विपक्ष के 21 दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, राहुल ने जताया साथ आने का भरोसा
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मोदी सरकार की कार्यशैली, नीतियों के साथ संवैधानिक व स्वायत्त संस्थाओं में हस्तक्षेप के खिलाफ विपक्ष के 21 राजनीतिक दलों ने सोमवार को पार्लियामेंट एनेक्सी में बैठक कर आरपार की लड़ाई का फैसला लिया है। हालांकि यूपी से संबंधित दो बड़े राजनीतिक दल सपा और बसपा ने विपक्षी एकता की बैठक से दूरी बनाए रखी।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सपा-बसपा के भी साथ आने का भरोसा जताते हुए कहा है कि एकजुटता को लेकर अभी प्रक्रिया शुरू हुई है और सभी प्रगतिशील सोच वाले दलों का सम्मान करते हैं उन्हें साथ लाने की कोशिश करेंगे। विपक्षी पार्टियां जल्द ही विभिन्न मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति से मुलाकात भी कर सकती हैं।
विपक्षी दलों को एकसूत्र में पिरोने वाले सूत्रधार चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि विपक्षी दलों की ऐतिहासिक बैठक रही। उन्होंने कहा कि हम सब दलों की ही नहीं सरकार के खिलाफ ये देश की आवाज है। मोदी सरकार स्वायत्त संस्थाओं पर हमला कर रही है और आरबीआई गवर्नर का इस्तीफा इसी हमले का नतीजा है।
देश का अल्पसंख्यक असुरिक्षत है उसकी रक्षा करेंगे। नायडू ने जल्द एक्शन प्लान तैयार करने के साथ संसद सत्र के दौरान सदन के अंदर और बाहर एकजुटता के साथ सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की घोषणा की।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मीडिया से कहा हम सभी राजनीतिक दल आरएसएस और भाजपा के एजेंडे के खिलाफ एकजुट हुए हैं और इन्हें रोकने का काम करेंगे। राहुल ने फिर कहा कि मोदी सरकार में सभी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के साथ सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों को इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के लिए किया जा रहा है जिसके खिलाफ सब मिलकर विरोध करेंगे।
विजय माल्या के प्रत्यर्पण की बात पर राहुल ने कहा कि ये कोई बड़ी सफलता नहीं है। देश के सामने बड़ा सवाल है किसान हर रोज आत्महत्या कर रहे हैं। माल्या, नीरव मोदी, मेहलु चोकसी देश के बैंकिंग सिस्टम को बुरी तरह चरमरा कर गए हैं।
वहीं राफेल विमान खरीद के भ्रष्टाचार जिसमें सीधे तौर पर पीएम के कहने अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं उस पर एक शब्द नहीं बोलते। भ्रष्टाचार की बात करनी है तो राफेल की करें। राहुल आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे पर कहा कि वे देश की अर्थव्यवस्था को बचाना चाहते थे इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है।
बैठक समाप्त होने से कुछ पहले बाहर निकलीं पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा देश के राजनीतिक और आर्थिक आपातकाल की स्थिति बन गई है। जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और संवैधानिक संस्थाओं को बंधक बनाने की कोशिशें हो रही हैं। उनका कहना है कि आरबीआई के गवर्नर ने राजनीतिक कारणों से इस्तीफा दिया है और देश में आपदा जैसे हालात हैं। हम सब मिलकर इस सरकार का विरोध करेंगे।
बैठक सोनिया गांधी के संबोधन से शुरू हुई जिसमें उन्होंने राजनीतिक दलों से छोटे हितों को छोड़कर देश के माहौल और मोदी सरकार के रवैये के खिलाफ एकजुटता को समय की मांग बताया। बैठक में सभी दलों के प्रतिनिधियों ने संक्षिप्त में अपनी बात रखी। विपक्षी दलों के बीच समन्यवय के लिए एक कमेटी का गठन भी किया जाएगा।
21 राजनीतिक पार्टियों ने दिखाई एकता
कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा, सोनिया गांधी, डा. मनमोहन सिंह, अहमद पटेल, एके.एंटनी, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खरगे और अशोक गहलोत बैठक में मौजूद थे। एनसीपी से शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल और माजिद मेनन, टीएमसी से खुद ममता बनर्जी, टीडीपी से सीएम चंद्रबाबू नायडू के साथ कुंभमपति राममोहन और वाईएस चौधरी, जेडीएस से पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और दानिश अली, सीपीएम से सीताराम येचुरी और टीके रंगराजन, नेशनल कांफ्रेस से फारूख अब्दुल्ला, एलजेडी से शरद यादव, आरजेडी से तेजस्वी यादव, जयप्रकाश नारायण, मनोज झा, डीएमके से तिरू स्टालिन, श्रीमती कनीमोझी, टीआर बालू, जेएमएम से हेमंत सोरेन, आरएलडी से अजीत सिंह, सीपीआई से डी.राजा, केसीएम से जोसे के मनी, एचएएम से जीतम राम मांझी, जेवीएम से बाबू लाल मरांडी, आईयूएमएल से पीके कुन्हालीकुट्टी, एआईयूडीएफ बदरूद्दीन अजमल, आमआदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और भगवंत मान, एनपीएफ केजी केन्ये और आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने बैठक में हिस्सा लिया।