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Hindi News ›   India News ›   8th CPC DA-DR Hike Expected, But 10 percent Financial Hit Looms for Govt Employees

8thCPC: इस माह 2-3 फीसदी डीए-डीआर की घोषणा संभव, 49 लाख कर्मियों/69 लाख पेंशनरों को 10% वित्तीय नुकसान!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 04 Feb 2026 07:28 PM IST
सार

पिछले दो साल से दस प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारियों का वेतन हड़पा जा रहा है। आठवें वेतन आयोग के लागू होने की उम्मीद भी दो साल बाद ही कर सकते हैं। ऐसे में चार साल तक कर्मियों को हर माह दस प्रतिशत वेतन का नुकसान उठाना पड़ेगा। सरकार ने डीए को मूल वेतन में मर्ज करने से इनकार कर दिया है। 

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8th CPC DA-DR Hike Expected, But 10 percent Financial Hit Looms for Govt Employees
8वां वेतन आयोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 केंद्र सरकार के कर्मियों और पेंशनरों के लिए इस माह के अंत में महंगाई भत्ते (डीए)/महंगाई राहत (डीआर) की घोषणा संभव है। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद होली से पहले यह घोषणा की जा सकती है। अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) की रिपोर्ट से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि इस बार डीए/डीआर की दरों में दो से तीन फीसदी की वृद्धि हो सकती है। इसके बाद डीए/डीआर की मौजूदा दर 58 से 60 प्रतिशत के पार चली जाएगी। नियम है कि जब डीए/डीआर की दर 50 के पार हो जाए तो उसे मूल वेतन और पेंशन में विलय कर दिया जाए। सरकार ने इस विलय के लिए मना कर दिया है। ऐसे में चार साल तक 49 लाख केंद्रीय कर्मियों व 69 लाख पेंशनरों को हर माह 10 प्रतिशत वित्तीय नुकसान होना संभावित है। 

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बता दें कि पहली जनवरी और पहली जुलाई से डीए/डीआर में बढ़ोतरी किए जाने का प्रावधान है। पिछले साल जुलाई में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) 146.5, अगस्त में 147.1, सितंबर में  147.3, अक्टूबर में 147.7, नवंबर में 148.2 और दिसंबर में भी 148.2 पर संकलित हुआ है। दिसंबर 2025 में मुद्रास्फीति दर 3.13 प्रतिशत रही है, जबकि नवंबर में यह दर 2.56 प्रतिशत थी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय, श्रम ब्यूरो, देश के 88 औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रों में फैले 317 बाजारों से एकत्रित खुदरा मूल्यों के आधार पर हर महीने औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) संकलित करता है। सामान्य तौर पर केंद्र सरकार, दो तीन महीने की देरी से यानी होली और दीवाली पर, डीए/डीआर की घोषणा करती है। 
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डीए/डीआर की दर जब पचास फीसदी के पार हो जाती है तो नियमानुसार उसे मूल वेतन और पेंशन में विलय करना चाहिए। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी संसद में कह चुके हैं कि सरकार, ऐसा कोई विलय नहीं करेगी। नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत' के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल कहते हैं कि ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार ने पहले ही कर्मचारियों का दस प्रतिशत पैसा हर माह बचा लिया है। पिछले दो साल से दस प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारियों का वेतन हड़पा जा रहा है। पेंशन भी हड़पी जा रही है। आठवें वेतन आयोग के लागू होने की उम्मीद भी दो साल बाद ही कर सकते हैं। ऐसे में चार साल तक कर्मियों को हर माह दस प्रतिशत वेतन का नुकसान उठाना पड़ रहा है। 
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बता दें कि एक जनवरी 2024 को डीए, पचास प्रतिशत हो चुका था। उसके बावजूद डीए को बेसिक वेतन में मर्ज नहीं किया गया। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें भी दो साल बाद ही लागू हो सकेंगी। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने गत वर्ष कैबिनेट सचिव को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने महंगाई भत्ता/महंगाई राहत यानी 'डीए/डीआर' की गणना का कैलकुलेटर बदलने की मांग की थी। डीए की दर तय करने के लिए 12 महीने के औसत को तीन महीने के औसत से बदला जाना चाहिए। मतलब, कर्मियों को परिवर्तनीय डीए दिया जाए। इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों को हर तीन महीने में वास्तविक मूल्य वृद्धि से मुआवजा मिल सकेगा।
 
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों का डीए इसी आधार पर तय होता है। इतना ही नहीं, केंद्रीय कर्मियों और पेंशनरों के लिए अलग से 'उपभोक्ता मूल्य सूचकांक' तैयार करने की मांग की गई है। यादव के अनुसार, बैंकिंग कर्मचारियों का डीए हर साल प्रत्येक तिमाही यानी फरवरी-अप्रैल, मई-जुलाई, अगस्त-अक्टूबर और नवंबर-जनवरी में संशोधित किया जाता है। यदि जनवरी में मूल्य वृद्धि हो रही है, तो इसकी आंशिक भरपाई 12 महीनों के बाद की जाती है। 


डीए की गणना और भुगतान छह महीने के बजाय हर तीन महीने में किया जाना चाहिए। कॉन्फेडरेशन महासचिव ने अपने पत्र में कहा था कि पॉइंट टू पॉइंट डीए प्रदान किया जाना चाहिए। अब डीए को न्यूनतम मूल्य पर राउंड ऑफ किया जाता है। जैसे हम 42.90% डीए के लिए पात्र हैं तो हमें केवल 42% डीए स्वीकृत किया जाता है। 0.9% डीए से केंद्रीय कर्मचारियों को छह महीने तक वंचित किया जाता है। केंद्र सरकार के कर्मियों को प्वाइंट-टू-प्वाइंट डीए प्रदान किया जाना चाहिए। बैंकों और एलआईसी के कर्मचारियों को प्वाइंट-टू-प्वाइंट डीए मिलता है। कर्मियों और पेंशनभोगियों के लिए अलग से उपभोक्ता सूचकांक का निर्माण करने की मांग की गई। 

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