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Delhi Riots Case: उमर खालिद, शरजील इमाम को मिलेगी जमानत? 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला

Sat, 03 Jan 2026 05:55 PM IST
लव गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: लव गौर Updated Sat, 03 Jan 2026 05:55 PM IST
सार

Delhi Riots Case: 2020 दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट 5 जनवरी को सुनवाई करेगा, जिसमें शीर्ष अदालत उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा।

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2020 Delhi riots case SC to pronounce verdicts on bail pleas of activists Umar Khalid-Sharjeel Imam on Jan 5
सुप्रीम कोर्ट में 5 जनवरी को शरजील इमाम, उमर खालिद की जमानत याचिका पर फैसला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट 5 जनवरी, सोमवार को शरजील इमाम, उमर खालिद और अन्य की याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगा, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश से जुड़े UAPA मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। न्यायधीश अरविंद कुमार और एन वी अंजारिया की पीठ यह फैसला सुनाएगी।
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10 दिसंबर को जमानत पर सुरक्षित रखा था फैसला
इसी के साथ न्यायधीश अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद की याचिकाओं पर भी फैसला सुनाएगी। मालूम हो कि 10 दिसंबर 2025 को सभी आरोपियों की जमानत याचिका पर शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसी के साथ कोर्ट ने 18 दिसंबर तक दोनों पक्षों को अपनी दलीलों के समर्थन में दस्तावेज जमा कराने को भी कहा था।
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10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू, और आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों की अलग-अलग याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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दंगों का 'मुख्य साजिशकर्ता' होने का आरोप
बता दें कि उमर, शरजील और अन्य आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), जो एक आतंकवाद विरोधी कानून है, और पुराने IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन पर 2020 के दंगों का 'मुख्य साजिशकर्ता' होने का आरोप है, जिसमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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यह हिंसा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। आरोपियों ने फरवरी 2020 के दंगों के "बड़ी साजिश" मामले में 2 सितंबर के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

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