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खोज: अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे 85 नई झीलों का पता चला, समुद्र स्तर वृद्धि के पूर्वानुमान में बड़ा बदलाव संभव
Sun, 28 Sep 2025 05:56 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 28 Sep 2025 05:56 AM IST
सार
क्रायोसैट से 2010 से 2020 तक इकट्ठा किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने पाया कि ये झीलें समय-समय पर भरती और खाली होती रहती हैं। जब झीलें भरती हैं तो बर्फ की सतह ऊपर उठ जाती है और खाली होने पर सतह नीचे धंस जाती है।
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अंटार्कटिका (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
अंटार्कटिका की बर्फ की मोटी चादर के नीचे छुपी 85 नई उपग्लेशियल झीलों का पता चला है। इस खोज के बाद अब ज्ञात सक्रिय उपग्लेशियल झीलों की संख्या बढ़कर 231 हो गई है। ये झीलें बर्फ के कई किलोमीटर नीचे मौजूद हैं और अंटार्कटिका की विशाल बर्फ-चादर के भीतर फैले पानी के जटिल नेटवर्क का हिस्सा मानी जाती हैं। वैज्ञानिकों ने यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के क्रायोसैट उपग्रह की मदद से यह खोज की है।
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क्रायोसैट से 2010 से 2020 तक इकट्ठा किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने पाया कि ये झीलें समय-समय पर भरती और खाली होती रहती हैं। जब झीलें भरती हैं तो बर्फ की सतह ऊपर उठ जाती है और खाली होने पर सतह नीचे धंस जाती है। इससे बर्फ और चट्टान के बीच घर्षण कम होता है, जिसके कारण ग्लेशियर तेजी से समुद्र की ओर खिसक सकते हैं। यही प्रक्रिया भविष्य में समुद्र स्तर वृद्धि को और तेज कर सकती है।
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पांच नए उपग्लेशियल झील नेटवर्क की भी हुई पहचान
शोधकर्ताओं ने पांच नए आपस में जुड़े उपग्लेशियल झील नेटवर्क की भी पहचान की है। ये नेटवर्क दिखाते हैं कि बर्फ के नीचे पानी का बहाव पहले की अपेक्षा कहीं अधिक गतिशील और जटिल है। इस खोज से यह भी स्पष्ट हुआ कि अंटार्कटिका का हाइड्रोलॉजिकल सिस्टम एक परस्पर जुड़ा हुआ तंत्र है, जो ग्लेशियरों की गति को सीधे प्रभावित करता है। नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, अब तक केवल 36 उपग्लेशियल झीलों के पूरे भरण-क्षरण चक्र दर्ज किए गए थे, जबकि इस शोध में 12 और नए चक्र सामने आए, जिससे कुल संख्या 48 हो गई। यह नई जानकारी भविष्य में समुद्र स्तर वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के सटीक पूर्वानुमान में मदद करेगी।
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उपग्लेशियल झीलें क्या हैं
उपग्लेशियल झीलें वे जलाशय हैं जो अंटार्कटिका की बर्फ की मोटी परत के नीचे मौजूद होती हैं। इन झीलों का पानी मुख्य रूप से पृथ्वी की गहराई से आने वाली गर्माहट (भूगर्भीय ऊष्मा), बर्फ और चट्टानों के बीच के घर्षण, तथा अत्यधिक दबाव के कारण पिघली हुई बर्फ से बनता है। बर्फ के नीचे झीलें इस तरह बनती हैं। पृथ्वी की सतह के नीचे लगातार ऊष्मा निकलती रहती है।
- यह ऊष्मा अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों में मोटी बर्फ की चादर के नीचे तक पहुंच जाती है। जब यह ऊष्मा निचली परतों तक पहुंचती है तो वहां मौजूद बर्फ धीरे-धीरे पिघलने लगती है और पानी का निर्माण होता है। ग्लेशियर लगातार गति करते रहते हैं और उनका निचला हिस्सा चट्टानों से रगड़ खाता है। इस घर्षण से ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे निचली परतों की बर्फ पिघलकर पानी का रूप ले लेती है। यही पानी बाद में उपग्लेशियल झीलों के बनने की प्रक्रिया को तेज करता है।