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Bombay High Court : ESW कोटा के तहत दिया जाएगा मुंबई हमले की पीड़िता को घर; सरकार ने हाईकोर्ट को दी जानकारी
Wed, 13 Mar 2024 04:00 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 13 Mar 2024 04:00 PM IST
सार
सरकार ने शुरू में दलील दी थी कि वह रोतावन को पहले ही मुआवजा दे चुकी है। हालांकि हाईकोर्ट ने बीते महीने कहा था कि वह आतंकवादी हमले की शिकार थी और विकलांगता और गरीबी के साथ अपना जीवन जी रही थी। अदालत ने यह निर्देश भी दिया था कि वह घर के आवंटन के लिए उनकी याचिका पर पुनर्विचार करे।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
विस्तार
26 नवंबर 2008 को मुंबई आतंकी हमले में जीवित बची देविका रोतावन को आवास दिए जाने के मामले में महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जानकारी दी है। सरकार का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि सरकार ने देविका रोतावन को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत घर आवंटित करने का फैसला किया है। सरकार ने यह जानकारी दो सप्ताह पहले हाईकोर्ट द्वारा फटकार लगाए जाने के बाद दी है। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था कि वह इस मामले में संवेदनशीलता और बुनियादी मानवाधिकारों के साथ विचार करने में फेल साबित हुई है। साथ ही हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से आतंकी हमले की पीड़िता को घर आवंटित करने के संबंध में पुनर्विचार करने के लिए कहा था।
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति फिरदोश पूनीवाला की खंडपीठ को बताया कि राज्य के आवास विभाग ने रोतावन को ईडब्ल्यूएस योजना के तहत म्हाडा (महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण) या एसआरए ( स्लम पुनर्वास प्राधिकरण) के तहत आवास आवंटन करने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़िता को छह महीने के भीतर आवास आवंटित कर दिया जाएगा। सरकार द्वारा जानकारी देने के बाद अदालत ने इस फैसले की सराहना भी की है। अदालत ने कहा कि हम (आवास) मंत्री द्वारा लिए गए फैसले की सराहना करते हैं। जिन्होंने हमारे अनुसार याचिकाकर्ता को इन वर्षों में हुई पीड़ा को देखते हुए वास्तविक न्याय दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए कहा कि छह महीने के भीतर मकान का कब्जा उसे सौंप दिया जाए।
बता दें कि मुंबई आतंकी हमले में जीवित बची देविका रोतावन ने साल 2020 में उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनके वकील ने अदालत में दलील दी थी कि आतंकवाद की शिकार रोतावन ने नौ साल की उम्र से ही विकलांगता और गरीबी के साथ जीवन यापन करते हुए पीड़ा सहन की है। उन्होंने अपनी याचिका में सरकार से आवास आवंटित करने की मांग की थी। रोतावन ने अपनी याचिका में कहा कि उसके पैर में गोली लगी है और उसके पिता और भाई भी घायल हुए हैं। इसमें कहा गया है कि कई बीमारियों के कारण उसके पिता और भाई आजीविका नहीं कमा सकते। वह और उसका परिवार गरीबी में जी रहे हैं और वे बेघर हो जाएंगे क्योंकि वे अपने घर का किराया नहीं दे पाए हैं।
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सरकार ने शुरू में दलील दी थी कि वह रोतावन को पहले ही मुआवजा दे चुकी है। हालांकि हाईकोर्ट ने बीते महीने कहा था कि वह आतंकवादी हमले की शिकार थी और विकलांगता और गरीबी के साथ अपना जीवन जी रही थी। अदालत ने यह निर्देश भी दिया था कि वह घर के आवंटन के लिए उनकी याचिका पर पुनर्विचार करे।
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बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति फिरदोश पूनीवाला की खंडपीठ को बताया कि राज्य के आवास विभाग ने रोतावन को ईडब्ल्यूएस योजना के तहत म्हाडा (महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण) या एसआरए ( स्लम पुनर्वास प्राधिकरण) के तहत आवास आवंटन करने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़िता को छह महीने के भीतर आवास आवंटित कर दिया जाएगा। सरकार द्वारा जानकारी देने के बाद अदालत ने इस फैसले की सराहना भी की है। अदालत ने कहा कि हम (आवास) मंत्री द्वारा लिए गए फैसले की सराहना करते हैं। जिन्होंने हमारे अनुसार याचिकाकर्ता को इन वर्षों में हुई पीड़ा को देखते हुए वास्तविक न्याय दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए कहा कि छह महीने के भीतर मकान का कब्जा उसे सौंप दिया जाए।
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बता दें कि मुंबई आतंकी हमले में जीवित बची देविका रोतावन ने साल 2020 में उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनके वकील ने अदालत में दलील दी थी कि आतंकवाद की शिकार रोतावन ने नौ साल की उम्र से ही विकलांगता और गरीबी के साथ जीवन यापन करते हुए पीड़ा सहन की है। उन्होंने अपनी याचिका में सरकार से आवास आवंटित करने की मांग की थी। रोतावन ने अपनी याचिका में कहा कि उसके पैर में गोली लगी है और उसके पिता और भाई भी घायल हुए हैं। इसमें कहा गया है कि कई बीमारियों के कारण उसके पिता और भाई आजीविका नहीं कमा सकते। वह और उसका परिवार गरीबी में जी रहे हैं और वे बेघर हो जाएंगे क्योंकि वे अपने घर का किराया नहीं दे पाए हैं।
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सरकार ने शुरू में दलील दी थी कि वह रोतावन को पहले ही मुआवजा दे चुकी है। हालांकि हाईकोर्ट ने बीते महीने कहा था कि वह आतंकवादी हमले की शिकार थी और विकलांगता और गरीबी के साथ अपना जीवन जी रही थी। अदालत ने यह निर्देश भी दिया था कि वह घर के आवंटन के लिए उनकी याचिका पर पुनर्विचार करे।