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RG Kar Case: अस्पताल के 50 डॉक्टरों का इस्तीफा, TMC बोली- ब्लैकमेल का प्रयास; राज्यपाल ने इंसाफ का भरोसा दिया

Tue, 08 Oct 2024 04:32 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 08 Oct 2024 04:32 PM IST
सार

West Bengal: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के करीब पचास वरिष्ठ डॉक्टरों ने आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों के साथ एकजुटता जताते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है। एक बैठक में डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा का फैसला लिया। 

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50 senior doctors of RG Kar hospital resign in solidarity with medics on fast
डॉक्टर की हत्या और दुष्कर्म के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के करीब पचास वरिष्ठ डॉक्टरों ने पद से इस्तीफा दे दिया है। इन डॉक्टरों ने यह कदम जूनियर डॉक्टरों के साथ एकजुटता जताने के लिए उठाया है। जूनियर डॉक्टर एक महिला डॉक्टर की हत्या और दुष्कर्म के मामले में न्याय की मांग करते हुए अनशन पर हैं। स्वास्थ्य संकाय के सूत्रों ने यह जानकारी दी। 

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इन वरिष्ठ डॉक्टरो ने यह फैसला अस्पताल के विभिन्न विभागों के प्रमुखों की एक बैठक में लिया। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया, हमारे अस्पताल के सभी 50 वरिष्ठ डॉक्टरों ने आज की बैठक में सामूहिक रूप से इस्तीफे पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया। यह कदम उन युवा डॉक्टरों के प्रति हमारी एकजुटता का प्रतीक है, जो एक जरूरी मुद्दे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 
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उन्होंने बताया कि एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर भी आरजी कर अस्पताल के अपने सहयोगियों के नक्शेकदम पर चलने पर विचार कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों ने महिला डॉक्टर के मामले में न्याय की मांग के साथ-साथ स्वास्थ्य प्रणाली में भ्रष्टाचार के खिलाफ भी आवाज उठाई है। 

चार दिन से आमरण अनशन पर जूनियर डॉक्टर
इन वरिष्ठ डॉक्टरों की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर हैं, लेकिन मुद्दे को हल रने के लिए किसी उपयुक्त प्राधिकारी की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इन डॉक्टरों ने आमरण अनशन पर बैठे लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि वे परिसर में लोकतंत्र और मरीजों के अनुकूल प्रणाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बयान में कहा गया, इस स्थिति में हम एकजुट होकर उनके साथ खड़े रहेंगे। 

धरने पर बैठेंगे आरजी कर पीड़िता के माता-पिता, याद कर आंसू झर आए
इस बीच, आरजी कर मेडिकल कॉलेज की पीड़िता के माता-पिता भी मंगलवार शाम को धरने पर बैठे। पहले कहा गया था कि वे बुधवार से (षष्ठी से दशमी) तक धरने पर बैठेंगे लेकिन मंगलवार की शाम को पंचमी पर ही परिवार ने घर के सामने मंच पर बैठने का निर्णय लिया। पीड़िता के माता-पिता ने कहा, हम घर में रह नहीं पा रहे हैं। यहीं हम शोक की पूजा करेंगे। उल्लेखनीय है कि वे बेटी को न्याय मिले इसके लिए वे प्रदर्शनों में शामिल हो चुके हैं। जब कोलकाता के धर्मतला में जूनियर डॉक्टर न्याय की मांग के लिए आमरण अनशन पर बैठे हैं, तब वृद्ध दंपती ने अपने घर के सामने धरने पर बैठने का निर्णय लिया। 

उन्होंने बताया कि चाहने वाले कोई भी धरनास्थल पर आ सकते हैं, लेकिन मंच पर केवल रिश्तेदार रहेंगे। शाम को जब बेटी की याद में मोमबत्तियां जलाईं तो बेटी को याद करते हुए माता-पिता की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी के प्रयास से घर में दुर्गा पूजा होती थी। अब शायद ही कभी घर पर फिर पूजा हो। उन्होंने कहा, त्योहार के इन कुछ दिनों में घर में रहकर उन्हें सांस लेना भी मुश्किल लग रहा है। बेटी की बातें, पूजा के दिन बेटी की व्यस्तता की यादें बार-बार आ रही हैं। इसलिए घर के सामने मंच बनाकर उन्होंने बेटी के न्याय के लिए धरने पर बैठने का निर्णय लिया। यह धरना दशमी तक जारी रहेगा।

डॉक्टरों को न्याय दिलाया जाएगा: राज्यपाल सीवी आनंद बोस
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि देवी दुर्गा के नाम पर मैं भरोसे के साथ कहता हूं कि डॉक्टरों को न्याय दिलाने के लिए जो भी जरूरी है, वह सब किया जाएगा। बोस ने यह टिप्पणी उस समय की है, जब राज्य में डॉक्टर सुरक्षा और अपने हक की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने डॉक्टरों के साथ एकजुटता जताते हुए कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। बोस ने कहा, डॉक्टरों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हमें उनकी सुरक्षा और उनके हक की रक्षा करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। 


सरकार को सामूहिक इस्तीफों को स्वीकार करना चाहिए: कुणाल घोष
डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने कहा, सरकार बहुत जिम्मेदार और सहिष्णु है। डॉक्टर  ब्लैकमेल और मरीजों को परेशान करने की राजनीति कर रहे हैं। सरकार को जो करना होगा, वह करेगी। डॉक्टर सामूहिक रूप से इस्तीफे पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, वह वैध नहीं है। उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा देना चाहिए। उन्हें अपनी ड्यूटी से क्यों इस्तीफा देना चाहिए, उन्हें अपनी नौकरी से इस्तीफा देना चाहिए। सरकार को सभी इस्तीफों को स्वीकार करना चाहिए और नई भर्ती के लिए नोटिस जारी करना चाहिए। दुर्गा पूजा के दौरान इस तरह की अराजकता अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है। राज्य में बाढ़ की स्थिति में भी सीबीआई की ओर से आरोपपत्र दाखिल होने के बाद भी डॉक्टर जो कर रहे हैं, वह धमकी की संस्कृति और ब्लैकमेलिंग है। 
  
डॉक्टरों के इस्तीफे के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं
आरजी कर अस्पताल के 54 वरिष्ठ डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं। अस्पताल में डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सुनीत हजरा ने बताया कि इस्तीफे का मकसद राज्य सरकार पर दबाव बनाना है, जो जूनियर डॉक्टरों की भूख हड़ताल के दौरान चुप है। उन्होंने कहा, हमारा इस्तीफा प्रतीकात्मक है, जिसका मकसद सरकार को चर्चा के लिए प्रेरित करना है। 

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