{"_id":"6237b3c3453d2754db14fdaf","slug":"877-newborns-61-mothers-die-due-to-non-hospitalization-in-meghalaya","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेघालय : अस्पताल में भर्ती न होने से 877 नवजात, 61 माताओं की मौत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
मेघालय : अस्पताल में भर्ती न होने से 877 नवजात, 61 माताओं की मौत
Mon, 21 Mar 2022 04:37 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, शिलांग।
एजेंसी, शिलांग।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 21 Mar 2022 04:37 AM IST
सार
राज्य ने रिपोर्ट में कहा कि इसका कारण चिकित्सीय देखभाल का अभाव था। माताओं ने संक्रमण के डर से स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती होने और कोविड टेस्ट कराने से इनकार कर दिया था।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : Social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोविड महामारी के दौरान संक्रमण के डर से अस्पताल में भर्ती होने से इनकार करने से राज्य में 877 नवजात और 61 माताओं की मौत हो गई। मेघालय सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को भेजी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
विज्ञापन
महामारी के दौरान राज्य में मातृ-शिशु मृत्यु दर में बढ़ोतरी के संबंध में एनएचआरसी ने राज्य को पत्र लिखकर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी।
राज्य ने रिपोर्ट में कहा कि इसका कारण चिकित्सीय देखभाल का अभाव था। माताओं ने संक्रमण के डर से स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती होने और कोविड टेस्ट कराने से इनकार कर दिया था। जिस समय ये मौतें हुईं, उस समय कोविड संक्रमित और कोविड मुक्त मरीजों को अलग-अलग रखना जरूरी था।
विज्ञापन
महामारी को फैलने से रोकने के लिए खासकर अस्पतालों के वार्ड में जांच की जा रही थी। महिलाओं ने स्वास्थ्य केंद्र जाने से परहेज किया तो एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं ने घर जाकर उनके स्वास्थ्य पर निगरानी रखी और डिलीवरी के समय अस्पताल में भर्ती होने का अनुरोध दिया।
विज्ञापन
इस दौरान मौतों की बड़ी संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने बचाव अभियान शुरू किया। सभी गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण के लिए मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया गया।
राज्य प्रशासन के मुताबिक, कोविड के अलावा सामाजिक-आर्थिक और लैंगिक भेदभाव भी महिलाओं व नवजात की मौत की वजह बना। ज्यादा जोखिम वाली सभी गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया गया। उनमें से किसी को भी घर पर प्रसव की इजाजत नहीं दी गई। डिलीवरी से कम से कम दो सप्ताह पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती होने को कहा गया।