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चुनाव नतीजों पर असर डाल सकता है आधार कार्ड का डाटा: सुप्रीम कोर्ट
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Wed, 18 Apr 2018 05:28 AM IST
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आधार कार्ड
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि आधार डाटा लीक एक गंभीर मसला है और यह चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकता है। शीर्ष अदालत ने आधार की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने कहा कि आधार डाटा के दुरुपयोग से जुड़ी आशंकाएं वास्तविक हैं। इन आंकड़ों का इस्तेमाल चुनाव में हेराफेरी करने के लिए किया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘असल चिंता चुनाव में डाटा ब्योरे के दुरुपयोग को लेकर है। आधार का अस्तित्व किसी दूसरी दुनिया में नहीं इसी दुनिया में है। इसके दुरुपयोग पर विचार करते समय हमें इसका ध्यान रखना ही होगा।’ उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इसका इस्तेमाल कर चुनाव नतीजों को प्रभावित किया गया तो क्या लोकतंत्र बचा रहेगा।
शीर्ष अदालत में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की ओर से पेश वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि अदालत को आधार की हर अधिसूचना की जांच निजता के आधार पर करनी चाहिए। आधार की संपूर्ण स्कीम को खारिज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने के लिए कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा फेसबुक यूजर्स के डाटा चोरी की बुनियाद पर आधार को खारिज नहीं किया जा सकता। कई याची आधार की जगह स्मार्ट कार्ड की पैरवी कर रहे हैं क्योंकि गूगल जैसी संस्थाएं नहीं चाहती हैं कि आधार सफल हो।
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बता दें कि गलत तरीके से आधार डाटा प्राप्त करने का मामला सामने आ चुका है। इससे जुड़ी सूचनाएं लीक होने की खबरें भी आती रही हैं। हाल में महज 500 रुपये में आधार डाटा प्राप्त करने की रिपोर्ट मीडिया में आई थी। इसके बाद से आधार डाटा लीक को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने कहा कि आधार डाटा के दुरुपयोग से जुड़ी आशंकाएं वास्तविक हैं। इन आंकड़ों का इस्तेमाल चुनाव में हेराफेरी करने के लिए किया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘असल चिंता चुनाव में डाटा ब्योरे के दुरुपयोग को लेकर है। आधार का अस्तित्व किसी दूसरी दुनिया में नहीं इसी दुनिया में है। इसके दुरुपयोग पर विचार करते समय हमें इसका ध्यान रखना ही होगा।’ उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इसका इस्तेमाल कर चुनाव नतीजों को प्रभावित किया गया तो क्या लोकतंत्र बचा रहेगा।
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शीर्ष अदालत में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की ओर से पेश वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि अदालत को आधार की हर अधिसूचना की जांच निजता के आधार पर करनी चाहिए। आधार की संपूर्ण स्कीम को खारिज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने के लिए कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा फेसबुक यूजर्स के डाटा चोरी की बुनियाद पर आधार को खारिज नहीं किया जा सकता। कई याची आधार की जगह स्मार्ट कार्ड की पैरवी कर रहे हैं क्योंकि गूगल जैसी संस्थाएं नहीं चाहती हैं कि आधार सफल हो।
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बता दें कि गलत तरीके से आधार डाटा प्राप्त करने का मामला सामने आ चुका है। इससे जुड़ी सूचनाएं लीक होने की खबरें भी आती रही हैं। हाल में महज 500 रुपये में आधार डाटा प्राप्त करने की रिपोर्ट मीडिया में आई थी। इसके बाद से आधार डाटा लीक को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।