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29,334 सहायक शिक्षकों की नौकरी खतरे में, हाईकोर्ट ने दिए जांच के निर्देश

Sun, 13 May 2018 12:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद  
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद   Updated Sun, 13 May 2018 12:35 PM IST
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29,334 assistant teachers jobs in danger, highcourt gave instructions to investigate matter

साइंस व गणित के 29,334 सहायक अध्यापकों की भर्ती में अपात्रों की नियुक्ति की शिकायत पर हाईकोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि बिना साइंस या गणित के स्नातक पास नियुक्त अध्यापकों को सुनकर चार माह में निर्णय लिया जाए। प्रशिक्षण के बाद या  प्रशिक्षण के अंतिम वर्ष के दौरान ही टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) में बैठा जा सकता है। 

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कोर्ट ने कहा कि जिन्होंने प्रशिक्षण के प्रथम वर्ष के दौरान ही टीईटी पास कर नियुक्ति पा ली है, ऐसे अध्यापकों को सुनकर छह माह में बीएसए निर्णय ले। कोर्ट ने कहा कि तथ्य के विषय की जांच अथॉरिटी द्वारा की जानी चाहिए। इस फैसले से सैकड़ों अध्यापकों की नौकरी जा सकती है।
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न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने प्रभात कुमार वर्मा व 53 अन्य की याचिका निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया कि 11 जुलाई 2013 की 29,334 साइंस व गणित सहायक अध्यापकों की भर्ती में मनमानी नियुक्ति के खिलाफ यह याचिकाएं दाखिल की गईं। 

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टीईटी पास करना है आवश्यक

29,334 assistant teachers jobs in danger, highcourt gave instructions to investigate matter

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा सीनियर बेसिक स्कूलों में साइंस गणित या गणित विषय के साथ टीईटी पास होना इसकी अर्हता है। याचिका में कहा गया है कि वही लोग टीईटी परीक्षा में बैठ सकते थे, जो सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की योग्यता रखते हों। लेकिन प्रथम वर्ष का प्रशिक्षण ले रहे लोगों ने परीक्षा दी और सफल होने पर उन्हें नियुक्ति भी मिल गई। 

कोर्ट ने कहा कि नियमावली 1981 के तहत टीईटी में प्रशिक्षण के अंतिम वर्ष के छात्र या प्रशिक्षित हो चुके छात्र ही बैठ सकते हैं। ये दोनों प्रश्न तथ्यात्मक हैं। इसलिए पहले इस संबंध में बीएसए निर्णय लें। याचिका में कहा गया है कि जिन्होंने स्नातक में साइंस या गणित विषय नहीं लिया है और जो प्रशिक्षित नहीं हैं या प्रशिक्षण के अंतिम वर्ष में नहीं हैं, उन्हें नियुक्ति दे दी गई। 

याचिकाओं में बीएसए पर बिना योग्यता व अर्हता के लोगों की नियुक्ति देने का आरोप लगाते हुए चुनौती दी गई थी। शासनादेश 2013 के विपरीत मनमानी नियुक्तियों को रद्द किए जाने की मांग की गई है। कोर्ट ने याचिकाओं का निस्तारण कर शिकायतों को दूर करने का निर्देश बीएसए को दिया है। बता दें याचिका पर अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभू राय ने पक्ष रखा था।

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