चेन्नई : सात साल के बच्चे के मुंह से निकाले गए 526 दांत, डॉक्टर भी रह गए हैरान
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चिकित्सा विज्ञान के एक अनूठे मामले में चेन्नई के चिकित्सकों ने सात वर्षीय बच्चे के जबड़े से 526 दांत निकाले हैं। इस बालक रविंद्रन को जबड़े के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। उसके परिजनों को लग रहा था कि शायद उसका कोई दांत खराब है। चिकित्सकों के अनुसार वह दुर्लभ किस्म के ‘कंपाउंड कंपोजिट ओडोन्टोमा’ से प्रभावित था। खास बात है कि यह दांत बाहर से कभी नजर नहीं आते थे।
रविंद्रन की यह सर्जरी 11 जुलाई को की गई और तीन दिन अस्पताल में रखा गया। सर्जरी करने वाले सविथा डेंटल कॉलेज व अस्पताल के चिकित्सक सेंथिलनाथन ने बताया कि बच्चे के निचले जबड़े में काफी सूजन थी। सीटी स्कैन में एक बड़ा घाव व कुछ ठोस संरचनाएं भी मिलीं। ऐसे में सर्जरी का निर्णय लिया गया। सर्जरी के समय चिकित्सकों ने पाया कि उसके जबड़े में एक बैग जैसा बना है। उसे जबड़े से निकाला गया।
इसमें मिली ठोस संरचनाओं की जांच की गई। यह संरचनाएं रेडियोपेक (जिसे एक्स-रे पार नहीं कर सकती) श्रेणी की थीं। विस्तृत जांच में साबित हुआ कि यह दांत ही हैं। बैग से 526 दांत निकले। डॉ. प्रतिभा रमानी के अनुसार इनका आकार 0.1 एमएम से 15 एमएम तक है। इन्हें निकालने में दो घंटे लगे। पैथालॉजिस्टों ने इसे सीप में मिले गई मोतियों की संज्ञा दी है क्योंकि सभी में क्राउन, रूट और एनामेल की परत है। यह सर्जरी पांच घंटे चली।
तीन साल की उम्र से थी सूजन
रविंद्रन के पिता एस प्रभुदोस एक कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव हैं। उन्होंने बताया कि तीन वर्ष की उम्र में ही उसके जबड़े में सूजन दिखने लगी थी। इसकी कभी जांच नहीं करवाई गई, क्योंकि वह जांच करते समय सहयोग नहीं करता था। इस बार भी सर्जरी के पहले चिकित्सकों और पीजी विद्यार्थियों ने कई घंटे उससे बातचीत कर उसे सर्जरी के लिए राजी किया।
विश्व में पहला मामला
चिकित्सकों के अनुसार यह विश्व का पहला ज्ञात मामला है, जिसमें एक व्यक्ति के मुंह से इतने दांत मिले। इससे पहले मुंबई में एक किशोर के मुंह से 2014 में चिकित्सकों ने 232 दांत निकाले थे। मौजूदा मामले में जबड़े में मिले बैग को पूरी तरह बाहर निकालना सही निर्णय रहा, वरना ऑपरेशन टेबल पर अगर उसे खोला जाता तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी, सर्जरी भी जटिल हो जाती।
अनुमान : मोबाइल रेडिएशन या अनुवांशिक
चिकित्सकों के अनुसार वे इस ‘कंपाउंड कंपोजिट ओडोन्टोमा’ मामले की पुख्ता वजह नहीं बता सकते। हालांकि अनुमान है कि यह मोबाइल टावर रेडिएशन की वजह से हो सकता है। उन्होंने संस्थान द्वारा 250 लोगों पर करवाए जा रहे एक शोध का हवाला दिया जो मोबाइल टावर के निकट रहते हैं। इनमें से 10 प्रतिशत की कुछ कोशिकाओं में बदलाव देखने को मिले हैं। वे इस क्षेत्र में विस्तृत अध्ययन की जरूरत बताते हैं। वहीं अनुवांशिक वजहों से भी ऐसी अप्राकृतिक वृद्धि हो सकती है।
अब भी बचे हैं 21 दांत
चिकित्सकों ने बताया कि बालक की सर्जरी सही समय पर हुई। अब उसके 21 दांत बचे हैं। दो दाढ़ें नहीं आ सकेंगी, जिसके लिए उसे 16 वर्ष की उम्र में अलग से लगवाने का सुझाव दिया है।