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नर्सरी तक भी नहीं जा पाते है भारत के 34 फीसदी मुस्लिम बच्चे
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 29 Jun 2016 07:38 PM IST
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मदरसा
- फोटो : getty images
भारत में तीन साल से छह साल की उम्र के कुल 7.4 करोड़ बच्चों में से करीब दो करोड़ बच्चे औपचारिक पढ़ाई शुरू करने से पहले प्री-स्कूल नहीं जा पाते। इनमें से ज्यादातर बच्चे निर्धन है और समाज के कमजोर वर्गों से आते हैं।
बच्चों के लिए काम करने वाली यूनाइटेड नेशंस की संस्था यूनिसेफ की एक रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड चिल्ड्रेन रिपोर्ट 2016’में यह खुलासा हुआ है। स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों में 34% मुस्लिम, 25.9% हिंदू, 25.6% ईसाई परिवारों के हैं।
भारत में यूनिसेफ के प्रतिनिधि लुई जॉर्जेस आर्सेनॉल्ट ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा स्कूल शुरू होने से पहले प्री स्कूल की औपचारिक शिक्षा से वंचित रहने का बच्चे की सीखने की क्षमता पर दूरगामी असर पड़ता है। प्री-स्कूल भेजे बिना जब बच्चों को सीधे प्राइमरी स्कूल में प्रवेश दिलाई जाती है, तो उनके जल्द ही स्कूल छोड़ने की आशंका बढ़ जाती है और वह अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं बन पाते।
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बच्चों के लिए काम करने वाली यूनाइटेड नेशंस की संस्था यूनिसेफ की एक रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड चिल्ड्रेन रिपोर्ट 2016’में यह खुलासा हुआ है। स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों में 34% मुस्लिम, 25.9% हिंदू, 25.6% ईसाई परिवारों के हैं।
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भारत में यूनिसेफ के प्रतिनिधि लुई जॉर्जेस आर्सेनॉल्ट ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा स्कूल शुरू होने से पहले प्री स्कूल की औपचारिक शिक्षा से वंचित रहने का बच्चे की सीखने की क्षमता पर दूरगामी असर पड़ता है। प्री-स्कूल भेजे बिना जब बच्चों को सीधे प्राइमरी स्कूल में प्रवेश दिलाई जाती है, तो उनके जल्द ही स्कूल छोड़ने की आशंका बढ़ जाती है और वह अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं बन पाते।
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क्या कहता है सरकार का सर्वे?
आर्सेनॉल्ट ने कहा कि सरकार द्वारा वर्ष 2014 में किए गए ‘नेशनल सर्वे फॉर एस्टिमेशन ऑफ आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रेन’ के अनुसार, 60 फीसदी से अधिक बच्चों ने तीसरी कक्षा पूरी करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। सर्वे में यह भी पाया गया कि सूचना का अधिकार कानून के लागू होने के बाद से बच्चों के बीच में ही पढ़ाई छोड़ने की दर में कमी आई है। 2014 में 6 से 13 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या 60 लाख थी। जबकि 2009 में यह 80 लाख थी।
नेशनल अचीवमेंट सर्वे (2014) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलता है। इसके मुताबिक पांचवी कक्षा तक के सिर्फ आधे से भी कम बच्चे पढ़ कर समझने के बाद सही जवाब दे पाते हैं और गणित के सवाल हल कर पाते हैं। जबकि इतने ही बच्चे मैथ्स के सवाल नहीं समझ पाते हैं। नई शिक्षा नीति में इन सब खामियों को दूर करने की उम्मीद जताई गई है।
Published by- Vikrant Singh
नेशनल अचीवमेंट सर्वे (2014) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलता है। इसके मुताबिक पांचवी कक्षा तक के सिर्फ आधे से भी कम बच्चे पढ़ कर समझने के बाद सही जवाब दे पाते हैं और गणित के सवाल हल कर पाते हैं। जबकि इतने ही बच्चे मैथ्स के सवाल नहीं समझ पाते हैं। नई शिक्षा नीति में इन सब खामियों को दूर करने की उम्मीद जताई गई है।
Published by- Vikrant Singh