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Hindi News ›   India News ›   26 lakh seats in ITI, but admission limited to 12-14 lakh, affiliation of 814 ITI ended in five years

ITI: आईटीआई में 26 लाख सीटें, मगर दाखिला 12-14 लाख तक सिमटा, पांच वर्ष में 814 आईटीआई की संबद्धता समाप्त

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 16 Apr 2025 05:05 PM IST
सार

आईटीआई के लिए विभिन्न ट्रेड में 26 लाख सीटें हैं, मगर दाखिले की बात करें तो वह सिर्फ 12-14 लाख हुए हैं।  देश भर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में 4.49 लाख सीटों वाली 21069 इकाइयों, जो पिछले छह शैक्षणिक सत्रों (वर्ष 2018-19 से 2023-24) से रिक्त पड़ी थीं

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26 lakh seats in ITI, but admission limited to 12-14 lakh, affiliation of 814 ITI ended in five years
आईटीआई - फोटो : संवाद

विस्तार

 देश भर में स्थित आईटीआई के लिए विभिन्न ट्रेड में 26 लाख सीटें हैं, मगर दाखिले की बात करें तो वह 12-14 लाख तक सिमट जाता है। बाकी सीटें खाली रह जाती है। विगत 5 वर्षों (2021-2025) में, प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी), द्वारा 814 आईटीआई की संबद्धता समाप्त कर दी गई। जनवरी 2025 में, देश भर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में 4.49 लाख सीटों वाली 21069 इकाइयों, जो पिछले छह शैक्षणिक सत्रों (वर्ष 2018-19 से 2023-24) से रिक्त पड़ी थीं, की संबद्धता समाप्त कर दी गई। आईटीआई में, 168 राष्ट्रीय कौशल अर्हता कार्यढांचा (एनएसक्यूएफ) अनुकूल ट्रेडों में शिल्पकार प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। प्रत्येक ट्रेड का एक विशिष्ट पाठ्यक्रम है। प्रशिक्षण की अवधि छह महीने से दो वर्ष तक होती है।   

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प्रशिक्षु को अर्ध कुशल श्रमिक के तौर पर तैयार करना
कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी के मुताबिक, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के अंतर्गत प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी), देश के युवाओं के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) का कार्यान्वयन करता है। आईटीआई, लंबे समय से घरेलू उद्योग के लिए विभिन्न ट्रेडों में लगातार कुशल जनशक्ति उपलब्ध कराते रहे हैं। पाठ्यक्रमों को ट्रेडों में बुनियादी कौशल और ज्ञान प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है ताकि प्रशिक्षु को अर्ध कुशल श्रमिक के रूप में रोजगार के लिए तैयार किया जा सके।
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देश में हैं 11296 निजी आईटीआई
वर्तमान में देश में 14612 आईटीआई मौजूद हैं, जिनमें से 3316 राजकीय आईटीआई और 11296 निजी आईटीआई हैं। आईटीआई की स्थापना और दैनन्दिन का अभिशासन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसकी संबद्धता के लिए मानदंड निर्धारित करने, प्रमाणन सहित परीक्षा आयोजित करने और पाठ्यक्रम तैयार जैसी नीतियां केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। जब कभी भी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से नए आईटीआई स्थापित करने का प्रस्ताव पास होता है, तो संबद्धता मानकों और मानदंडों के अनुसार इसकी जांच की जाती है, इस संबंध में निर्णय लिया जाता है।
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डीजीटी द्वारा 814 आईटीआई की संबद्धता समाप्त
प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए, डीजीटी संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र निदेशालय की सिफारिशों के आधार पर निर्धारित संबद्धता मानदंडों का अनुपालन करने में विफल रहने वाले आईटीआई की संबद्धता समाप्त कर दी जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल बुनियादी ढांचे, संकाय अर्हता, पाठ्यचर्चा कार्यान्यवन और प्रशिक्षण प्रदान करने से संबंधित अपेक्षित मानकों को बनाए रखने वाले आईटीआई ही काम करना जारी रखें। विगत पांच वर्षों (2021-2025) में, डीजीटी द्वारा 814 आईटीआई की संबद्धता समाप्त की गई है।  

पाठ्यक्रमों की मांग पर निर्भर करता है दाखिला 
प्रत्येक वर्ष देश भर के आईटीआई में लगभग 26 लाख उपलब्ध सीटों में से करीब 12-14 लाख प्रशिक्षु दाखिला लेते हैं। प्रशिक्षुओं का दाखिला विभिन्न पाठ्यक्रमों की मांग पर निर्भर करता है। यह मांग क्षेत्र दर क्षेत्र अलग-अलग होती है। कुछ पाठ्यक्रमों की मांग अधिक होती है, जिससे नामांकन दर बेहतर होती है, जबकि अन्य पाठ्यक्रमों में कम आवेदक हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सीटें खाली रह जाती हैं। 

 21069 इकाइयों की संबद्धता समाप्त
कारगरता में सुधार करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए, डीजीटी उन इकाइयों की संबद्धता को समाप्त कर देता है, जो लगातार दो वर्ष से रिक्त पड़े हैं। तथापि, कोविड 19 महामारी के प्रभाव को देखते हुए, दो वर्ष की रिक्ति मानदंड में ढील दी गई थी। परिणामस्वरूप, जनवरी 2025 में, देश भर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में 4.49 लाख सीटों वाली 21069 इकाइयों, जो पिछले छह शैक्षणिक सत्रों (वर्ष 2018-19 से 2023-24) से रिक्त पड़ी थीं, की संबद्धता समाप्त कर दी गई। इस प्रक्रिया के तहत, सभी संबंधित आईटीआई को अंतिम निर्णय लिए जाने के पहले अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर दिए जाने संबंधी पूर्व सूचना दी गई थी। इस उपाय के साथ-साथ निर्धारित मानदंडों का अनुपालन न करने वाले आईटीआई की संबद्धता समाप्त करने जैसे उपाय से आईटीआई में प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। 

केंद्र सरकार, समय-समय पर आईटीआई के उन्नयन के लिए राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए योजनाएं संचालित है। डीजीटी द्वारा कई तरह की योजनाएं लागू की गई हैं।     

-'स्ट्राइव' योजना के अंतर्गत, 500 आईटीआई (जिनमें 467 राजकीय और 33 निजी आईटीआई शामिल हैं) को कार्यशालाओं, प्रयोगशालाओं के उन्नयन और आईटीआई की क्षमता निर्माण के लिए चुना गया। यह योजना 31 मई 2024 को समाप्त हो गई। कार्यशालाओं, प्रयोगशालाओं के उन्नयन और आरटीआई की क्षमता निर्माण के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को कुल 581.56 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता जारी की गई।

-'मॉडल' आईटीआई योजना में उपकरण उन्नयन और सिविल कार्यों के लिए प्रति आईटीआई 10 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता के साथ 35 चयनित राजकीय आईटीआई को मॉडल आईटीआई में स्तरोन्नत करने की परिकल्पना की गई थी। यह योजना 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गई। इस योजना के तहत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को कुल 193.10 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।  
-'ईएसडीआई' योजना के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में स्थित आईटीआई को सहायता प्रदान की गई है। इसके तहत प्रत्येक आईटीआई में 3 नए ट्रेड स्थापित कर 22 मौजूदा आईटीआई (प्रति आईटीआई दो करोड़ रुपये) का उन्नयन नए छात्रावासों, नई चारदीवारी का निर्माण कर और प्रत्येक आईटीआई में 3 मौजूदा ट्रेडों के लिए पुराने और अप्रचलित उपकरणों तथा उपस्करों के स्थान पर नए उपकरणों तथा उपस्करों की पूर्ति कर 28 आईटीआई (प्रति आईटीआई दो करोड़ रुपये) में कमी वाले बुनियादी ढांचे की पूर्ति करना और 34 नए आईटीआई (प्रति आईटीआई 9.5 करोड़ रुपये) की स्थापना करना, शामिल है। यह योजना 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गई है। इस योजना केतहत पूर्वोत्तर राज्यों को कुल 308.84 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

-'एलडब्लूई' योजना के तहत, अन्य बातों के साथ साथ वामपंथी उग्रवाद
(एलडब्लूई) प्रभावित 48 जिलों में 7.34 करोड़ रुपये प्रति आईटीआई की दर से 48 आईटीआई की स्थापना के लिए सहायता प्रदान की गई थी। यह योजना 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गई। इस योजना के तहत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को कुल 308.35 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। सीटीएस के अंतर्गत पाठ्यक्रमों की पाठ्यचर्या को उद्योगों के परामर्श से नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है। उनमें नवीनतम प्रौद्योगिकीय प्रगति तथा उद्योग की जरुरतों को समाविष्ट किया जा सके। इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रशिक्षुओं को प्रदान किए जाने वाले कौशल प्रासंगिक बने रहें, जिससे वे रोजगार बाजार की उभरती जरुरतों के अनुकूल तैयार हो सकें।


इसके अलावा, आईटीआई में सीटीएस के तहत संचालित किए जाने वाले प्रत्येक पाठ्यक्रम में नियोज्यता कौशलों संबंधी एक अनिवार्य विषय शामिल किया गया है। यह मॉड्यूल आचरण, संप्रेषणीयता, आईटी दक्षता, कार्य नैनिकता और अन्य विशेषताओं जैसे आवश्यक कौशल पर ध्यान केंद्रित करता है, जो किसी प्रशिक्षु की टीम के भीतर प्रभावी ढंग से काम करने और पेशेवर माहौल में सफल होने की क्षमता को बढ़ाते हैं।

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