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2018-19 में 1.88 करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2018-19 में ग्रामीण क्षेत्रों में 51 लाख आवास बनाए जाएंगे। इसमें भी महिलाएं लाभान्वित होंगी।
1.88 करोड़ शौचालयों का होगा निर्माण
ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं की सेहत और प्रतिष्ठा को भी ध्यान में रखा है। 1.88 करोड़ शौचालय निर्माण की पहल हो चुकी है और इस वर्ष उसे गति दिए जाने पर जोर दिया गया।
08 करोड़ महिलाओं को मिलेंगे निशुल्क गैस कनेक्शन
सरकार ने अपनी उज्जवला योजना का विस्तार किया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी शामिल करते हुए रसोई में उनको आराम देने के साथ प्रदूषण से राहत दिलाई गई है।
महिलाओं को बजट में किया गया अनदेखा
सरकार महिला सशक्तीकरण पर जोर देकर आधी आबादी को खुश करने का प्रयास कर रही है। यह आशा की जा रही थी कि सरकार महिलाओं के लिए खजाना खोलेगी लेकिन बजट में महिलाओं खासकर महिला सुरक्षा को अनदेखा किया गया है।
दुर्भाग्य की बात है कि बजट में महिला सशक्तीकरण की बात कहीं नहीं दिख रही। महिला सुरक्षा के लिए निर्भया फंड में बढ़ोतरी नहीं की गई। टैक्स स्लैब में बदलाव किए जाने, कामकाजी महिलाओं के लिए वर्किंग वूमेन हॉस्टल बनाकर लाभ पहुंचाने की कोशिश नहीं की गई। महिलाओं के लिए ईपीएफ की सीमा को 8 फीसदी किया गया है। इससे और सेनिटेशन पर आए बजट से शायद महिलाओं को थोड़ा लाभ मिले।
- डॉ रंजना कुमारी, निदेशक सेंटर फॉर सोशल रिसर्च
महिला सुरक्षा की बात नहीं की गई
देश में महिलाओं की आधी आबादी है लेकिन बजट में इनका ध्यान नहीं रखा गया। जब बच्चियों व महिलाओं के साथ बलात्कार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, तब भी बजट में महिला सुरक्षा की बात न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी सेस लगा दिया गया है।
सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के बजट में खास बढ़ोतरी नहीं की गई। निर्भया फंड के लिए भी कुछ खास नहीं किया गया। खास से महिलाओं व बच्चों को सेफ्टी दी जा सकेगी। इस बजट ने काफी हताश ही किया है।
- स्वाति जयहिंद, अध्यक्ष दिल्ली महिला आयोग