मांग: जान पर खेल श्मशान-कब्रिस्तानों के कर्मी करा रहे शवों का अंतिम संस्कार, प्राथमिकता के आधार पर लगे कोरोना टीका
श्मशान घाटों और कब्रिस्तान के कर्मचारी रोजाना कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के शवों को गाड़ी से उतारने से लेकर उनके अंतिम संस्कार तक के सारे काम करते हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से इन लोगों को कोरोना का टीका लगवाने को लेकर कोई पहल नहीं की गई है। ये कर्मचारी काम के दबाव और खराब आर्थिक हालात के चलते अपनी सुरक्षा के उपाय करने में भी सक्षम नहीं हैं।
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भारत में कोरोना महामारी के कारण आए दिन बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं के देशभर के श्मशानों और कब्रिस्तानों में दाह संस्कार के लिए जगह की कमी पड़ गई है। इस मुश्किल घड़ी में भी श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में काम करने वाले कर्मचारी लगातार डटे हुए हैं और बिना रुके दिन-रात शवों के क्रिया-कर्म से पीछे नहीं हट रहे। ऐसे में जानलेवा बीमारी कोरोना से उनकी सुरक्षा को लेकर एक समूह ने चिंता व्यक्त की है और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कोविड वैक्सीन लगाए जाने की मांग की है।
माली हालत है खराब
बता दें, श्मशान घाटों और कब्रिस्तान के कर्मचारी रोजाना कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के शवों को गाड़ी से उतारने से लेकर उनके अंतिम संस्कार तक के सारे काम करते हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से इन लोगों को कोरोना का टीका लगवाने को लेकर कोई पहल नहीं की गई है। ये कर्मचारी काम के दबाव और खराब आर्थिक हालात के चलते अपनी सुरक्षा के उपाय करने में भी सक्षम नहीं हैं। दिल्ली गेट कब्रिस्तान में मुसलमानों के लिए कब्र खोदने का काम करने वाले 33 वर्षीय शेर सिंह ने बताया कि यहां के किसी भी कर्मचारी के पास एन95 मास्क तक खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं हैं।
गाजीपुर श्मशान में हर दिन 150 शवों का हो रहा दाह संस्कार
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के गाजीपुर श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए पूजा कराने वाले 30 वर्षीय पुजारी राम करन मिश्रा ने बताया कि बहुत से कर्मचारियों के पास दस्ताने और सैनिटाइजर तक नहीं हैं। मिश्रा ने कहा, ‘हमारे भी परिवार हैं, इसलिए हम डरे हुए हैं। हम अपने साथ बुखार की दवाइयां रखते हैं, लेकिन शमशान के कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर कोरोना की वैक्सीन दी जानी चाहिए। हमारे पास इस बात के लिए विरोध-प्रदर्शन करने तक का भी समय नहीं है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यहां एक दिन में 10 से 15 शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है, लेकिन इस साल अप्रैल में यहां हर दिन 100 से 150 शव लाए जा रहे हैं। आमतौर पर हम सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक काम करते थे, लेकिन अब हम सुबह के चार बजे से रात 10 बजे तक यानी 18 घंटे काम कर रहे हैं।’
खाने की भी होती है समस्या
गाजीपुर श्मशान घाट में ही काम करने वाले 45 वर्षीय सुनील शर्मा ने कहा कि यहां सिर्फ सुरक्षा और वैक्सीनेशन की ही नहीं बल्कि कर्मचारियों के लिए खाने की व्यवस्था करने में भी परेशानी आ रही है, क्योंकि यहां काम करने वालों की इतनी कमी हो गई है कि जो व्यक्ति दिन के दौरान हमारे लिए खाना बनाता था, उसे भी अब शवों के अंतिम संस्कार का काम करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘सभी श्मशानों और कब्रिस्तानों के कर्मचारी बहुत थके हुए हैं और भूखे भी हैं, लेकिन हमारी समस्याओं पर अब तक किसी का भी ध्यान नहीं गया। हालांकि, दिल्ली के युवाओं के एक समूह ‘द गुड फूड’ ने इस समस्या पर ध्यान दिया है और इन कर्मियों की मदद में लगा हुआ है।
दिल्ली का समूह मदद को आया आगे
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में 29 वर्षीय मैनेजमेंट कंसलटेंट नंदनी घोष और उनके दोस्त श्रेय गुप्ता ने ‘द गुड फूड’ नाम से एक प्रोजेक्ट तैयार किया है, जो श्मशान और कब्रिस्तान के कर्मचारियों के लिए भोजन के अलावा अन्य जरूरी चीजों की भी व्यवस्था कर रहा है। नंदिनी ने कहा, ‘श्मशान और कब्रिस्तान के कर्मचारियों के लिए अब तक कुछ खास नहीं किया गया है। हमने यहां के कर्मचारियों की मदद के लिए क्राउडफंडिंग के जरिये 50 हजार रुपये जुटाने की कोशिश की लेकिन हमारे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब हमें पता चला कि 48 घंटों के अंदर ही 15 लाख से ज्यादा रुपये इकठ्ठा हो गए।'
इंफेक्शन से फ्री करने वाली मशीनों को उपलब्ध कराने की योजना
उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोग थे, जिन्होंने अपनी पूरी सैलरी भेजने का फैसला लिया। इसी के साथ कुछ भारतीय प्रवासी लोगों ने भी इसके लिए योगदान दिया। तब हमने ‘गुड फूड प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की और अब हमारे पास लगभग 15 वॉलंटियर्स हैं, जो दिल्ली और उसके आसपास अलग-अलग शमशान स्थलों का दौरा करते हैं और वहां के कर्मचारियों की मदद करने की कोशिश करते हैं।' वहीं, उनके दोस्त श्रेय ने कहा कि हम इन कर्मचारियों को दी जा रही सहायता की लिस्ट तैयार करते हैं और इन लोगों को भोजन, पीपीई किट, मास्क, ओआरएस घोल और जूस मुहैया करा रहे हैं। हम इन्हें सैनिटाइजर और इंफेक्शन से फ्री करने वाली मशीनें भी उपलब्ध कराने जा रहे हैं।
प्राथमिकता के आधार पर कोरोना वैक्सीन लगाने की मांग
‘द गुड फूड’ समूह अब मांग कर रहा है कि दिल्ली-एनसीआर में अंतिम संस्कार कराने वाले सभी कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर टीका लगाया जाना चाहिए। इसके लिए वे स्थानीय सांसदों और विधायकों के पास भी पहुंच रहे हैं और याचिका भी दायर कर दी है। याचिका में कहा गया है, 'श्मशान या कब्रिस्तान के कर्मचारियों को इस समय संक्रमण का काफी खतरा है, इसलिए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कोरोना का टीका लगाया जाना चाहिए।'