Cough Syrup Deaths: जांच हुई शुरू, 23 नमूनों का परीक्षण, चार में मिला डायथिलीन ग्लाइकोल और एथिलीन ग्लाइकोल
सीडीएससीओ ने डब्ल्यूएचओ से अनुरोध किया है कि वह जल्द से जल्द उसके साथ इन दवाओं से हुई मौतों के कारणों के संबंध में रिपोर्ट साझा करे। नमूने क्षेत्रीय ड्रग टेस्टिंग लैब, चंडीगढ़ को परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
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विस्तार
मैडेन फार्मा की कफ सिरप से कथित तौर पर गाम्बिया में हुई 66 बच्चों मौतों के मामले में केंद्र सरकार ने कहा है कि इस मामले मं जांच शुरू हो गई है। सरकार ने कहा है कि इस मामले में सीडीएससीओ (CDSCO) रिपोर्ट में कहा गया है कि हरियाणा स्थित मैडेन फार्मा को प्रोमेथाजिन ओरल सॉल्यूशन बीपी, कोफेक्सनालिन बेबी कफ सिरप, माकॉफ बेबी कफ सिरप और माग्रिप एन कोल्ड सिरप (MaGrip nCold Syrup) को स्टेट ड्रग कंट्रोलर द्वारा लाइसेंस मिला है और इनके पास केवल निर्यात के लिए इनके उत्पादन की अनुमति है।
23 नमूनों का परीक्षण, चार में मिला अधिक ग्लाइकोल
केंद्र ने कहा कि डब्ल्यूएचओ से मिले अस्थायी परिणामों के अनुसार, इन उत्पादों के 23 नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें से चार नमूनों में डायथिलीन ग्लाइकोल / एथिलीन ग्लाइकोल पाया गया। डब्ल्यूएचओ द्वारा सीडीएससीओ को मृत्यु का सटीक कारण अभी तक नहीं दिया गया है।
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण, सीडीएससीओ ने डब्ल्यूएचओ से अनुरोध किया है कि वह जल्द से जल्द उसके साथ इन दवाओं से हुई मौतों के कारणों के संबंध में रिपोर्ट साझा करे। नमूने (मैडेन फार्मा द्वारा निर्मित एक ही बैच के नियंत्रित नमूने) क्षेत्रीय ड्रग टेस्टिंग लैब, चंडीगढ़ को परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
भारत के दवा नियामक ने एक जांच शुरू की
कफ सिरप से हुई मौतों के सिलसिले में भारत के दवा नियामक ने एक जांच शुरू की है और डब्ल्यूएचओ द्वारा अलर्ट जारी करने के बाद उससे और विवरण मांगा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि हरियाणा के सोनीपत स्थित मैडेन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड द्वारा उत्पादित चार कफ सिरप पश्चिम अफ्रीकी राष्ट्र गाम्बिया में मौतों का कारण हो सकते हैं।
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने गुरुवार को कहा कि फर्म द्वारा निर्मित चार कफ सिरप के नमूने जांच के लिए कोलकाता में केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला भेजे गए हैं। विज ने बताया कि डीसीजीए और हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की एक टीम ने नमूने एकत्र किए हैं और जांच के लिए सीडीएल, कोलकाता भेजे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र के फार्मास्युटिकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) से बात की। विज ने कहा कि फार्मा कंपनी द्वारा निर्मित कफ सिरप को निर्यात के लिए मंजूरी दी गई है। यह देश में बिक्री या मार्केटिंग के लिए उपलब्ध नहीं है। विज ने कहा कि सीडीएल रिपोर्ट आने के बाद जो भी कार्रवाई करनी होगी, वह की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही हम किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं।
कंपनी में उत्पादन, बिक्री पर रोक
कुंडली स्थित फैक्टरी में उत्पादन, बिक्री व निर्यात पर रोक लगा दी गई है। कंपनी का दिल्ली में मौजूद दफ्तर भी बंद हो गया है।
इथाइलेन ग्लाइकोल की मिलावट का शक
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कफ सिरप में डाइइथाइलेन ग्लाइकोल या इथाइलेन ग्लाइकोल की मिलावट हादसे की मुख्य वजह हो सकती है। इन रसायनों के विषाक्त प्रभाव से पेट दर्द, सिरदर्द, उल्टी, दस्त, पेशाब करने में कठिनाई और गुर्दे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिनसे मृत्यु तक हो सकती है।
डब्ल्यूएचओ से मांगी जानकारी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने डब्ल्यूएचओ से विस्तृत सूचनाएं मांगी हैं। संगठन ने न तो हर मौत के आपसी संबंध, न ही उत्पादों व उनके लेबल की जानकारी साझा की है।
इन सिरप की जांच
प्रोमेथाजिन ओरल सॉल्यूशन बीपी, कोफेक्सनालिन बेबी कफ सिरप, माकॉफ बेबी कफ सिरप और माग्रिप एन कोल्ड।
कफ सिरफ से 66 बच्चों की मौत की रिपोर्ट
वहीं, गाम्बिया ने छोटे से पश्चिम अफ्रीकी देश में 60 से अधिक बच्चों की मौत के लिए दोषी ठहराए गए खांसी और ठंडे सिरप को इकट्ठा करने के लिए डोर-टू-डोर अभियान शुरू किया है। एक रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार डब्ल्यूएचओ की यह चेतावनी बीते दिनों गाम्बिया में हुए 66 बच्चों की मौत से जुड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने यह भी आगाह किया कि दूषित दवाएं पश्चिम अफ्रीकी देश के बाहर बांटी जा सकती हैं। अगर ऐसा होता तो इसका वैश्विक स्तर पर असर दिख सकता था। प्रयोगशाला में हुई जांच के दौरान इन कुछ नमूनों में जरूरत से ज्यादा डायथिलीन ग्लाइकोल और एथिलीन ग्लाइकोल की मात्रा पाई गई है। डब्ल्यूएचओ ने अपने एक मेडिकल प्रोडक्ट रिपोर्ट में यह बात कही है।