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देश के बड़े बैंक में 321 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Thu, 11 Aug 2016 04:40 AM IST
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सीबीआई ने इंडियन ओवरसीज बैंक के अधिकारियों और कारोबारियों के बीच सांठगांठ वाले एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया है जिसने बैंक की ओर से फर्जी गारंटी का इस्तेमाल कर हांगकांग की एक कंपनी में 321 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इस मामले में कई लोगों और कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एजेंसी ने इनमें से 11 लोगों के चंडीगढ़, लुधियाना, पंचकूला, अमृतसर और जीरकपुर में 14 ठिकानों पर छापेमारी की।
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इस रैकेट का सरगना बैंक में सहायक मैनेजर आशु मेहरा है। उसने हांगकांग की एक कंपनी के पक्ष में बैंक से ‘लेटर्स ऑफ कंफर्ट’ (एक तरह की गारंटी) हासिल करने में सहायता की। हांगकांग की उक्त कंपनी ने बैंक ऑफ बड़ौदा की बहामा और पंजाब नेशनल बैंक की दुबई शाखा से वर्ष 2014 से 16 के बीच उधार लिया था।
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सीबीआई ने एफआईआर में बैंक की चंडीगढ़ शाखा में सहायक मैनेजर रहे नीतीश नेगी और गौरव भाटिया के नाम भी शामिल किए हैं। इसके अलावा एफआईआर में चंडीगढ़ की विजन प्रोकोन के प्रोपराइटर दिनेश कुमार, हाइट्स इंटरनेशनल के मालिक अमनप्रीत सिंह सोढी, साईं भक्ति इंपेक्स के निदेशकों अमन कृपाल और गौरव कृपाल के अलावा साईं भक्ति इंपेक्स, हांगकांग की कलर वेव लिमिटेड कंपनी और अन्य अज्ञात अधिकारियों के नाम हैं।
हांगकांग की कंपनी के मालिक भी सोढी है। सूत्रों ने बताया कि मेहरा के पास ऐसा पत्र जारी करने का अधिकार नहीं है। उसके ससुर एमएस दौलत, जो एक रिटायर ब्रिगेडियर हैं, का नाम भी एफआईआर में दर्ज है। एजेंसी बैंक ऑफ बड़ौदा और पीएनबी के अधिकारियों के खिलाफ भी जांच कर रही है। सीबीआई प्रवक्ता आरके गौड़ ने कहा कि आरोपियों ने बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा।