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सीआरपीएफ: जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी, 80 हजार कर्मी मरने के बाद करेंगे अंगदान

Fri, 27 Nov 2020 07:30 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 27 Nov 2020 07:30 PM IST
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80 thousand CRPF personnel will donate organs after death
Dr Harsh Vardhan - फोटो : Amar Ujala

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' ने 'जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी' वाली पंक्तियों को सही साबित कर दिया है। कश्मीर, नक्सल, उत्तर पूर्व और देश के दूसरे हिस्सों में रोजाना ही अपनी विभिन्न ड्यूटी के जरिए लोगों की जान बचाने वाले बल 'सीआरपीएफ' के 80 हजार कर्मियों ने मरने के बाद अंगदान करने का निर्णय लिया है। इस अभियान में इन कर्मियों के परिजन भी शामिल हैं। खास बात ये है कि सीआरपीएफ ने अस्सी हजार का बड़ा आंकड़ा छूने के लिए कई साल नहीं लगाए, बल्कि साढ़े तीन माह में यह लक्ष्य पूरा कर लिया है। शुक्रवार को राष्ट्रीय अंगदान दिवस के मौके पर एक वेबिनार के जरिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सीआरपीएफ कर्मियों का उत्साहवर्धन किया।

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सीआरपीएफ ने यह अभियान ओआरबीओ व एम्स के साथ मिलकर गत 15 अगस्त को शुरू किया था। अंगदान के लिए प्रेरित करने वाले अभियान का नाम ई-संजीवनी रखा गया। डीजी डॉ. एपी महेश्वरी ने सभी अधिकारियों, जवानों और उनके परिजनों से अपील की थी कि वे अंगदान जैसे महान कार्य के लिए आगे आएं। वह अपील काम कर गई और अस्सी हजार कर्मी अंगदान के लिए तैयार हो गए। इस बाबत तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। जिस कर्मी या उसके परिवार के सदस्य ने अंगदान करने वाला फार्म भरा है, इस दुनिया से विदा होने के बाद उनका शरीर संबंधित चिकित्सा संस्थान को सौंप दिया जाएगा।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, सीआरपीएफ के कर्मियों ने बहुत साहसिक निर्णय लिया है। दूसरे लोग भी सीआरपीएफ से प्रभावित होकर इन कर्मियों के मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे। इस बल का यह कदम दूसरों के लिए भी प्रोत्साहन का काम करेगा। डीजी डॉ. महेश्वरी ने कहा, हमारे कर्मी किसी भी विकट परिस्थिति में देश सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। वे केवल फोर्स की चुनौतीपूर्ण ड्यूटी ही नहीं करते, बल्कि अनेक मानवीय कार्यों में भी आगे हैं। बल कर्मी, अपने नागरिकों की मदद करने के लिए कर्तव्य की सीमा से परे चले जाते हैं। अंगदान के इस अभियान में कर्मचारी आंखें, त्वचा, फेफड़े, हृदय, यकृत, अग्न्याशय, गुर्दे, हृदय के वाल्व, आंत और रक्त वाहिकाओं के दान की प्रतिज्ञा कर सकते हैं।

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