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दुनिया के 25 फीसदी शोधकर्ताओं को साहित्यिक चोरी की समझ नहीं : सर्वे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 30 Nov 2018 03:02 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
दुनिया के 25 फीसदी शोधकर्ताओं को साहित्यिक चोरी और नैतिकता की बहुत खराब समझ है। एक हालिया सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट का नाम ‘ऑथर पर्सपेक्टिव ऑन एकेडमिक पब्लिशिंग : ग्लोबल सर्वे रिपोर्ट 2018’ है।
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इस रिपोर्ट में शोध प्रकाशकों के विभिन्न नजरिए के बारे में बताया गया है। इनमें लेखकों द्वारा दस्तावेज तैयार करने, पत्रिकाओं के साथ संवाद करने और समीक्षकों की टिप्पणियों का जवाब देने में आने वाली चुनौतियों की उल्लेख किया गया है।
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इसके लिए एक वैश्विक शोधार्थी संचार कंपनी एडिटेग ने भारत, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और ब्राजील के 7000 से अधिक शोधकर्ताओं का साक्षात्कार किया। करीब 25 फीसदी उत्तरदाता चोरी और डुप्लीकेट जमा करने के बारे में अनजान या उलझन में थे या उन्हें यह नहीं पता था कि कौन वह अधिकार हासिल कर सकते थे।
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वहीं 31 फीसदी शोधकर्ता नैतिकता के मापदंड या दिशानिर्देश तय करने वाले स्थापित संगठनों कमेटी ऑफ पब्लिकेशन एथिक्स (सीओपीई) या इंटरनेशनल कमेटी ऑफ मेडिकल जर्नल एडिटर्स (आईसीएमजेई) से अंजान थे।