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दंगों के लिए बदनाम हुए मालदा में सामने आई इंसानियत की मिसाल
amarujala.com, Presented By : आनंद
Updated Wed, 26 Apr 2017 05:36 PM IST
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- फोटो : Times of india
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सांप्रदायिक दंगों के कारण पिछले कुछ समय से चर्चाओं में रहे मालदा में इंसानियत की ऐसी मिसाल देखने को मिली है जिसका उदाहरण लंबे समय तक दिया जाएगा। मालदा के मुस्लिम बहुल शेखपुरा इलाके में क्षेत्र के मुस्लिम लोगों ने तमाम बेड़ियों को तोड़ते हुए एक हिंदू व्यक्ति का पूरे रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया। खास बात ये है कि मुस्लिमों ने शव यात्रा के साथ राम नाम का उच्चारण भी किया।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार मालदा के शेखपुरा में रहने वाले विश्वजीत राजक की सोमवार रात को अचानक मृत्यु हो गई। विश्वजीत के अंतिम संस्कार के लिए उसके परिवार वालों के पास ना तो रुपये थे और न ही अर्थी को कंधा देने वाले नाते रिश्तेदार।
जिसके बाद पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर विश्वजीत के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। मृतक विश्वजीत की मां ने बताया कि रुपये की कमी के चलते हम अपने बेटे के लेकर पूरी रात बैठे रहे और रोते रहे। हम यह भी सोच रहे थे कि अब हम क्या करें। उन्होंने बताया मगर सुबह होते ही हमारे पास पड़ोस के मुस्लिम समाज के लोग आये और अर्थी को सहारा देते हुए श्मशान घाट तक गये। इसके अलावा मुस्लिम समाज के लोगों ने हिंदू रीजि-रिवाज को ध्यान में रखते हुए रास्ते में 'बोलो हरी हरी' के नारे लगाकर मृतक की आत्मा की शांति की प्रार्थना भी की।
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बता दें कि मालदा का शेखपुरा एक मुस्लिम बहुल इलाका है। जहां पर केवल दो या तीन घर ही हिंदूओं के है। विश्वजीत के अंतिम यात्रा में तृणमूल कांग्रेस के नेता और मालदा जिला परिषद के उपाध्यक्ष गौड़ चंद्र मंडल भी मौजूद रहे।
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार मालदा के शेखपुरा में रहने वाले विश्वजीत राजक की सोमवार रात को अचानक मृत्यु हो गई। विश्वजीत के अंतिम संस्कार के लिए उसके परिवार वालों के पास ना तो रुपये थे और न ही अर्थी को कंधा देने वाले नाते रिश्तेदार।
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जिसके बाद पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर विश्वजीत के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। मृतक विश्वजीत की मां ने बताया कि रुपये की कमी के चलते हम अपने बेटे के लेकर पूरी रात बैठे रहे और रोते रहे। हम यह भी सोच रहे थे कि अब हम क्या करें। उन्होंने बताया मगर सुबह होते ही हमारे पास पड़ोस के मुस्लिम समाज के लोग आये और अर्थी को सहारा देते हुए श्मशान घाट तक गये। इसके अलावा मुस्लिम समाज के लोगों ने हिंदू रीजि-रिवाज को ध्यान में रखते हुए रास्ते में 'बोलो हरी हरी' के नारे लगाकर मृतक की आत्मा की शांति की प्रार्थना भी की।
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बता दें कि मालदा का शेखपुरा एक मुस्लिम बहुल इलाका है। जहां पर केवल दो या तीन घर ही हिंदूओं के है। विश्वजीत के अंतिम यात्रा में तृणमूल कांग्रेस के नेता और मालदा जिला परिषद के उपाध्यक्ष गौड़ चंद्र मंडल भी मौजूद रहे।