आजादी के बाद शिक्षा के रास्ते पर सरपट दौड़ा देश, 23 IIT, 19 IIM की स्थापना
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15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ तब सबसे बड़ी जरूरत थी उसे आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध करना। शिक्षा के माध्यम से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता था। पंडित नेहरू के नेतृत्व में गठित हुई पहली सरकार ने इस जरूरत को समझा और शुरूआत से ही देश में शिक्षा के ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया। सबसे बड़ी जरूरत थी देश के विकास में योगदान देने के लिए ऐसे युवाओं को तैयार करने की जो तकनीक और प्रबंधन की क्षमताओं के बूते देश को एक नई दिशा दे सकें, जो देश के आधारभूत ढांचे के निर्माण में बड़ा योगदान दे सकें। पंडित नेहरू की सरकार ने इस जरूरत को समझा और देश में युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए आईआईटी और आईआईएम की स्थापना की।
1951 में हुई थी पहले IIT की स्थापना
पहले आईआईटी की स्थापना देश पश्चिम बंगाल के शहर खड़गपुर में 1951 में हुई। खास बात ये है कि इससे पहले देश में इस तरह की पढ़ाई के लिए कोई खास संस्थान नहीं हुआ करते थे, नतीजतन देश के युवाओं को बेहतर पढ़ाई के लिए विदेशों का रुख करना पड़ता था। लेकिन संपन्न परिवारों से संबंध रखने वाले युवाओं को ही यह मौका मिल पाता था, नतीजतन भारत जैसे गरीब देश में काफी संख्या में युवा उच्च तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाते थे।
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इसके बाद 1958 में आईआईटी बांबे, 1959 में आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास की स्थापना हुई। साल 1961 में देश की राजधानी दिल्ली में भी आईआईटी की स्थापना की गई। आईआईटी के महत्व को समझते हुए केंद्र सरकार ने 1961 में संसद में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एक्ट-1961 पेश किया जिसके जरिए देश में आईआईटी को कानूनी जामा प्रदान करते हुए उसे स्वायत्ता प्रदान की गई। इन्हीं इंस्टीट्यूट से पढ़कर निकले हजारों युवाओं ने दुनियाभर में अपनी प्रतिभा का डंका बजाया।
देश में संचालित किए जा रहे हैं कुल 23 IIT
बाद में साल 2004 में आई मनमोहन सिंह सरकार ने तकनीकी शिक्षा के महत्व को समझा और देश में कुल 20 आईआईटी और 20 का लक्ष्य तय किया। खुद इसकी घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वतंत्रता दिवस के दिन लालकिले से अपने भाषण में की। मौजूदा मोदी सरकार ने उसे आगे बढ़ाया, जिसकी बदौलत आज देश में कुल 23 आईआईटी संचालित किए जा रहे हैं। कुछ इसी तरह देश में आईआईएम की स्थापना की गई।
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देश में औद्योगिकरण के बाद कंपनियों को आगे बढ़ाने के लिए पेशेवर प्रबंधकों की जरूरत पड़ी, जिसकी पूर्ति आईआईएम जैसे बड़े प्रबंध संस्थानों से की गई। देश में पहले आईआईएम की स्थापना भी पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में हुई। योजना आयोग की सिफारिश पर 1961 में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में देश के पहले आईआईएम की स्थापना की गई। इसी साल अहमदाबाद में दूसरे आईआईएम और साल 1973 में कर्नाटक की राजधानी बैंगलौर में तीसरे आईआईएम को स्थापित किया गया।
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IIM में पीजी डिग्री देने की घोषणा
साल 1984 में लखनऊ में चौथे और 1996 में केरल के काझीकोड में पांचवे और इंदौर में छठे आईआईएम की स्थापना हुई। मनमोहन सिंह सरकार ने एक बार फिर आईआईएम के काम को आगे बढ़ाया और देश में कई अन्य आईआईएम की स्थापना हुई। वर्तमान में देश में 20 आईआईएम हजारों छात्रों को प्रबंधन शिक्षा में प्रशिक्षित कर रहे हैं। इस साल की शुरूआत तक तमाम आईआईएम में प्रबंधन में पोस्ट ग्रेज्यूएट डिप्लोमा दिया जाता था, लेकिन मोदी सरकार ने इसमें तब्दीली करते हुए पीजी डिग्री की राह तैयार की। जनवरी 2017 में संसद में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बिल पेश किया गया जिसमें IIM में पीजी डिग्री देने की घोषणा हुई।