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Overweight: आंगनबाड़ी केंद्रों में 43 लाख बच्चों का वजन जरूरत से ज्यादा; बचपन में ही बढ़ रहा मोटापा चिंताजनक
Sun, 17 Sep 2023 07:45 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 17 Sep 2023 07:45 PM IST
सार
आंकड़ों के मुताबिक, पता चला है कि 0-5 वर्ष की आयु वर्ग के 7,24,56,458 बच्चों को इस सर्वे में शामिल किया गया था। इनमें से लगभग छह प्रतिशत या 43,47,387 बच्चों को मोटापे या जरूरत से ज्यादा वजन के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
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मोटापा
- फोटो : Pixabay
विस्तार
देश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों के एक सर्वे में 0 से पांच साल की उम्र के बच्चों को लेकर एक चौंकानें वाला खुलासा हुआ है। इस सर्वे में पाया गया है कि इस उम्र सीमा के 43 लाख बच्चों में मोटापा पाया गया है। इतना ही नहीं, आधिकारिक आंकड़ों में यह भी दावा किया गया है कि सर्वे में शामिल किए गए कुल बच्चों का यह छह प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक, मोटे या अधिक वजन वाले बच्चों का प्रतिशत आंगनबाड़ियों में पाए जाने वाले गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों के लगभग समान ही है।
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बता दें कि इस सर्वे के लिए सरकार द्वारा संचालित ग्रामीण बाल देखभाल केंद्रों से और विकास निगरानी ऐप 'पोषण ट्रैकर' से आंकड़े इकट्ठे किए गए थे। इनसे प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, पता चला है कि 0-5 वर्ष की आयु वर्ग के 7,24,56,458 बच्चों को इस सर्वे में शामिल किया गया था। इनमें से लगभग छह प्रतिशत या 43,47,387 बच्चों को मोटापे या अधिक वजन के रूप में वर्गीकृत किया गया है। साथ ही सर्वे में यह भी पता चला है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित तेरह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मोटापे की दर राष्ट्रीय औसत छह प्रतिशत से अधिक है।
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बता दें कि हाल के सालों में छोटे बच्चों में बड़ी संख्या में मोटापा पाया गया है। यह चिंताजनक है। एनएचएफएस-4 (2015-16) और एनएफएचएस-5 (2019-2021) के आंकड़ों के मुताबिक, एनएफएचएस-4 की तुलना में एनएफएचएस-5 में अधिक वजन वाले पांच साल से कम उम्र के बच्चों के प्रतिशत में वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि पिछले साल शुरू हुए 'पोषण ट्रैकर' से पहले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के तहत डेटा एकत्र किया जाता था।
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एनएफएचएस-5 में इकट्ठे आंकड़ों में पाया गया कि मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पांच साल से कम उम्र के अधिक वजन वाले बच्चों का प्रतिशत सबसे ज्यादा है। इसके बाद सिक्किम और त्रिपुरा का स्थान है। वहीं, मध्य प्रदेश, बिहार और आंध्र प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के अधिक वजन वाले बच्चों का प्रतिशत सबसे कम है। वहीं तमिलनाडु और गोवा को छोड़कर हर राज्य में एनएफएचएस-5 में एनएफएचएस-4 की तुलना में पांच साल से कम उम्र के अधिक वजन वाले बच्चों के प्रतिशत में वृद्धि देखी गई है।
वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन से पता चला है कि बचपन का मोटापा दुनिया भर में एक गंभीर चिंता का विषय है। इस अध्ययन में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि तुरंत समाधान नहीं किया गया, तो भारत में बचपन के मोटापे में 2035 तक 9.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि देखी जा सकती है।