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Suprem Court News: NRC में शामिल 27 लाख लोगों को आधार जारी करने की मांग, निर्देश के लिए AG को दो हफ्ते का वक्त
Thu, 13 Oct 2022 04:37 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 13 Oct 2022 04:37 PM IST
सार
पीठ ने कहा कि एजी को मामले में उचित निर्देश लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। वह एक नोट डाल सकते हैं ताकि अगली तारीख को मुद्दों का समाधान किया जा सके।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अटॉर्नी जनरल को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर निर्देश मांगने के लिए दो सप्ताह का समय दिया, जिसमें असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) में संदिग्ध नागरिकों के रूप में सूचीबद्ध लगभग 27 लाख लोगों को आधार कार्ड जारी करने की मांग की गई थी। अंतिम एनआरसी अगस्त 2019 में प्रकाशित हुआ था और लगभग 19 लाख आवेदकों, जिनमें से कई को वास्तविक नागरिक कहा गया था, उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने निर्देश मांगने के लिए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि के अनुरोध को समय पर स्वीकार कर लिया।
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पीठ ने कहा कि एजी को मामले में उचित निर्देश लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। वह एक नोट डाल सकते हैं ताकि अगली तारीख को मुद्दों का समाधान किया जा सके। शीर्ष अदालत अब 9 नवंबर, 2022 को मामले की सुनवाई करेगी। टीएमसी विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बिस्वजीत देब ने बताया कि जिनके नाम पहली एनआरसी सूची में थे, उनके आधार कार्ड प्राप्त हुए थे। शीर्ष अदालत ने इस साल 11 अप्रैल को केंद्र, असम सरकार, भारत के महापंजीयक और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को नोटिस जारी किया था, जिसे देव की याचिका पर आधार जारी करने का काम सौंपा गया है।
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चुनावी बांड पर कल अदालत में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को चुनावी बॉन्ड योजना के माध्यम से राजनीतिक दलों को फंडिंग की अनुमति देने वाले कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत राजनीतिक दलों को दिए गए नकद चंदे के विकल्प के रूप में चुनावी बांड पेश किए गए हैं। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अन्य याचिकाकर्ताओं की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर सकती है। एनजीओ की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने 5 अप्रैल को तत्कालीन सीजेआई एन वी रमण के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह मुद्दा गंभीर है और इस पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है।
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