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अब बांधों पर सूखे का संकट, 13 बांधों में से 8 सूखे, पांच में नाममात्र पानी

Sun, 24 Apr 2016 10:24 AM IST
रशीद सिद्दकी, नईमुर्रहमान/अमर उजाला, बांदा
रशीद सिद्दकी, नईमुर्रहमान/अमर उजाला, बांदा Updated Sun, 24 Apr 2016 10:24 AM IST
सार

  • अर्जुन बांध में बचा केवल चार फीसदी पानी चरखारी के लिए सुरक्षित
  • रनगवां में सुरक्षित किए गए चार फीसदी पानी से भरे जाएंगे तालाब
  • बांध के बचेखुचे पानी से पहली मई से चलाई जाएंगी बांदा की नहरें

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8 dams have dried up out of 13 in bundelkhand
बांधों पर सूखे का संकट - फोटो : amar ujala bureau

विस्तार

सूखे की काला छाया अब बुंदेलखंड के 13 बांधों पर पड़ी है। चित्रकूटधाम मंडल के 13 बांधों में आठ सूख चुके हैं। पांच में नाममात्र का पानी रह गया है। आमतौर पर मई, जून में सूखने वाले बांध अप्रैल में ही पानी से खाली हो गए हैं। रनगवां और अर्जुन बांध में चार-चार फीसदी पानी सुरक्षित रखा गया है। रनगवां के पानी से पहली मई से केन नहर चालू करके पशुओं के लिए पोखर और तालाब भरे जाएंगे। अर्जुन बांध का पानी चरखारी (महोबा) में पीने के लिए सुरक्षित किया गया है।
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चित्रकूटधाम मंडल के तीन जिलों में कुल 13 बांध हैं। मंडल के हमीरपुर जिले में कोई बांध नहीं है। महोबा को छोड़कर अन्य जिलों में बांधों से सिर्फ सिंचाई और तालाब भरे जाते हैं। इन बांधों में बांदा जिले को पानी उपलब्ध कराने वाले गंगऊ, रनगवां और बरियारपुर मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में हैं। इनकी देखरेख आदि सारे कार्यों का जिम्मा बांदा प्रशासन पर ही है। चित्रकूट में ओहन, बरुआ, गुंता और रसिन बांध हैं। महोबा में अर्जुन, चंद्रावल, कबरई, मझगवां, उर्मिल और मौदहा बांध हैं। इनमें गंगऊ, रनगवां, ओहन, रसिन और अर्जुन बांधों में ही पानी बचा है।
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मंडल के कुछ बांधों को छोड़कर ज्यादातर बांध बारिश न होने पर जून माह में सूख जाते थे। आमतौर पर अप्रैल तक जल स्तर इतना होता था कि कई बार नहरें चलाकर तालाब भर दिए जाएं, ताकि पशुओं को पीने का पानी मयस्सर हो सके। लेकिन अबकी हालात एकदम बदले हुए हैं। हालत यह है कि पांच बांधों की तलहटी में ही पानी बचा है। गंगऊ, रनगवां (छतरपुर) और अर्जुन बांध (महोबा) में सिर्फ 4-4 प्रतिशत पानी है, जबकि ओहन (चित्रकूट) बांध में मात्र एक फीसदी पानी है।
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मई में पानी से पूरी तरह खाली हो जाएगा बांध

8 dams have dried up out of 13 in bundelkhand
मई में पानी से पूरी तरह खाली हो जाएगा बांध
बांधों में पानी के संकट ने सबसे ज्यादा महोबा जिले को प्रभावित किया है। यहां मात्र अर्जुन बांध में सिर्फ 2.40 मिलियन घन मीटर (4 प्रतिशत) पानी बचा है। सिंचाई विभाग ने इस पानी को सुरक्षित कर लिया है, ताकि जरूरत पड़ने पर चरखारी नगर में पेयजल की आपूर्ति की जा सके। अन्य बांध चंद्रावल, कबरई, मझगवां, उर्मिल और मौदहा में पानी खत्म (डेड स्टोरेज) हो गया है। बांदा में सिंचाई विभाग ने पशुओं की प्यास से मौत बचाने के लिए रनगवां बांध में उपलब्ध मात्र 5.72 मिलियन घन मीटर (4 प्रतिशत) पानी तालाब और पोखर भरने के लिए सुरक्षित कर रखा है।

पहली मई से नहर चलाकर यह पानी भी तालाब, पोखरों तक पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद बांध पानी से पूरी तरह खाली हो जाएगा। बारिश में ही बाध भरेगा। अधीक्षण अभियंता ने बांधों की स्थिति से शासन और बड़े अधिकारियों को अवगत करा दिया है। महोबा के सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता विशंभर सिंह का कहना है कि अर्जुन बांध से जून तक पेयजल की आपूर्ति होती रहेगी। बाद में पानी की स्थिति को देखकर फैसला लिया जाएगा।

बांध ---------- उपलब्ध पानी (मिलियन घन मीटर)---------- प्रतिशत
गंगऊ (छतरपुर) ---------- 2.27 ---------- 4 प्रतिशत
रनगवां (छतरपुर) ---------- 5.72 ---------- 4 प्रतिशत
ओहन (चित्रकूट) ---------- 0.51 ---------- 1 प्रतिशत
रसिन (चित्रकूट) ---------- 0.47 ---------- 3 प्रतिशत
अर्जुन (महोबा) ---------- 2.40 ---------- 4 प्रतिशत

महोबा जिले में संकट ज्यादा
जिले में 875 जलाशय हैं। इसमें 95 फीसदी सूख चुके हैं। जो बचे हैं, उसमें पीने लायक पानी नहीं है। इसमें मदन सागर जलाशय से महोबा शहर को पानी मिलता था। करीब दो माह पहले जलाशय से जलापूर्ति बंद कर दी गई है। अब एकमात्र विकल्प उर्मिल बांध का पानी है। बेला सागर जलाशय से बेलाताल, मुढ़ारी, कुलपहाड़ कस्बे सहित आसपास के दर्जन भर से अधिक गांवों में जलापूर्ति की जाती थी।

इन गांवों में अब एक मात्र विकल्प हैंडपंप हैं, जो दोपहर में पानी देना बंद कर देते हैं। रैपुरा जलाशय से रैपुरा गांव में जलापूर्ति की जाती थी। अब यहां ग्राम पेयजल समूह योजना के तहत बिछी पाइप लाइन का भरोसा है। इसी तरह जिले में 19 हजार कुएं हैं। इनमें 90 फीसदी सूख चुके हैं। जिले में 6500 हैंडपंप लगे हैं। अप्रैल के पहले सप्ताह में इनमें करीब चार हजार हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। जिले में 418 चेकडैम हैं। इनमें पानी होने से जलस्तर बरकरार रहता है लेकिन इस साल सभी चेकडैम भी पूरी तरह सूख गए हैं।
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