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ECI Report: 2024 लोकसभा चुनाव में नोटा का वोट प्रतिशत सबसे कम, चुनाव आयोग ने आम चुनावों पर जारी की रिपोर्ट

Fri, 14 Feb 2025 03:39 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 14 Feb 2025 03:39 PM IST
सार

चुनाव आयोग के द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन लोकसभा चुनावों में नोटा वोटों की संख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। 2014 में नोटा वोटों का प्रतिशत 1.08 था, जो 2024 में घटकर 0.99 प्रतिशत हो गया है। हालांकि यह प्रतिशत कम नजर आता है, लेकिन यह महत्वपूर्ण हो सकता है। 

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2024 LS poll: NOTA records lowest percentage share since introduced in 2014 general election News In Hindi
नोटा

विस्तार

देश में 2024 के बाद हुए लोकसभा चुनावों में ईवीएम में 'उपरोक्त में से कोई नहीं' (नोटा) का विकल्प हमेशा चर्चा का विषय रहा है। इसी बीच चुनाव आयोग द्वारा साझा एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि 2014 आम चुनाव के बाद नोटा का प्रतिशत सबसे कम 2024 लोकसभा चुनाव में रहा। बता दें कि नोटा का विकल्प 2014 आम चुनाव में लागू किया गया था। 
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एटलस-2024 ने जारी किया रिपोर्ट  
चुनाव आयोग की 'एटलस-2024' के अनुसार, पिछले तीन लोकसभा चुनावों में नोटा वोटों की संख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। 2014 में नोटा वोटों का प्रतिशत 1.08 था, जो 2024 में घटकर 0.99 प्रतिशत हो गया है। हालांकि यह प्रतिशत कम नजर आता है, लेकिन यह महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां जीत का अंतर कम था, और जहां नोटा वोटों ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया हो सकता है।
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बिहार में नोटा का प्रतिशत सबसे अधिक
राज्यों में नोटा वोटों का प्रतिशत अलग-अलग रहा है, जो विभिन्न राजनीतिक गतिशीलताओं, मतदाता प्राथमिकताओं और राजनीतिक भागीदारी के स्तर को दर्शाता है। बिहार में नोटा वोटों का प्रतिशत सबसे अधिक 2.07 प्रतिशत रहा, जबकि दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में यह 2.06 प्रतिशत था। गुजरात में यह 1.58 प्रतिशत रहा। वहीं, नागालैंड में नोटा वोटों का प्रतिशत सबसे कम 0.21 प्रतिशत था, जो यह संकेत देता है कि वहां के मतदाता आमतौर पर किसी न किसी उम्मीदवार को चुनते हैं।
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नोटा का विकल्प क्यों? एक नजर
नोटा वोटों की यह भिन्नता विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं की भागीदारी को दर्शाती है। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने ईवीएम पर नोटा बटन को अंतिम विकल्प के रूप में जोड़ा था। इससे पहले, जो लोग किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहते थे, उन्हें फॉर्म 49-ओ भरना पड़ता था, लेकिन इससे मतदाता की गोपनीयता पर सवाल उठते थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह अनुरोध किया था कि यदि मतदाताओं ने बहुमत से नोटा विकल्प का चयन किया, तो नए चुनाव कराए जाएं, लेकिन यह सुझाव नहीं स्वीकार किया गया था।
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