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UN Report: दुनिया भर में 23 करोड़ महिलाओं-बच्चियों ने झेली खतना की पीड़ा, 2016 की तुलना में 15 फीसदी का इजाफा

Fri, 15 Mar 2024 06:24 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 15 Mar 2024 06:24 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 23 करोड़ महिलाएं और बच्चियां ऐसी हैं, जिन्होंने खतना का दर्द झेला है। वर्ष 2016 से तुलना करें तो पिछले आठ वर्षों में खतना करने वाली महिलाओं और बच्चियों की संख्या में तीन करोड़ यानी करीब 15 फीसदी का इजाफा हुआ है।

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23 crore women and girls suffered pain of circumcision an increase 15 percent
The United Nations logo - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कुछ सामाजिक कुरीतियां ऐसी हैं जो सदियों बाद आज भी यथावत हैं। इनमें महिलाओं का फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (एफजीएम) यानी खतना भी शामिल है। ऐसा करते समय उन्हें बेहोश या प्रभावित इलाके को सुन्न नहीं किया जाता और न ही कोई डॉक्टर निगरानी के लिए मौजूद होता है।

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संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 23 करोड़ महिलाएं और बच्चियां ऐसी हैं, जिन्होंने खतना का दर्द झेला है। वर्ष 2016 से तुलना करें तो पिछले आठ वर्षों में खतना करने वाली महिलाओं और बच्चियों की संख्या में तीन करोड़ यानी करीब 15 फीसदी का इजाफा हुआ है। दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में इस पर रोक के बावजूद यह प्रथा आज भी बेधड़क चल रही है। इक्वलिटी नाउ ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रथा दुनिया के 92 से ज्यादा देशों में जारी है। भारत भी इस कुरीति से अछूता नहीं है। भारत में दाऊदी बोहरा समुदाय की महिलाएं इस दर्दनाक त्रासदी को लगातार झेल रही हैं।  

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सबसे ज्यादा दंश झेल रहा अफ्रीका, एशिया दूसरे नंबर पर
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 14.4 करोड़ से अधिक मामलों के साथ अफ्रीकी देश इसका सबसे अधिक दंश झेल रहे हैं। दूसरे नंबर पर एशिया है, जहां आठ करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं। इसके अलावा मध्य पूर्व में खतना के 60 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यह कुप्रथा छोटे, पृथक समुदायों और दुनिया भर में प्रवासियों के बीच भी व्याप्त है।

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गरीब देशों में बदतर हो रही है स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में इस कुप्रथा का प्रसार तो नहीं हो रहा है, लेकिन जिन देशों में इसका चलन है, वहां पैदा होने वाली बच्चियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यूनिसेफ के विश्लेषण के अनुसार, खतना के बाद जीवित बच गई हर 10 में से चार बच्चियां उन देशों में रह रही हैं जो पहले ही गरीबी और संघर्ष की मार झेल रहे हैं। इन देशों में आबादी भी बड़ी तेजी से बढ़ रही है।

उठाए जा रहे कदम पर्याप्त नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक इस दिशा में प्रगति हो रही है लेकिन रफ्तार बहुत धीमी है। इथोपिया जैसे कुछ देशों ने जरूर तेजी दिखाई है। संतोषजनक तथ्य यह है कि 30 वर्षों में जो प्रगति हुई है उसमें से करीब आधे से ज्यादा पिछले दशक में ही दर्ज की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि इसके बावजूद प्रगति की यह रफ्तार 2030 तक इसके उन्मूलन लक्ष्य को हासिल करने के लिए नाकाफी रहेगी।

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