विश्व पृथ्वी दिवस: 70 के दशक की तुलना में आज तेजी से गर्म हो रही धरती, रोज आ रही है 300 मीट्रिक ब्रह्मांडीय धूल
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
विश्व भर में आज 22 अप्रैल को इंटरनेशनल अर्थ डे यानी विश्व पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का मकसद प्रदूषण और अन्य गतिविधियों में भारी वृद्धि के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है। क्योंकि आज हर दिन कोई न कोई व्यक्ति किसी ने किसी रूप में प्रकृति और पृथ्वी को नुकसान पहुंचा रहा है। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए और धरती को सुरक्षित रखने के लिए अर्थ डे मनाया जाता है। इस साल वर्ल्ड अर्थ डे की थीम 'इन्वेस्ट इन आवर अर्थ' यानी 'हमारी धरती में निवेश करें' रखी गई है। ताकि आम लोगों को यह बताया जा सके कि कैसे हम धरती को सुरक्षित कर सके और आने वाले पीढ़ियों को एक सुरक्षित वातावरण दे सके।
इस साल की थीम 'इन्वेस्ट इन आवर अर्थ'
विश्व पृथ्वी दिवस मनाने के पीछे का उद्देश्य दुनिया भर के लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना है। पृथ्वी पर हो रहे बदलाव, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग को कम करना है। हर साल पृथ्वी की चुनौतियों को ध्यान में रख कर अर्थ डे के लिए एक थीम चुनी जाती है और उस थीम के अनुसार लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। 'इन्वेस्ट इन आवर अर्थ' यानी हमारी धरती में निवेश करें, इस थीम का उद्देश्य है कि सभी लोग साथ आएं और धरती और उसकी जैव विविधता को बचाने का कार्य करने के लिए पहल कर सकें। साथ ही इस अर्थ डे की थीम दुनिया के सबसे बड़े खतरे यानी जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए समाधान ढ़ूंढ़ने पर केंद्रित है। वहीं पिछले साल विश्व पृथ्वी दिवस पर हमारी धरती को पुनर्स्थापित करें, थीम दी गई थी।
विश्व पृथ्वी दिवस पर प्रकाशित कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानी दखल के चलते जिस तरह ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ी है, उससे धरती पर तेजी से बदलाव हो रहे हैं। पिछले 2000 सालों में जो बदलाव हुए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। 1750 के बाद से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन तेजी से बढ़ा है। साल 2100 तक दुनिया का तापमान काफी बढ़ जाएगा। लोगों को भयानक गर्मी झेलनी पड़ेगी। कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण नहीं रोका गया, तो तापमान में औसतन 4.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी। अगले दो दशक में तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा। पारा अगर इतनी तेजी से बढ़ेगा तो जाहिर है ग्लेशियर भी पिघलेंगे। इनका पानी मैदानी और समुद्री इलाकों में तबाही लेकर आएगा।
2019 में CO2 स्तर सबसे ज्यादा
रेड डाटा बुक आवर वर्ल्ड इन डाटा के अनुसार, रोज पृथ्वी पर 300 मीट्रिक कॉस्मिक डस्ट आ रही है। पृथ्वी के कोर में लगभग 85 से 88 फीसदी लोहा, लगभग 47 फीसदी ऑक्सीजन है। धरती करीब 454 करोड़ साल पहले बनी। इसमें 70 फीसदी से अधिक पानी है। लेकिन इसका भार महज एक फीसदी ही है। 1970 के दशक में धरती के गर्म होने की दर में आज बहुत ही तेजी से वृद्धि हो रही है। पिछले 2000 सालों में तापमान उतना नहीं बढ़ा जितना पिछले 50 सालों में बढ़ा। 2019 में पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर अब तक सबसे ज्यादा रहा।
इधर पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि आज धरती पर प्रदूषण और गंदगी को बढ़ने से रोकना चाहिए और पृथ्वी पर ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने चाहिए। हमारी पहली प्राथमिकता बिजली बचाना है। इससे ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति से बचा जा सकेगा। आज इसी समस्या के कारण पृथ्वी पर प्राकृतिक असंतुलन बढ़ता जा रहा है। जहां तक संभव हो सके प्लास्टिक की चीजों का उपयोग नहीं करें। प्लास्टिक के कारण पृथ्वी पर गंदगी लगातार बढ़ रही है। वहीं, रसायन और इससे बनी चीजों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। रसायनों से पृथ्वी पर पानी, हवा और मिट्टी यानी हर तरह से प्रदूषण फैलता है। हमें इसे रोकना चाहिए।
यह कहता है अर्थ डे का इतिहास
1960 और 1970 के दशक में लोगों ने ज्यादा संख्या में पेड़ काटने शुरू कर दिए। इससे जंगल खत्म होने लगे। लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए 1969 में वाशिंगटन में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। विस्कोंसिन के अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने ऐलान किया कि 1970 में देशभर में पर्यावरण को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें कई लोगों ने हिस्सा लिया। फिर साल 1970 में पहली बार 22 अप्रैल को अर्थ डे मनाया गया।
इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि यूएन जनरल असेंबली ने 2009 में अपनाए गए एक प्रस्ताव के माध्यम से 22 अप्रैल को इंटरनेशनल अर्थ डे के रूप में चुना। लेकिन इस विषय में जुड़ा इतिहास 1970 के दशक में देखा जा सकता है, जब स्टॉकहोम ने पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने का कार्य किया था। बाद में 1992 में 178 से अधिक देशों की सरकारों द्वारा रियो डी जेनेरियो अर्थ समिट में एनवायरमेंट और डेवलपमेंट विषय पर बात की गई थी। तब से ही यूनाइटेड नेशंस इस विशेष दिन को इंटरनेशनल अर्थ डे के रूप में मनाता है।