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मुंबई: पुलिस की मेहनत लाई रंग, गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान लापता हुए थे 22 बच्चे; सभी अपने परिवार से मिले
Sat, 30 Sep 2023 08:33 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Sat, 30 Sep 2023 08:33 PM IST
सार
मुम्बई पुलिस की कड़ी मेहनत रंग लाई है। गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान लापता 22 बच्चों को उनके परिवार से मिलाया। इसके लिए पुलिस ने बनाई थी कई टीमें ,जिसके जरिए बच्चों को ढूंढा गया।
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मुंबई पुलिस(फाइल)
- फोटो : Social Media
विस्तार
मुम्बई के गिरगांव चौपाटी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस में 22 बच्चे अपने परिवार से बिछुड़ गए थे। लेकिन मुम्बई पुलिस ने लापता बच्चों को ढूंढ उन्हें उनके परिवार से मिला दिया। इस मामले की पूरी जानकारी मुम्बई पुलिस द्वारा शनिवार को दी गई।
पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि गुरुवार को 10 दिवसीय गणपति महोत्सव के आखिरी दिन मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए लाखों लोग शहर के समुद्र तटों और झीलों पर एकत्र हुए। लापता बच्चों के माता-पिताओं ने डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।
बच्चों को ढूंढने के लिए बनाई टीम
सात से 14 साल के लापता बच्चों को ढूंढने के लिए शहर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई टीमें बनाई। उन्होंने कहा, पुलिस ने लाउडस्पीकर पर भी अपील की। साथ ही साथ लापता बच्चों को ढूंढने के लिए तलाश जारी रखी। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार 22 लापता बच्चों का पता लगा ही लिया गया।
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अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि कुछ बच्चों को अपने परिवार के सदस्यों का फोन नंबर याद था। जबकि कुछ ने पुलिस कर्मियों को अपने घर का पता बताया। जिसके बाद पुलिस कर्मियों द्वारा सभी को उनके परिवार को सौंप दिया गया।
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पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि गुरुवार को 10 दिवसीय गणपति महोत्सव के आखिरी दिन मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए लाखों लोग शहर के समुद्र तटों और झीलों पर एकत्र हुए। लापता बच्चों के माता-पिताओं ने डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।
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बच्चों को ढूंढने के लिए बनाई टीम
सात से 14 साल के लापता बच्चों को ढूंढने के लिए शहर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई टीमें बनाई। उन्होंने कहा, पुलिस ने लाउडस्पीकर पर भी अपील की। साथ ही साथ लापता बच्चों को ढूंढने के लिए तलाश जारी रखी। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार 22 लापता बच्चों का पता लगा ही लिया गया।
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अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि कुछ बच्चों को अपने परिवार के सदस्यों का फोन नंबर याद था। जबकि कुछ ने पुलिस कर्मियों को अपने घर का पता बताया। जिसके बाद पुलिस कर्मियों द्वारा सभी को उनके परिवार को सौंप दिया गया।