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Study: '82 फीसदी मामलों में कुत्तों का व्यवहार दोस्ताना या तटस्थ', सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच शोध में खुलासा

Wed, 13 Aug 2025 07:03 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 13 Aug 2025 07:03 PM IST
सार

Study: आवारा कुत्तों और जन स्वास्थ्य पर किए गए एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में कुत्तों के साथ इंसानों का आमना-सामना शांतिपूर्ण होता है। केवल दो फीसदी मामलों में ही कुत्तों की आक्रामकता देखी गई। 

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82% human-street dog encounters in India 'peaceful', research finds amid SC order
कुत्ते - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत में इंसानों और आवारा कुत्तों के बीच ज्यादातर आमना-सामना शांतिपूर्ण होता है। गली के कुत्तों और जन स्वास्थ्य पर एडिनबरा विश्वविद्यालय की ओर से किए गए एक शोध किया गया। इस शोध के मुताबिक, 82 फीसदी मामलों में कुत्तों का व्यवहार दोस्ताना होता है या फिर तटस्थ। केवल दो फीसदी मामलों में ही भौंकने, दौड़ाने या काटने जैसी आक्रामकता देखी गई। 
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कुत्तों को दिल्ली-एनसीआर से हटाने का दिया आदेश
यह अध्ययन ऐसे समय में आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें आश्रय गृहों में भेजने का आदेश दिया है। शीर्ष कोर्ट का यह फैसला कुत्तों को के काटने और रेबीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए आया। 
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कुत्ते हटाने से स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ेगा असर
प्रोफेसर कृतिक श्रीनिवासन के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया है। इसमें चेतावनी दी गई है है कि अगर आवारा कुत्तों को मारा गया या बड़े पैमाने पर हटाया गया, तो इससे अब तक की स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई प्रगति पर असर पड़ सकता है। 

भारत में इंसानों में रेबीज के मामले 75 फीसदी घटे
भारत में इंसानों में रेबीज के मामले बीते बीस वर्षों में करीब 75 फीसदी घटे हैं। 2005 में जहां 274 मामले सामने आए थे। वहीं, 2022 में यह संख्या घटकर 34 रह गई। यह गिरावट मुख्य रूप से कुत्तों के सामूहिक टीकाकरण और बेहतर उपचार की वजह से आई है। हालांकि, अभी भी समय पर उपचार मिलना और टीकाकरण का पूरा कोर्स लेना एक चुनौती बनी हुई है। 

दूसरे खतरनाक जानवर भर सकते हैं खाली जगह
श्रीनिवासन ने यह भी कहा कि जब किसी इलाके से कुत्तों को हटाया जाता है तो वहां नए कुत्ते आ जाते हैं। इससे और परेशानी बढ़ सकती है। कभी-कभी इन खाली जगहों को दूसरे खतरनाक जानवर भी भर सकते हैं। 2022-23 में किए गए एक सर्वे के अनुसार, भारत के 15 राज्यों में हर 1,000 लोगों में से 4.7 को कुत्तों ने काटा। यह आंकड़ा ब्रिटेन के चेशायर इलाके (18.7 प्रति 1,000) से कहीं कम है।


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कुत्तों के टीकाकरण के पक्ष में 86 फीसदी लोग- सर्वे
चेन्नई, जयपुर और केरल के मलप्पुरम में कराए गए एक सर्वे में पाया गया कि 86 फीसदी लोग कुत्तों के टीकाकरण के पक्ष में थे और 66 फीसदी लोग नसबंदी के समर्थन में थे। वहीं, 70 फीसदी से ज्यादा लोग कुत्तों को मारने के खिलाफ थे। यह विरोध उन लोगों में और भी ज्यादा था, जिन्हें कभी कुत्ते ने दौड़ाया या काटा था, इनमें से 77 फीसदी लोग भी कुत्तों को मारने के खिलाफ थे।

लंबे समय तक कारगर नहीं कुत्तों को हटाने की नीति
शोध में सुझाव दिया गया है कि समस्या का हल वैज्ञानिक और समुदाय-आधारित तरीके से निकाला जाए। इसके तहत सभी को मुफ्त और समय पर उपचार मिले, टीकाकरण अभियान लगातार चलें, खाने की बर्बादी पर रोक लगे, लोगों को जागरूक किया जाए और जो लोग कुत्तों की देखभाल करते हैं, वे जिम्मेदारी से पेश आएं। शोध में चेतावनी दी गई है कि कुत्तों को हटाने जैसी नीतियां जल्दी समाधान जैसी लग सकती हैं, लेकिन वे लंबे समय तक सुरक्षा नहीं दे पातीं।


  
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