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Maratha Quota: जालना में हिंसक हुए मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर पुलिस की सख्ती, 360 से अधिक लोगों पर केस दर्ज

Sat, 02 Sep 2023 01:01 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 02 Sep 2023 01:01 PM IST
सार

आंदोलनकारी अपनी मांग पर आज भी अड़े हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार समुदाय को आरक्षण नहीं देती तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया।

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360 booked for violence over Maratha quota in Maharashtra's Jalna; agitators firm on continuing stir
मुंबई पुलिस (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

महाराष्ट्र के जालना जिले में मराठा आरक्षण के लिए हो रहा आंदोलन शुक्रवार को हिंसक हो गया था। इसमें पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए। वहीं, पुलिस ने घटना को लेकर 360 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसके अलावा हिंसा में कथित संलिप्तता में 16 की पहचान की गई है। 

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शनिवार को भी हिंसा का माहौल रहा। आज भी मराठा आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान पथराव हुआ और वाहनों को आग के हवाले किया गया। 


पुलिस ने लाठीचार्ज किया

इससे पहले शुक्रवार को, अंबाड तहसील में धुले-सोलापुर रोड पर अंतरवाली सराथी गांव में हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। ग्रामीणों ने दावा किया कि पुलिस ने हवा में गोलीबारी की लेकिन अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

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आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल

मनोज जारांगे के नेतृत्व में आंदोलनकारी मंगलवार से गांव में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे थे। राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय के लिए राज्य सरकार की ओर से दिए गए आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। हालांकि, स्थिति तब बिगड़ी जब डॉक्टरों की सलाह पर पुलिस ने जारांगे को अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की।

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वाहनों को निशाना बनाया

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आंदोलन शुक्रवार को हिंसक हो गया क्योंकि कुछ लोगों ने राज्य परिवहन की बसों और निजी वाहनों को निशाना बनाया। पथराव में पुलिस उपाधीक्षक सचिन सांगले सहित कम से कम 18 पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हो गए, जबकि अंतरवली सराथी में लाठीचार्ज में 20 प्रदर्शनकारी घायल हुए।

अपनी मांग पर अड़े आंदोलनकारी

वहीं, आज भी आंदोलनकारी अपनी मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार समुदाय को आरक्षण नहीं देती तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने उनके शांतिपूर्ण आंदोलन के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया और पूछा कि उन्होंने हवा में गोलियां क्यों चलाईं और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज क्यों किया।

पुलिस के मुताबिक, हिंसा में करीब 40 पुलिसकर्मी और कुछ अन्य लोग घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने कम से कम 15 राज्य परिवहन बसों और कुछ निजी वाहनों को आग लगा दी।

16 लोगों की हुई पहचान

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार को हिंसा में शामिल हुए 16 प्रदर्शनकारियों की पहचान कर ली गई है। वहीं, करीब 350 अन्य लोगों के खिलाफ जालना के गोंडी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। वहीं, गांव में पुलिस और राज्य रिजर्व पुलिस बल (एसआरपीएफ) की एक कंपनी तैनात है।

उच्च स्तरीय जांच के लिए समिति होगी गठित

जालना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) तुषार दोशी ने बताया कि कल की हिंसा में लगभग 40 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्लास्टिक की गोलियों और आंसू के गोले का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इस हिंसा को लेकर अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। हालांकि, अभी स्थिति नियंत्रण में है। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लोगों से शांति की अपील की। साथ ही उन्होंने हिंसा की उच्च स्तरीय जांच के लिए समिति गठित करने की घोषणा की। 

घायल आंदोलनकारियों से मिले राकांपा प्रमुख
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने जालना की अंबाड तहसील में एक दिन पहले पुलिस कार्रवाई में घायल हुए मराठा आरक्षण आंदोलनकारियों से शनिवार को मुलाकात की और आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा हटाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुवार और शुक्रवार को मुंबई में हुई विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की बैठक में जातिगत जनगणना के साथ-साथ कोटा सीमा को हटाने के मुद्दों पर चर्चा की गई।

पवार ने कहा कि आंदोलनकारियों ने उन्हें बताया कि उच्च अधिकारियों के फोन से धुले-सोलापुर मार्ग पर अंतरवाली सारथी में प्रदर्शन स्थल पर पुलिस का रवैया बदल गया और आंदोलन शांतिपूर्ण होने के बावजूद कार्रवाई की गई।



नासिक: आंदोलनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन
जालना में मराठा आरक्षण आंदोलनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ शनिवार को नासिक में बड़ी संख्या में संगठनों ने प्रदर्शन किया। संभाजी ब्रिगेड और स्वराज्य संगठन के नेतृत्व में यहां जिला कलेक्ट्रेट के सामने और चंदवाड़ और येओला जैसे इलाकों में प्रदर्शन हुए। उन्होंने जालना के पुलिस अधीक्षक को निलंबित करने के साथ-साथ मराठा आरक्षण मुद्दे के त्वरित समाधान की मांग की।

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