Karnataka: बेंगलुरु से एक हजार किलोमीटर पैदल चलकर ओडिशा पहुंचे तीन मजदूर, जानिए पूरा मामला
तीनों मजदूरों का कहना है कि वह बेंगलुरू में काम करते थे, लेकिन ठेकेदार ने कई महीनों से उन्हें सैलरी नहीं दी थी। घर आने का सोचा, लेकिन जेबें खाली थीं, ठेकेदार मदद भी नहीं कर रहा था। इसलिए उन्हें पैदल अपने घर आना पड़ा।
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ओडिशा के मजदूरों ने एक हजार से अधिक किलोमीटर का सफर पैदल यात्रा चलकर पूरा किया। बैंगलुरु से कालाहांडी अपने घर आने के लिए मजदूरों ने कोरापुट से अपनी यात्रा शुरू की थी। रविवार को तीनों अपने घर पहुंचे। इस दौरान उनके साथ सिर्फ पानी की बोतलें ही थीं, जेब भी खाली पड़ी थी।
बुडू मांझी, कटार मांझी और भिखारी मांझी कालाहांडी जिले के तिंगलकन गांव के निवासी हैं। तीनों का कहना है कि वह बेंगलुरू में काम करते थे, लेकिन ठेकेदार ने कई महीनों से उन्हें सैलरी नहीं दी थी। घर आने का सोचा, लेकिन जेबें खाली थीं, ठेकेदार मदद भी नहीं कर रहा था। इसलिए उन्हें पैदल अपने घर आना पड़ा। हालांकि, रास्ते में कहीं-कहीं उन्हें लिफ्ट जरूर मिल गई थी।
लोगों ने मदद की
मजदूरों का कहना है कि उन्हें पैदल आते देख कई लोगों ने उनकी मदद की। किसी दुकानदार ने खाना खिलाया तो किसी ने लिफ्ट दी। ओडिशा मोटरिस्ट एसोसिएशन के पोतंगी ब्लॉक के अध्यक्ष भगवान पडल ने उन्हें 1500 रुपए दिए। साथ ही भगवान के कालाहांडी के रास्ते में पड़ने वाले नबरंगपुर तक उन्हें गाड़ी भी दी।
सैलरी मांगने पर पीटा
बता दें, ओडिशा के 12 मजदूर दो महीने पहले नौकरी के तलाश में ठेकेदार के साथ बेंगलुरू गए थे। यहां उन्होंने दो महीने तक काम किया, लेकिन दोनों महीनों की उन्हें सैलरी नहीं मिली थी। सैलरी मांगने पर ठेकेदार ने तीनों मजदूरों को पीटना शुरू कर दिया। भिखारी ने बताया कि हम अपने परिवार के लिए नौकरी करने वहां गए थे। वहां हमें सैलरी ही नहीं मिली, मांगने पर पीटा जा रहा था। इसलिए हमारे पास घर वापस आने के कोई रास्ता नहीं था।
कांग्रेस ने साधा निशाना
पडल ने बताया कि बेंगलुरु से पैदल कोरापुट पहुंचने पर तीनों की हालत दयनीय थी। हमने उन्हें भोजन दिया, कुछ पैसे इक्ठ्ठे करके दिए। कांग्रेस विधायक संतोष सिंह सलूजा ने कहा कि यह घटना क्षेत्र के प्रवासी श्रमिकों की स्थिति को दिखाती है। ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इसने 23 साल सत्ता में रहने के बाद भी लोगों को निराश किया है।