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5 बहादुर युवकों ने बचाई वॉटर फाल में फंसे 40 की जान,पुलिस-सेना करते रहे पानी कम होने का इंतजार
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
Updated Fri, 17 Aug 2018 03:06 PM IST
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सुल्तानगढ़ झरना
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ग्वालियर के शिवपुरी में 15 अगस्त काे पिकनिक मनाने के लिए 50 से ज्यादा पर्यटक सुल्तानगढ़ वॉटर फाल पहुंचे और तेज धारा में फंस गये थे । बुधवार की देर रात से ही चलाये जा रहे बचाव कार्य में गुरुवार सुबह तक 40 लोगों को बचा लिया गया था। आश्चर्य की बात है कि पानी में बहे तीन युवक भी चमत्कारिक रूप से जिंदगी की जंग जीत गये और सकुशल किनारे पहुंच गए। सेना, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीमों को बचाव कार्य में लगाया गया है।
ग्वालियर से लगभग 70 किमी दूर शिवपुरी जिले के सुल्तानगढ़ वॉटर फाल में पिकनिक मना रहे 50 से ज्यादा पर्यटक बुधवार को नदी में अचानक बाढ़ आ जाने से चट्टानों के बीच फंसकर रह गए।पानी में बहते कई लोगों को फौरन निकाला गया लेकिन इनमें से नौ लोगों का दूसरे दिन भी पता नहीं चल सका।
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ग्वालियर से लगभग 70 किमी दूर शिवपुरी जिले के सुल्तानगढ़ वॉटर फाल में पिकनिक मना रहे 50 से ज्यादा पर्यटक बुधवार को नदी में अचानक बाढ़ आ जाने से चट्टानों के बीच फंसकर रह गए।पानी में बहते कई लोगों को फौरन निकाला गया लेकिन इनमें से नौ लोगों का दूसरे दिन भी पता नहीं चल सका।
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लेकिन इस बचाव अभियान के असली हिरो रहे वो बहादुर पांच जवान जिन्होने अपनी जान की परवाह ना करते हुए कई लोगों को जानलेवा धारा ने निकाल लिया।अंधेरा होने के कारण हेलीकाप्टर से जब देर रात मदद नहीं मिल सकी तो गांव के ही पांच युवकों ने अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी और 40 लोगों को सकुशल बचा लिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झरने में फंसे लोगों को बचाने वाले 5 लोगों को सम्मान निधि के रूप में 5-5 लाख रुपए देने की घोषणा की है।
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सुल्तानगढ़ झरना
11 घंटे 4 मिनट तक जिंदगी मौत के बीच 40 जाने फंसी रहीं और गांव के पांच युवक इनके लिए भगवान साबित हुए। झरने में पानी बढ़ने का खतरा फिर बढ़ रहा था जिसके वजह से प्रशासन की कोई टीम पानी में उतर नहीं पा रही थी। लेकिन गांव के बहादुर -निजाम खान,रामसेवक,भागीरथ ,कल्लन और देवेंद्र सिंह ने मिलकर एक-दूसरे की मदद से 33 लोगों को बाहर निकाल लिया।
बलराम भागीरथ और निजाम ने बताया कि मुझे झरने के अंदर की चट्टानों की जानकारी थी। फिर हमने कुछ देर ओर प्रशासन की टीम का इंतजार किया, लेकिन कोई आगे नहीं बढ़ा तो हम लोग ही पानी में पहुंच गए। प्रशासन का बचाव अभियान सुस्त पड़ता जा रहा था। प्रशासन हमें रोक रहा था हम उनसे दूर जाकर कम पानी वाली चट्टानों पर पैर जमाते हुए आगे बढ़े और लोगो को बचा लाए।
ये युवक पहले भी यहां लोगों की जान बचा चुके हैं।ऐसी खतरनाक स्थिति में ये कैसे ये कारनामा कर गये? ये पूछने पर इन्होने बताया 'हमने रस्से का सहारा लिया। रस्सा आगे फेंकते हुए आगे बढ़ते गए और चट्टान पर फंसे लोगों को रस्से के सहारे बाहर निकालते गए।'
देवेंद्र सिंह ने बताया कि जब पानी का बहाव कुछ तेज होता लगा तो अफसरों को बताए बिना पहले डाले गए रस्सों के सहारे चट्टान पर फंसे लोगों तक पहुंच गए और उन्हें बाहर निकाल लाए।
बलराम भागीरथ और निजाम ने बताया कि मुझे झरने के अंदर की चट्टानों की जानकारी थी। फिर हमने कुछ देर ओर प्रशासन की टीम का इंतजार किया, लेकिन कोई आगे नहीं बढ़ा तो हम लोग ही पानी में पहुंच गए। प्रशासन का बचाव अभियान सुस्त पड़ता जा रहा था। प्रशासन हमें रोक रहा था हम उनसे दूर जाकर कम पानी वाली चट्टानों पर पैर जमाते हुए आगे बढ़े और लोगो को बचा लाए।
ये युवक पहले भी यहां लोगों की जान बचा चुके हैं।ऐसी खतरनाक स्थिति में ये कैसे ये कारनामा कर गये? ये पूछने पर इन्होने बताया 'हमने रस्से का सहारा लिया। रस्सा आगे फेंकते हुए आगे बढ़ते गए और चट्टान पर फंसे लोगों को रस्से के सहारे बाहर निकालते गए।'
देवेंद्र सिंह ने बताया कि जब पानी का बहाव कुछ तेज होता लगा तो अफसरों को बताए बिना पहले डाले गए रस्सों के सहारे चट्टान पर फंसे लोगों तक पहुंच गए और उन्हें बाहर निकाल लाए।