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UPSC और MHA की टालमटोल में फंसे उम्मीदवार: CAPF में 330 भावी 'ग्राउंड कमांडरों’ की 'शादी और ट्रेनिंग’ में दिक्कत

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 01 Oct 2021 06:25 PM IST
सार

उम्मीदवारों ने बताया, उन्होंने यूपीएससी और केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया है। यूपीएससी की तरफ से जवाब मिला कि हमारा काम पूरा हो चुका है। ट्रेनिंग की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की है। पोर्टल पर जब यह शिकायत डाली गई तो गृह मंत्रालय से जवाब मिला कि इस बारे में यूपीएससी ही कुछ कर सकता है...

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330 candidates of Central Security Forces, CRPF, BSF, ITBP, CISF and SSB are waiting for the appointment letter for nine months
सीआरपीएफ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्रीय सुरक्षा बलों, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी के 330 भावी ग्राउंड कमांडर नौ माह से नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यूपीएससी ने भर्ती से संबंधित तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। सहायक कमांडेंट पद के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों का कहना है, अब तो 'शादी' में भी देरी हो रही है। लड़की वालों की तरफ से शादी का दबाव है, मगर लड़के के अभिभावक कहते हैं, ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ही शहनाई बजेगी। दूसरी बड़ी दिक्कत, ग्राउंड कमांडरों की ट्रेनिंग को लेकर है। उम्मीदवारों के मुताबिक, बहुत से अनुशंसित उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनकी आयु अब 27 साल हो गई है। जब उन्होंने 2019 में भर्ती का फार्म भरा था तो वे 25 साल के थे। अब तीन माह बाद यह साल भी खत्म हो जाएगा। शारीरिक ट्रेनिंग की एक 'प्राइम एज' निकल रही है। अधिक आयु में ट्रेनिंग के दौरान उम्मीदवारों को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। उम्मीदवार, जब नियुक्ति पत्र जारी न होने को लेकर यूपीएससी और केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूछते हैं तो वे मुद्दे को एक-दूसरे पर टाल देते हैं।

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संघ लोक सेवा आयोग 'यूपीएससी' द्वारा 24 अप्रैल 2019 को सीएपीएफ में सहायक कमांडेंट के पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। 330 पदों में से सीआरपीएफ में 108 पद, बीएसएफ में 100, एसएसबी में 66, आईटीबीपी में 28 और सीआईएसएफ में भी 28 पद भरे जाने हैं। लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा, मेडिकल जांच और साक्षात्कार, ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। अमर उजाला डॉट कॉम को भेजी गई ईमेल में इन उम्मीदवारों का कहना है कि 28 माह लंबी चयन प्रक्रिया के बाद भी उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया जा रहा है। यूपीएससी द्वारा पांच फरवरी 2021 को फाइनल रिजल्ट जारी किया था। तब से लेकर अभी तक उम्मीदवार, नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मोबाइल फोन पर हुई बातचीत में अनुशंसित उम्मीदवारों ने कहा, उनका हौसला अब जवाब देता जा रहा है।

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'सामने फल तो रखा है, लेकिन हम उसे खा नहीं सकते'

कई उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है। रिजल्ट आने के बाद उनके परिवार को यह आस बंधी थी कि अब उनकी दिक्कतें दूर हो जाएंगी। उम्मीदवारों के मुताबिक, हम यहां पर नाम का खुलासा नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमारे कई साथी ऐसे हैं, जिनकी पढ़ाई लिखाई लोन पर हुई है। ऐसे में उन्हें जल्दी सहारा मिलना आवश्यक है। हमारी स्थिति ऐसी हो चली है कि सामने फल तो रखा है, लेकिन हम उसे खा नहीं सकते। शारीरिक ट्रेनिंग की उम्र निकलती जा रही है। हमें मालूम हुआ है कि ज्यादा आयु में शारीरिक ट्रेनिंग के दौरान कई तरह की दिक्कतें आने लगती हैं। 25 साल और 28 साल की आयु के दौरान शारीरिक ट्रेनिंग में फर्क नजर आता है। ट्रेनिंग के बाद कई वर्षों तक हार्ड पोस्टिंग मिलती है। वहां भी दिक्कतें आ सकती हैं। अधिक आयु में ट्रेनिंग होगी तो उसके फाइनल में कई उम्मीदवार पीछे रह जाते हैं। वे किसी बीमारी का शिकार होकर भर्ती प्रक्रिया से बाहर भी हो सकते हैं।

उम्मीदवारों ने डाली आरटीआई

उम्मीदवारों ने बताया, उन्होंने यूपीएससी और केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया है। यूपीएससी की तरफ से जवाब मिला कि हमारा काम पूरा हो चुका है। ट्रेनिंग की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की है। पोर्टल पर जब यह शिकायत डाली गई तो गृह मंत्रालय से जवाब मिला कि इस बारे में यूपीएससी ही कुछ कर सकता है। कई आवेदकों ने नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर आरटीआई डाली है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और यूपीएससी, ये दोनों एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर अपने गले से फांस निकाल रहे हैं। इन्हें भावी ग्राउंड कमांडरों की कोई चिंता नहीं है।

देश की सुरक्षा मोर्चे पर खड़ा होने से पहले ही इन उम्मीदवारों के कदमों को लड़खड़ाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कई उम्मीदवारों का कहना है कि वे दूसरी जॉब के बारे में सोचने लगे हैं। नियुक्ति पत्र न मिलने के कारण उनमें नकारात्मक भावना पैदा हो रही है। इनका कहना है कि उन्होंने देश सेवा के लिए सीएपीएफ में भर्ती होने का जज्बा पाला था। अब सरकार उस जज़्बे को आगे बढ़ाने की बजाए तोड़ने में लगी है। इस बाबत केंद्रीय सुरक्षा बलों के एक अधिकारी ने कहा, अभी ऐसा संभाावित है कि ट्रेनिंग सेंटरों पर पहले वाले बैच की ट्रेनिंग चल रही हो। सीआरपीएफ और बीएसएफ में पासिंग आउट परेड बाकी है। एसएसबी व आईटीबीपी में ट्रेनिंग सेंटर खाली हैं। ऐसी परिस्थितियों में नए बैच की ट्रेनिंग का शेड्यूल तैयार होने में अभी एक दो माह लग सकते हैं।

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