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आठ साल में 750 बाघों की मौत, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बाघों की जान गई

Thu, 04 Jun 2020 05:46 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rohit Ojha Updated Thu, 04 Jun 2020 05:46 PM IST
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750 tigers killed in last eight years in India maximum deaths in Madhya Pradesh and Maharashtra
बंगाल टाइगर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

भारत में पिछले आठ साल में शिकार और अन्य कारणों से 750 बाघ मारे गए हैं। मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 173 बाघों की मौत हुई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।

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इसने कहा कि इन बाघों में से 369 की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई और 168 बाघों की मौत शिकारियों द्वारा शिकार किए जाने की वजह से हुई। 70 मौतों के बारे में अभी जांच चल रही है, जबकि 42 बाघों की मौत दुर्घटना और संघर्ष की घटनाओं जैसे अप्राकृतिक कारणों से हुई।
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एनटीसीए ने बताया कि 2012 से 2019 तक आठ साल की अवधि के दौरान देशभर में 101 बाघों के अवशेष भी बरामद हुए। इससे 2010 से मई 2020 तक हुई बाघों की मौतों का विवरण साझा करने का आग्रह किया गया था। हालांकि, इसने 2012 से लेकर आठ साल की अवधि का ब्यौरा ही उपलब्ध कराया।
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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिसंबर में कहा था कि देश में पिछले चार साल में बाघों की संख्या में 750 की वृद्धि हुई और कुल बाघों की संख्या 2,226 से बढ़कर 2,976 हो गई है। जावड़ेकर ने राज्यसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा था कि  अब बाघों की संख्या 2,976 है। हमें अपनी संपूर्ण पारिस्थितिकी पर गर्व होना चाहिए। पिछले चार साल में बाघों की संख्या में 750 की वृद्धि हुई है। 

मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 173 बाघों की मौत हुई

एनटीसीए द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पिछले आठ साल में मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 173 बाघों की मौत हुई। इनमें से 38 बाघों की मौत शिकार की वजह से, 94 बाघों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई और 19 बाघों की मौत का मामला अभी जांच के दायरे में है। छह बाघों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई और 16 अवशेष भी मिले।

मध्यप्रदेश में देश में सर्वाधिक 526 बाघ हैं। प्राप्त सूचना के अनुसार, पिछले आठ साल में बाघों की मौत के मामले में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहा जहां 125 बाघों की मौत हुई। इसके बाद कर्नाटक में 111, उत्तराखंड में 88, तमिलनाडु में 54, असम में 54, केरल में 35, उत्तर प्रदेश में 35, राजस्थान में 17, बिहार और पश्चिम बंगाल में 11 तथा छत्तीसगढ़ में 10 बाघों की मौत हुई है। एनटीसीए ने कहा कि इस अवधि में ओडिशा और आंध्र प्रदेश में सात-सात, तेलंगाना में पांच, दिल्ली और नगालैंड में एक-एक, आंध्र प्रदेश, हरियाणा तथा गुजरात में एक-एक बाघ की मौत हुई है।



इसने शिकार की वजह से बाघों की मौत का विवरण साझा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में 28-28 बाघ शिकार की वजह से मारे गए। असम में 17, उत्तराखंड में 14, उत्तर प्रदेश में 12, तमिलनाडु में 11, केरल में छह और राजस्थान में तीन बाघों की मौत शिकार की वजह से हुई। एनटीसीए ने आरटीआई आवेदन के जवाब में शिकार के चलते बाघों की मौत के मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी नहीं दी।

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